रायपुर, बिलासपुर।
महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) को कमजोर किए जाने के खिलाफ छत्तीसगढ़ में चल रहे कांग्रेस के निर्णायक अभियान “मनरेगा बचाओ संग्राम” को संगठित और प्रभावी स्वरूप देने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने आंदोलन के सफल संचालन हेतु प्रदेश स्तरीय समन्वय समिति का गठन किया है, जिसमें कांग्रेस के वरिष्ठ नेता एवं पूर्व जिलाध्यक्ष, कांग्रेस कमेटी बिलासपुर श्री विजय केसरवानी को सदस्य के रूप में शामिल किया गया है।

राजनीतिक और संगठनात्मक हलकों में इस नियुक्ति को खास महत्व दिया जा रहा है। विजय केसरवानी की पहचान एक ऐसे नेता के रूप में रही है, जिन्होंने संगठन निर्माण से लेकर जनआंदोलनों तक जमीनी राजनीति को मजबूती दी है। पार्टी नेतृत्व ने उनकी संगठनात्मक दक्षता, जनसरोकारों के प्रति निरंतर सक्रियता और लंबे राजनीतिक अनुभव को ध्यान में रखते हुए उन्हें यह जिम्मेदारी सौंपी है।
प्रदेश कांग्रेस कमेटी का आकलन है कि विजय केसरवानी की सहभागिता से मनरेगा बचाओ संग्राम को न केवल वैचारिक धार मिलेगी, बल्कि इसे गांव-गांव तक ले जाने में भी गति आएगी। मजदूरों, किसानों और ग्रामीण परिवारों से उनके सतत संवाद को आंदोलन के लिए एक महत्वपूर्ण आधार माना जा रहा है।
मनरेगा को ग्रामीण भारत की जीवनरेखा बताते हुए कांग्रेस पार्टी पहले से ही मजदूरी भुगतान, रोजगार दिवसों में कटौती और योजना के कथित कमजोर क्रियान्वयन जैसे मुद्दों को लेकर मुखर है। पार्टी का रुख स्पष्ट है कि यह लड़ाई केवल एक योजना की नहीं, बल्कि ग्रामीण सम्मान, रोजगार के अधिकार और सामाजिक सुरक्षा से जुड़ी हुई है।
प्रदेश स्तरीय समन्वय समिति के गठन के साथ ही कांग्रेस संगठनात्मक रूप से आंदोलन को नई दिशा देने की तैयारी में है। विजय केसरवानी जैसे अनुभवी नेता की मौजूदगी से यह संदेश भी स्पष्ट होता है कि पार्टी इस संघर्ष को पूरी गंभीरता और रणनीतिक मजबूती के साथ आगे बढ़ाने के मूड में है।



