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Vb g ram g  बनाम गांधी पर सियासी संग्राम: मनरेगा बदलाव पर बिलासपुर में BJP–कांग्रेस आमने-सामने

Mohammed Israil
Mohammed Israil  - Editor
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बिलासपुर। विकसित भारत 2047 के राष्ट्रीय विजन, ग्रामीण रोजगार के नए ढांचे और मनरेगा के नाम परिवर्तन को लेकर बिलासपुर की राजनीति अचानक राष्ट्रीय विमर्श के केंद्र में आ गई है। एक ओर भाजपा के वरिष्ठ नेता, पूर्व मंत्री एवं बिलासपुर विधायक अमर अग्रवाल ने इसे ऐतिहासिक सुधार बताते हुए कांग्रेस पर भ्रम फैलाने का आरोप लगाया, तो दूसरी ओर कांग्रेस ने पलटवार करते हुए इसे “नाम बदलकर राजनीति साधने” और गरीबों के रोजगार को धीरे-धीरे खत्म करने की साजिश करार दिया। दोनों दलों के तीखे बयानों ने ग्रामीण विकास, इतिहास, विचारधारा और आर्थिक ढांचे तक की बहस को तेज कर दिया है।
भाजपा का पक्ष | ‘विकसित भारत 2047’ के अनुरूप नया ग्रामीण मॉडल


पूर्व मंत्री एवं विधायक अमर अग्रवाल ने पत्रकारों से चर्चा में कहा कि विकसित भारत 2047 के तहत ग्रामीण विकास का नया ढांचा तैयार किया गया है, जो राष्ट्रीय विजन के अनुरूप है और इसे ऐतिहासिक कदम बताया। उन्होंने कहा कि रोजगार गारंटी और आजीविका मिशन से जुड़े इस नए बिल के तहत अब ग्रामीणों को 100 दिन के बजाय 125 दिन का रोजगार, जबकि अनुसूचित जनजाति क्षेत्रों में 150 दिन का रोजगार मिलेगा।
उन्होंने कहा कि संसद में इस विधेयक पर विस्तृत चर्चा हुई, सभी दलों ने बहस में भाग लिया और बहस के बाद विधेयक पारित किया गया। इसके बावजूद कांग्रेस और अन्य विपक्षी दल इसे लेकर भ्रम फैला रहे हैं। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि विपक्ष को “विकसित” और “राम” शब्द से ही तकलीफ हो रही है।
इतिहास की परतें | रोजगार योजनाओं से मनरेगा तक
अमर अग्रवाल ने ग्रामीण रोजगार योजनाओं के इतिहास का उल्लेख करते हुए कहा कि 1980 के दशक से पहले भी देश में रोजगार आधारित योजनाएं थीं। समय-समय पर तत्कालीन सरकारों ने उनका नाम बदला और आवश्यकतानुसार बदलाव किए।
इंदिरा गांधी ने विभिन्न योजनाओं को मिलाकर राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार योजना नाम दिया
राजीव गांधी ने इसे जवाहर रोजगार योजना बनाया
2004 में कांग्रेस सरकार ने इसे नरेगा
2005 में मनरेगा नाम दिया
उन्होंने कहा कि इसी तरह ग्रामीण आवास योजना का नाम 1985 में इंदिरा आवास योजना किया गया और अप्रैल 2005 में ग्रामीण विद्युतीकरण योजना को राजीव गांधी ग्रामीण विद्युतीकरण योजना नाम दिया गया। उनका आरोप था कि कांग्रेस सरकारों ने लगभग 600 संस्थानों, योजनाओं और पुरस्कारों में गांधी-नेहरू परिवार के नाम जोड़े।
आंकड़ों के साथ तर्क | बदला हुआ ग्रामीण भारत
अमर अग्रवाल ने कहा कि ग्रामीण भारत अब पहले जैसा नहीं रहा।
वर्ष 2011-12 में ग्रामीण गरीबों की संख्या 25.7% थी
वर्ष 2023-24 में यह घटकर 4.86% रह गई
उन्होंने कहा कि आज आजीविका में विविधता आई है और पुराना मॉडल वर्तमान परिस्थितियों से मेल नहीं खाता। इसी कारण नई जरूरतों को ध्यान में रखकर नई योजना तैयार की गई है। कृषि को ध्यान में रखते हुए 60 दिन खेतिहर मजदूरों के लिए काम बंद रखने की व्यवस्था की जाएगी, ताकि कृषि कार्यों के दौरान श्रमिकों की कमी न हो। उन्होंने बताया कि जहां पहले मनरेगा में 15 दिन में भुगतान होता था, वहीं नए बिल में हर सप्ताह भुगतान का प्रावधान किया गया है।
नाम बदलने की राजनीति | भाजपा का तर्क
अमर अग्रवाल ने कहा कि कांग्रेस सरकारों ने योजनाओं के नामकरण में एक ही परिवार के नामों का बार-बार उपयोग किया और अन्य राष्ट्रीय नेताओं—सरदार वल्लभभाई पटेल, सुभाषचंद्र बोस, लाल बहादुर शास्त्री—के साथ दोयम दर्जे का व्यवहार किया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राजभवन को लोकभवन, राजपथ को कर्तव्य पथ, रेसकोर्स रोड को लोक कल्याण मार्ग और प्रधानमंत्री कार्यालय को सेवा तीर्थ नाम देकर नई पहचान दी है।

सुधांशु मिश्रा, अध्यक्ष शहर कांग्रेस कमेटी, बिलासपुर।


कांग्रेस का पलटवार | ‘नाम बदलकर विकास नहीं होता’
इस प्रेस वार्ता के बाद कांग्रेस की ओर से शहर अध्यक्ष सिद्धांशु मिश्रा ने कड़ा विरोध दर्ज कराया। उन्होंने कहा कि भाजपा राम को सत्ता पाने का माध्यम बना चुकी है। मनरेगा का नाम VBG RAM रखा गया है, जिसमें आधी हिंदी और आधी अंग्रेजी को तोड़-मरोड़कर केवल “राम” शब्द जोड़ा गया, ताकि राजनीतिक लाभ लिया जा सके।
उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि भाजपा का कोई भी नेता बिना देखे इस नाम का सही उच्चारण नहीं कर सकता। उनका कहना था कि भाजपा को नाम बदलने की राजनीति छोड़कर विकास की “बड़ी लकीर” खींचनी चाहिए।
वित्तीय ढांचे पर सवाल | 125 दिन रोजगार की हकीकत?
सिद्धांशु मिश्रा ने कहा कि भाजपा 125 दिन रोजगार की बात कर रही है, लेकिन नए ढांचे में
60% राशि केंद्र सरकार
40% राशि राज्य सरकार देगी
जबकि पहले राज्य सरकार का योगदान केवल 10% था। उन्होंने दावा किया कि अधिकांश राज्य सरकारें पहले से कर्ज में डूबी हुई हैं और 40% राशि देने की स्थिति में नहीं होंगी। ऐसी स्थिति में केंद्र सरकार 60% राशि जारी नहीं करेगी और योजना अपने-आप कमजोर पड़ जाएगी।
वैचारिक टकराव | गांधी बनाम भाजपा
सिद्धांशु मिश्रा ने कहा कि महात्मा गांधी कांग्रेस के आदर्श हैं और उनके विचारों पर कांग्रेस चलती है। उन्होंने कहा कि भाजपा और उसके पूर्ववर्ती संगठन शुरू से ही महात्मा गांधी के विरोधी रहे हैं। आज़ादी की लड़ाई के दौरान उनके निर्णयों का विरोध किया गया और आज़ाद भारत में गांधीजी की हत्या नाथूराम गोडसे द्वारा की गई।
उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने कई योजनाएं विभिन्न राजनेताओं के नाम पर शुरू कीं, लेकिन भाजपा को केवल गांधी नाम से आपत्ति है। उन्होंने नेहरू-गांधी परिवार के स्वतंत्रता संग्राम में योगदान का उल्लेख करते हुए कहा कि नेहरूजी लगभग 10 वर्ष जेल में रहे, उनके परिवार के सदस्य आज़ादी की लड़ाई में शामिल रहे, इंदिरा गांधी और राजीव गांधी देश के लिए शहीद हुए।
इतिहास की बहस | श्यामा प्रसाद मुखर्जी का संदर्भ
सिद्धांशु मिश्रा ने आरोप लगाया कि भाजपा के आदर्श पुरुष श्यामा प्रसाद मुखर्जी मुस्लिम लीग के साथ मिलकर बंगाल में वित्त मंत्री रहे। उन्होंने कहा कि नेहरूजी की “दरियादिली” थी कि श्यामा प्रसाद मुखर्जी को उनके योगदान को देखते हुए मंत्रिमंडल में स्थान दिया गया। उन्होंने भाजपा से कांग्रेस पर सवाल उठाने से पहले अपने स्वतंत्रता आंदोलन के इतिहास को देखने की बात कही।
प्रेसवार्ता में मौजूद भाजपा नेता
इस अवसर पर पूर्व मंत्री अमर अग्रवाल के साथ
भाजपा प्रदेश प्रवक्ता विजय शंकर मिश्रा
भाजपा बिलासपुर शहर जिलाध्यक्ष दीपक सिंह
भाजपा बिलासपुर ग्रामीण जिलाध्यक्ष मोहित जायसवाल
महापौर पूजा विधानी
जिला मीडिया प्रभारी केके शर्मा
जिला सहप्रभारी दुर्गेश पाण्डेय
सोशल मीडिया प्रभारी देवेश खत्री
उपस्थित रहे।

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