बिलासपुर।
बिलासपुर के लिंगियाडीह क्षेत्र में गरीब, श्रमिक और मध्यमवर्गीय परिवारों के अधिकारों को लेकर शुरू हुआ लिंगियाडीह बचाओ आंदोलन लगातार 26वें दिन भी पूरे दमखम के साथ जारी रहा। पहले सांकेतिक विरोध के रूप में शुरू हुआ यह आंदोलन अब विभिन्न सामाजिक संगठनों, समाजों और राजनीतिक दलों के समर्थन के साथ शहरव्यापी जनआंदोलन का रूप लेता नजर आ रहा है। धरनास्थल पर महिलाओं की मुखर भागीदारी और लगातार बढ़ता समर्थन आंदोलन को नई धार दे रहा है।





लिंगियाडीह क्षेत्र में पूर्व में की गई मकान और दुकानों की तोड़फोड़ के विरोध में चल रहा आंदोलन 26वें दिन भी थमा नहीं। आंदोलन स्थल पर बहुजन समाज पार्टी के जिला प्रभारी डॉ. रघु साहू एवं सर्व पिछड़ा वर्ग जिला प्रभारी राजकुमारी साहू की उपस्थिति ने संघर्ष को और मजबूती दी। दोनों नेताओं ने धरनास्थल पर पहुंचकर पीड़ित परिवारों से मुलाकात की और प्रशासनिक कार्रवाई को लेकर अपनी बात रखी।
डॉ. रघु साहू ने कहा कि बहुजन समाज पार्टी शोषित, वंचित और गरीब वर्ग के अधिकारों की लड़ाई लड़ती रही है। उन्होंने बताया कि लगभग 9 माह पूर्व लिंगियाडीह में सैकड़ों परिवारों के मकान और दुकानों को तोड़ा गया, जिससे लोग बेघर होने के साथ-साथ रोजगार से भी वंचित हो गए। कई परिवार आज भी किराए के मकानों या खुले आसमान के नीचे जीवन यापन करने को मजबूर हैं। उन्होंने यह भी कहा कि पूरे शहर में अतिक्रमण के नाम पर कार्रवाई के दौरान केवल लिंगियाडीह को निशाना बनाया गया, जिससे प्रशासन की मंशा पर सवाल खड़े होते हैं।
डॉ. साहू ने कहा कि यदि आज लिंगियाडीह के साथ हुए घटनाक्रम को नजरअंदाज किया गया, तो भविष्य में मोपका, चिंगराजपारा, बहतराई, खमतराई, डबरीपारा, चांटीडीह जैसे इलाकों के लोग भी इसी तरह की स्थिति का सामना कर सकते हैं। उन्होंने आंदोलन को जाति और दल से ऊपर उठकर देखने की बात कही।
सर्व पिछड़ा वर्ग जिला प्रभारी राजकुमारी साहू ने कहा कि सर्व पिछड़ा वर्ग समाज इस संघर्ष में पीड़ित परिवारों के साथ खड़ा है। उनके अनुसार यह आंदोलन केवल एक मोहल्ले या बस्ती का नहीं, बल्कि पूरे शहर के गरीब और मेहनतकश वर्ग के सम्मान और अस्तित्व से जुड़ा मुद्दा बन चुका है।
धरनास्थल पर महिलाओं की भागीदारी आंदोलन की सबसे बड़ी तस्वीर के रूप में सामने आई। दुर्गा नगर की महिलाएं पिछले कई दिनों से लगातार महाधरने पर बैठी हैं। महिलाओं का कहना है कि मकान टूटने से सिर्फ दीवारें नहीं गिरीं, बल्कि वर्षों की मेहनत, परिवार का सहारा और बच्चों का भविष्य भी प्रभावित हुआ है। इसी वजह से महिलाओं में गहरा आक्रोश देखा जा रहा है।
आंदोलन को समर्थन देने वालों में जिला कुर्मी समाज के अध्यक्ष श्याममूरत कौशिक, तिफरा कुर्मी समाज अध्यक्ष व जिला उपाध्यक्ष परस कश्यप, लोधी समाज के अध्यक्ष कांतराम लोधी, किसान मजदूर महासंघ और पिछड़ा महासंघ से जुड़े पदाधिकारी भी शामिल रहे। श्याममूरत कौशिक ने कहा कि बिना वैकल्पिक व्यवस्था के गरीबों को उजाड़ना किसी भी दृष्टि से उचित नहीं है।
धरनास्थल पर बड़ी संख्या में विभिन्न समाजों के प्रबुद्ध नागरिक और सामाजिक कार्यकर्ता मौजूद रहे। इनमें भोलाराम साहू, दिनेश घोरे, रविन्द्र कश्यप, रूपेश साहू, प्रशांत मिश्रा, चतुर सिंह यादव, पिंकी देवांगन, यशोदा पाटिल, कुंती तिवारी, उमा मिश्रा, सबिता डे, वंदना डे, हेमलता देवांगन, लता देवांगन, पुष्पा देवांगन, राजकुमारी देवांगन, साधना यादव, कल्पना यादव, नंदकुमारी, जमुना शर्मा, संगीता यादव, रूपा सरकार, सीता साहू, ललिता मानिकपुरी, अर्पणा पटेल, शीला सिंह, लीला, उर्मिला, अनीता पाटिल, कुंती प्रजापति, सोनिया निषाद, कुमारी निषाद, रेशमी अहिरवार, उमा अहिरवार, सोनू गोस्वामी, श्रवण मानिकपुरी, डॉ. अशोक शर्मा, टिंकू, सतीश, महेश्वर, बलराम, अग्नू, सूरज यादव, लखन कश्यप, अनिकेत कश्यप, राजा पाटिल सहित बड़ी संख्या में महिलाएं, युवा और बुजुर्ग शामिल रहे।
लिंगियाडीह बचाओ आंदोलन को लगातार मिल रहा समर्थन और बढ़ती भागीदारी इसे शहर के प्रमुख सामाजिक आंदोलनों में शामिल कर रही है, जहां हर दिन नए समाज और संगठन अपनी मौजूदगी दर्ज करा रहे हैं।



