डिप्टी सीएम का कार्यक्रम टला, गुटीय राजनीति और प्रशासनिक खामोशी ने बढ़ाया सियासी शोर

बिलासपुर।
करोड़ों रुपए के विकास कार्यों के नाम पर सोमवार को बिलासपुर नगर निगम के सकरी जोन में जुटने वाली सत्ता और प्रशासन की तस्वीर ऐन वक्त पर बिखर गई। छत्तीसगढ़ के डिप्टी सीएम अरुण साव के हाथों प्रस्तावित भूमि पूजन और लोकार्पण कार्यक्रम सुबह अचानक स्थगित कर दिया गया। आधिकारिक तौर पर वजह “नए कार्यों को जोड़ना” बताई गई, लेकिन शहर और सियासी गलियारों में चर्चा की असली धुरी कुछ और ही रही।


कार्यक्रम के आमंत्रण पत्र से बिलासपुर के सांसद व केंद्रीय मंत्री तोखन साहू, बिल्हा विधायक व पूर्व विधानसभा अध्यक्ष धरमलाल कौशिक और बिलासपुर विधायक व पूर्व मंत्री अमर अग्रवाल के नामों का पूरी तरह गायब होना भाजपा की अंदरूनी गुटीय राजनीति और प्रशासनिक चुप्पी पर सीधे सवाल खड़े कर गया। यह मामला केवल एक कार्यक्रम स्थगन तक सीमित नहीं रहा, बल्कि भाजपा के भीतर चल रही ‘सिर-फुटौव्वल’ की सियासत का ताजा उदाहरण बन गया।
आमंत्रण पत्र ने खोला सियासी मोर्चा
सकरी जोन में आयोजित किए जाने वाले इस कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में डिप्टी सीएम अरुण साव, अध्यक्षता तखतपुर विधायक धर्मजीत सिंह और अतिविशिष्ट अतिथि के तौर पर बेलतरा विधायक सुशांत शुक्ला, महापौर पूजा विधानी सहित निगम पदाधिकारी शामिल थे।
लेकिन जिले के तीन सबसे प्रभावशाली भाजपा चेहरों के नाम आमंत्रण पत्र से पूरी तरह नदारद रहे।
हालांकि यह कार्ड शहर में औपचारिक रूप से वितरित नहीं किया गया, लेकिन सोशल मीडिया के जरिए यह आमंत्रण नेताओं से लेकर आम लोगों तक पहुंच गया। इसके बाद सवालों की बाढ़ आ गई—
नगर निगम और जिला प्रशासन के संयुक्त आयोजन में सांसद और वरिष्ठ विधायकों को नजरअंदाज करना महज प्रशासनिक चूक थी या फिर भाजपा के भीतर चल रहे संतुलन संघर्ष का परिणाम?
स्थगन से पहले और गहराए सवाल
कार्यक्रम के ठीक पहले स्थगन की घोषणा ने पूरे घटनाक्रम को और संदिग्ध बना दिया। प्रशासनिक स्तर पर इसे तकनीकी और प्रक्रियागत कारणों से जोड़ने की कोशिश जरूर हुई, लेकिन राजनीतिक जानकार इसे भाजपा की अंदरूनी असहजता से जोड़कर देख रहे हैं।
यह पहला मौका नहीं है जब भाजपा के मंचों पर असंतुलन सार्वजनिक हुआ हो।
कुछ समय पहले पुलिस मैदान में आयोजित कार्यक्रम में पूर्व मंत्री अमर अग्रवाल की बैठक व्यवस्था को लेकर नाराजगी खुलकर सामने आ चुकी है। इससे पहले विश्वविद्यालय परिसर में हुए एक आयोजन में बेलतरा विधायक सुशांत शुक्ला को मंच पर ही जगह नहीं मिल पाई थी। ये घटनाएं पार्टी के भीतर समन्वय की कमी और गुटीय खींचतान की ओर इशारा करती रही हैं।
1 | सकरी में क्या-क्या होना था कार्यक्रम में
सकरी जोन क्रमांक-01 में विभिन्न विकास कार्यों का लोकार्पण एवं भूमिपूजन
224 बेडेड कामकाजी महिला छात्रावास
भूमि: 1.50 एकड़
लागत: 26 करोड़ 15 लाख रुपए
प्रमुख भूमिपूजन कार्य:
वार्ड 01–04 में सीसी सड़क, नाली निर्माण
रजबंधा तालाब सौंदर्यीकरण – 2.21 करोड़
जल आवर्धन योजना (सकरी-घुरू) – 5 करोड़
पुराना बाजार शेड व रामसदन – 50 लाख
लोकार्पण कार्य:
सामुदायिक भवन
स्कूल बाउंड्रीवॉल, लैण्डस्कैपिंग
सार्वजनिक शौचालय, बोर खनन
कुत्ता नसबंदी केंद्र – 89.71 लाख
2 | कार्यक्रम से पहले कैसी थी तैयारी
स्थल: बचन बाई शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय मैदान, सकरी
मंच, पंडाल, साउंड, लाइटिंग, बैरिकेडिंग पूरी
अतिथियों के लिए अलग-अलग प्रोटोकॉल सेक्शन
नगर निगम, पीडब्ल्यूडी, जल संसाधन सहित कई विभागों की तैनाती
हजारों की भीड़ जुटाने की तैयारी
छत्तीसगढ़ी सांस्कृतिक कार्यक्रम की भी व्यवस्था
3 | लाखों खर्च, फिर भी कार्यक्रम स्थगित
मंच और साउंड सिस्टम पर लाखों रुपए खर्च
स्वागत द्वार, बैनर-पोस्टर, फ्लैक्स लगाए गए
भूमिपूजन पट्टिकाएं और विभागीय फाइलें तैयार
कर्मचारियों और ठेकेदारों की ड्यूटी तय
इसके बावजूद ऐन वक्त पर कार्यक्रम स्थगित
राजनीतिक हलकों में इसे सामान्य प्रशासनिक निर्णय नहीं माना जा रहा।
4 | स्थगन के बाद शहर में क्या-क्या चर्चाएं
आमंत्रण पत्र से दिग्गज नेताओं के नाम गायब होने पर सवाल
भाजपा की अंदरूनी गुटबाजी की चर्चाएं तेज
प्रशासनिक समन्वय पर उंगली
“नए कार्य जोड़ने” के नाम पर समय साधने की अटकलें
खर्च और जवाबदेही को लेकर फुसफुसाहट
सकरी का यह घटनाक्रम अब केवल एक टला हुआ कार्यक्रम नहीं रह गया है। यह भाजपा की अंदरूनी राजनीति, मंचीय संतुलन और जिला प्रशासन की भूमिका को लेकर शहर में चल रही बहस का केंद्र बन चुका है—जहां हर खामोशी अपने-अपने अर्थ निकाल रही है।



