
बिलासपुर।
करबला स्थित जमीन के सीमांकन को लेकर बिलासपुर तहसील एक बार फिर विवादों में है। खसरा नंबर 275/2 की विधिवत टीम सीमांकन प्रक्रिया पूरी होने और आवेदक के संतुष्ट होने के बावजूद सीमांकन रिपोर्ट न देना, दूसरे खसरे की आपत्ति स्वीकार कर दोबारा दल सीमांकन कराना—इन सबने तहसीलदार प्रकाश साहू की कार्यप्रणाली को चर्चा के केंद्र में ला दिया है। वरिष्ठ भाजपा नेता व पूर्व पार्षद शिव प्रताप साव को सीमांकन रिपोर्ट के लिए तहसील कार्यालय के लगातार चक्कर लगाने पड़ रहे हैं।


मौजा जूना बिलासपुर, हल्का जूना बिलासपुर स्थित खसरा नंबर 275/2, रकबा 0.1130 हेक्टेयर भूमि शिव प्रताप साव के नाम पर राजस्व रिकॉर्ड में दर्ज है। 15 अक्टूबर 2025 को आरआई–पटवारी की 7 सदस्यीय टीम द्वारा मौके पर विधिवत सीमांकन किया गया। सीमांकन के दौरान यह पाया गया कि खसरा नंबर 277 से जुड़े एक भूस्वामी द्वारा 275 के कुछ हिस्से पर कब्जा किया गया है। टीम सीमांकन से आवेदक संतुष्ट रहा और सीमांकन रिपोर्ट तहसील में जमा कर दी गई।


सीमांकन रिपोर्ट मिलने के बजाय मामला उलझता चला गया। खसरा नंबर 277 के भूस्वामी चिमन रावलानी द्वारा तहसील में आपत्ति दर्ज कराई गई, जिसे स्वीकार कर लिया गया। आरोप है कि अलग खसरे की इस आपत्ति को खसरा नंबर 275 के सीमांकन में आधार बना लिया गया, जबकि दोनों खसरे अलग-अलग हैं। आपत्ति के नाम पर न केवल रिपोर्ट रोकी गई, बल्कि दोबारा दल सीमांकन के आदेश भी जारी कर दिए गए।
12 दिसंबर को पुनः दल सीमांकन का नोटिस जारी हुआ। शुक्रवार 2 जनवरी को नई टीम सीमांकन के लिए करबला स्थित भूमि पर पहुंची। जैसे ही नाप-जोख की प्रक्रिया शुरू हुई, आरोप है कि तहसीलदार का फोन आते ही टीम का कार्य ठप हो गया। कुछ सदस्य अन्य कार्य का हवाला देकर मौके से निकल गए। इसके बाद आधा-अधूरा सीमांकन कर औपचारिक पंचनामा तैयार कर लिया गया। खसरा नंबर 275 की चारों दिशाओं से भुजाओं की नाप नहीं की गई। इस प्रक्रिया से असंतुष्ट होकर आवेदक के पुत्र अवनीश साव व अन्य लोगों ने पंचनामा पर हस्ताक्षर करने से इनकार कर दिया।
सीमांकन के दौरान यह भी सामने आया कि खसरा नंबर 277 की भूमि को चार हिस्सों में रजिस्ट्री कर खसरा नंबर 275 में कब्जा दिखाया गया है। आरोप है कि टेंट व्यवसाय से जुड़े चिमन रावलानी ने नगर निगम को गलत जानकारी देकर भवन का नक्शा भी पास कराया। सीमांकन में इन तथ्यों के उजागर होने के बाद ही आपत्ति और पुनः सीमांकन की प्रक्रिया तेज हुई।
सीमांकन रिपोर्ट न मिलने से परेशान होकर पूर्व पार्षद शिव प्रताप साव कलेक्टर से मिलकर आवेदन भी दे चुके हैं, लेकिन तहसील कार्यालय में सीमांकन प्रकरणों को नस्ती करने के बजाय लंबित रखे जाने की चर्चा है। बताया जा रहा है कि सीमांकन और नामांतरण जैसे मामलों में अनावश्यक देरी अब आम बात हो गई है।
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सीमांकन 275 का, आपत्ति 277 की—प्रक्रिया पर खड़े हुए सवाल
सीमांकन में मौजूद आवेदक पक्ष का कहना है कि एक बार टीम सीमांकन पूरा हो जाने और आवेदक के संतुष्ट होने के बाद पुनः सीमांकन का कोई औचित्य नहीं रहता। सामान्य प्रक्रिया में आपत्तियों का निराकरण प्रकरण दर्ज कर सुनवाई के माध्यम से किया जाता है। 12 दिसंबर को नोटिस जारी होने के बावजूद आपत्तिकर्ता द्वारा यह कहना कि सीमांकन की जानकारी उन्हें दो घंटे पहले मिली, पूरे मामले को और संदेहास्पद बना रहा है।
करबला की इस जमीन को लेकर सीमांकन, आपत्ति और दोबारा दल सीमांकन की प्रक्रिया फिलहाल बिलासपुर तहसील की कार्यशैली को लेकर चर्चाओं का विषय बनी हुई है।
करबला स्थित भूमि के सीमांकन विवाद पर कलेक्टर संजय अग्रवाल ने कहा है कि सीमांकन से संबंधित यदि कोई शिकायत है तो वह एसडीएम स्तर पर होगी। इस मामले में एसडीएम से जानकारी ली जा सकती है और वही सक्षम अधिकारी हैं जो पूरे प्रकरण की स्थिति स्पष्ट करेंगे। कलेक्टर ने यह भी संकेत दिया कि सीमांकन से जुड़े मामलों का प्राथमिक परीक्षण और कार्रवाई एसडीएम के अधिकार क्षेत्र में आती है।



