
बिलासपुर, 5 जनवरी 2026।
छत्तीसगढ़ के अचानकमार टाइगर रिजर्व (ATR) में कानून का नहीं, बल्कि हथियारों का बोलबाला सामने आया है। प्रतिबंधित कोर जोन से सटे इलाके में अवैध प्रवेश, खुलेआम हथियार लहराने और गोलीबारी का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ, तब जाकर वन विभाग और पुलिस हरकत में आए। सवाल यह नहीं कि तीन आरोपी पकड़े गए, सवाल यह है कि वे वहां तक पहुंचे कैसे? और जिम्मेदार अफसरों पर हाथ डालने से परहेज क्यों?
वन विभाग ने वीडियो का संज्ञान लेते हुए पुलिस के सहयोग से तीन आरोपियों—अजीत वैष्णव (26), अनिकेत (27) और विक्रांत वैष्णव (36) को गिरफ्तार किया। इनके पास से 2 एयर राइफल और एक टाटा सफारी स्टॉर्म वाहन जब्त किया गया। तीनों के खिलाफ वन्यप्राणी संरक्षण अधिनियम, 1972 की धाराओं में अपराध दर्ज कर उन्हें न्यायालय में पेश किया गया, जहां से न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया गया।
लेकिन यहीं से कहानी का असली चेहरा सामने आता है।
क्या अचानकमार जैसे संवेदनशील टाइगर रिजर्व में हथियारों के साथ घुसपैठ इतनी आसान है?
क्या बिना किसी “मौन सहमति” के कोर जोन से सटे इलाके तक पहुंच संभव है?
विभागीय कार्रवाई के नाम पर तत्काल प्रभाव से एक बैरियर गार्ड को हटाया गया और परिक्षेत्र अधिकारी को कारण बताओ नोटिस थमा दिया गया। जांच के लिए सहायक संचालक (कोर) को जांच अधिकारी बनाया गया। कागजों में कार्रवाई तेज दिखती है, लेकिन जवाबदेही की आंच नीचे तक क्यों नहीं पहुंचती?
जिस सिस्टम के रहते शिकारी हथियार लेकर रिजर्व की दहलीज तक पहुंच जाएं, वही सिस्टम खुद अपनी जांच करेगा—यह कैसी पारदर्शिता है?
वन विभाग का दावा है कि अवैध प्रवेश और वन्यप्राणियों को नुकसान पहुंचाने वाले कृत्य बर्दाश्त नहीं किए जाएंगे।
पर ज़मीनी सच्चाई यह है कि अचानकमार में बाघों की घटती संख्या पहले ही चिंता का विषय है। ऐसे में हथियारबंद घुसपैठ सिर्फ एक अपराध नहीं, बल्कि संरक्षण व्यवस्था पर सीधा हमला है।
और यहीं उठता है सबसे तीखा सवाल—
वन मंत्री केदार कश्यप इस पूरे प्रकरण पर संतुष्ट क्यों दिखते हैं?
जब वीडियो वायरल होने के बाद कार्रवाई होती है, तो पहले निगरानी कहां थी?
जब बैरियर तोड़ा गया, हथियार लहराए गए, फायरिंग हुई—तो जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका पर चुप्पी क्यों?
आलोचकों का कहना है कि यह कार्रवाई नाकाफी है।
अगर जिम्मेदार अफसरों की जवाबदेही तय नहीं होती, तो शिकारियों के हौसले और बुलंद होंगे, लकड़ी तस्करों को खुली छूट का संदेश जाएगा और टाइगर रिजर्व सिर्फ नाम का सुरक्षित क्षेत्र बनकर रह जाएगा।
वन विभाग ने नागरिकों से अपील की है कि वे अवैध गतिविधियों की सूचना दें, ताकि वन्यजीवों और प्राकृतिक संसाधनों की सुरक्षा हो सके।
लेकिन इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर यह सवाल हवा में छोड़ दिया है कि
क्या सिस्टम सच में जंगल की रखवाली कर रहा है, या जंगल सिस्टम की लापरवाही का शिकार है?



