
बिलासपुर, 16 जनवरी 2026।
देशभर में चिकित्सा शिक्षा की गुणवत्ता और प्रशिक्षण पद्धतियों को नई दिशा देने के उद्देश्य से छत्तीसगढ़ आयुर्विज्ञान संस्थान (सिम्स), बिलासपुर में राष्ट्रीय स्तर की तीन दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया है। अधिष्ठाता (डीन) डॉ. रमणेश मूर्ति के कुशल नेतृत्व एवं मार्गदर्शन में आयोजित इस कार्यशाला में आधुनिक चिकित्सा शिक्षा की नवीन अवधारणाओं और नवाचारों पर गहन प्रशिक्षण दिया जा रहा है। कार्यक्रम का समन्वय राष्ट्रीय आयुर्विज्ञान आयोग (NMC) की ओर से आए समन्वयक डॉ. परमानंद अग्रवाल द्वारा किया जा रहा है, जिसमें तीन मेडिकल कॉलेजों के फैकल्टी सदस्य सहभागिता कर रहे हैं।

कार्यशाला के दौरान चिकित्सा शिक्षकों को सिम्युलेशन आधारित शिक्षण (Simulation-based Learning) की विस्तृत जानकारी दी जा रही है। इस पद्धति के अंतर्गत बताया गया कि वास्तविक मरीज के संपर्क में आने से पूर्व चिकित्सक किस प्रकार कृत्रिम परिवेश में अभ्यास कर अपने तकनीकी कौशल के साथ-साथ ‘सॉफ्ट स्किल्स’ को भी सशक्त बना सकते हैं। सिम्युलेशन तकनीक के माध्यम से जटिल चिकित्सकीय परिस्थितियों का अभ्यास कर चिकित्सकों को व्यावहारिक दक्षता और आत्मविश्वास से लैस करने पर विशेष जोर दिया गया।
कार्यक्रम में यह भी रेखांकित किया गया कि सिम्युलेशन आधारित प्रशिक्षण से मरीजों की सुरक्षा सुनिश्चित होती है और चिकित्सा सेवाओं की गुणवत्ता में सुधार आता है। इसके साथ ही कार्यशाला के सत्रों में ‘एटकॉम’ (AETCOM – Attitude, Ethics and Communication) मॉड्यूल के अंतर्गत मरीजों के साथ संवाद कौशल, नैतिक मूल्यों और मानवीय संवेदनाओं पर केंद्रित गहन चर्चा की गई, जिससे भविष्य के चिकित्सकों को संवेदनशील और जिम्मेदार पेशेवर के रूप में तैयार किया जा सके।
इस राष्ट्रीय स्तरीय आयोजन में सिम्स के वरिष्ठ विशेषज्ञों की सक्रिय भागीदारी रही। प्रमुख रूप से चिकित्सा अधीक्षक डॉ. लखन सिंह, एनेस्थीसिया विभाग की प्रोफेसर डॉ. मधुमिता मूर्ति, एमईयू समन्वयक डॉ. केशव सहित संस्थान के अन्य फैकल्टी सदस्य कार्यशाला में उपस्थित रहे और अपने अनुभव साझा किए।
सिम्स बिलासपुर में आयोजित यह कार्यशाला चिकित्सा शिक्षा को आधुनिक तकनीकों से जोड़ने, शिक्षकों को नवाचार आधारित प्रशिक्षण प्रदान करने और स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक प्रभावी व संवेदनशील बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण राष्ट्रीय पहल के रूप में सामने आई है।



