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*रात में बुलाया… चाकू से वार किए… पत्थर बांधकर तालाब में डुबो दिया*

Mohammed Israil
Mohammed Israil  - Editor
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तीन दिन में ‘अंधी हत्या’ का खुलासा — बिलासपुर पुलिस ने पुरानी रंजिश का कत्ल सुलझाया


बिलासपुर/कोटा।
छत्तीसगढ़ के बिलासपुर ज़िले में एक युवक की निर्मम हत्या और तालाब में फेंके गए शव का राज़ पुलिस ने मात्र 03 दिनों में खोल दिया। पुरानी रंजिश पर गढ़ी गई यह नृशंस वारदात कई दिनों तक अंधे कत्ल की तरह सामने खड़ी थी, लेकिन थाना कोटा पुलिस, ACCU, FSL और डॉग स्क्वाड की संयुक्त जांच ने जटिल केस की परतें तेजी से उधेड़ दीं।
6 दिन लापता रहने के बाद मृतक धीरज साहू (26) का शव ग्राम घोड़ामार के बांधा तालाब में संदिग्ध स्थिति में मिला था। शॉर्ट पीएम रिपोर्ट में हत्या की पुष्टि होते ही पुलिस ने बहुस्तरीय जांच शुरू की और तकनीकी-सुबह लेने वाली इस विवेचना ने आखिरकार आरोपियों तक पहुंचा दिया।
केस की शुरुआत: रात में पोल्ट्री फार्म से गायब, सुबह मोबाइल ऑफ, कोई सुराग नहीं
30 नवंबर की रात धीरज साहू भोजन के बाद अपने पोल्ट्री फार्म में सोने गया था।
1 दिसंबर की सुबह वह लापता मिला। मोबाइल बंद, कोई खोजबीन में सफलता नहीं — परिजनों की सूचना पर थाना कोटा ने गुम इंसान दर्ज कर तलाश शुरू की।
छह दिनों तक कोई ठोस सुराग नहीं मिला।
7 दिसंबर: तालाब में तैरता मिला शव — पहचान होते ही पुलिस अलर्ट
7 दिसंबर को घोड़ामार के बांधा तालाब में एक अज्ञात शव मिलने की सूचना फैली।
वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक बिलासपुर रजनेश सिंह (IPS) ने मामले को अत्यंत गंभीर मानते हुए त्वरित कार्रवाई का आदेश दिया।
अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक ग्रामीण डॉ. अर्चना झा, एसडीओपी मस्तूरी लालचंद मोहले, एफएसएल टीम और डॉग स्क्वाड घटना-स्थल पहुंचे।
शव की पहचान धीरज साहू के रूप में होने पर केस की दिशा पूरी तरह बदल गई।
पोस्टमार्टम रिपोर्ट में हत्या की पुष्टि होते ही मामला धारा 103(1), 238 BNS में दर्ज किया गया।
पुलिस की हाई-इंटेंसिटी जांच —
सैकड़ों CCTV, हजारों मोबाइल नंबर, घंटों टेक्निकल एनालिसिस**
प्रकरण की जांच के लिए कोटा थाना और ACCU की संयुक्त टीम बनाई गई।
जांच में शामिल रहा—
घटनास्थल व रास्तों के सैकड़ों CCTV फुटेज का अध्ययन
रिश्तेदारों, मित्रों और सभी संबंधितों से लंबी पूछताछ
हजारों मोबाइल नंबरों का तकनीकी विश्लेषण
डॉग स्क्वाड और FSL की वैज्ञानिक जांच
इसी टेक्निकल नेटवर्क और लगातार पूछताछ से दो संदेही सामने आए — अनिल साहू और जगन्नाथ उर्फ अंगद साहू
पूछताछ में खुलासा —
“एक साल पुरानी रंजिश… उसी के बदले के लिए योजना बनाई”**
पूछताछ में दोनों ने हत्या का जुर्म कबूल किया।
उनके बयान के अनुसार—
करीब 1 वर्ष पुरानी रंजिश मन में चल रही थी
30 नवंबर की रात हत्या की पहले से योजना बनाई
रात 11:30 बजे मोटरसाइकिल CG 10 BG 1727 पर सिविल साहू के प्लॉट पहुंचे
मोटर पंप निकालने का बहाना बनाकर धीरज को बुलाया
दोनों ने मिलकर चाकू से उसकी हत्या की
शव पर पत्थर बांधकर बांधा तालाब में फेंक दिया
आलाज़रब (घटनास्थल सामग्रियाँ), मृतक के कपड़े और मोबाइल को कोरी डेम में फेंका
गिरफ्तारी और जब्ती
साक्ष्यों और स्वीकारोक्ति पर दोनों आरोपी गिरफ्तार—
अनिल कुमार साहू (28 वर्ष)
जगन्नाथ उर्फ अंगद साहू (18 वर्ष)
पुलिस ने इनके कब्जे से—
मोटरसाइकिल CG 10 BG 1727
हत्या में प्रयुक्त चाकू
शव में बांधने वाला पत्थर
अन्य महत्वपूर्ण सबूत
जप्त कर दोनों को 11 दिसंबर 2025 को न्यायिक रिमांड पर भेज दिया।
टीम का तेज़ समन्वय —
अंधे कत्ल को अंजाम तक पहुंचाने वाली पुलिस की ‘स्पेशल क्राइम’ कार्रवाई**
इस पूरे ऑपरेशन में जिनकी सक्रिय भूमिका रही—
थाना प्रभारी निरीक्षक तोप सिंह नवरंग
ACCU प्रभारी निरीक्षक अजहरुद्दीन
उप निरीक्षक हेमंत आदित्य
चौकी प्रभारी बेलगहना हेमंत सिंह
डॉग स्क्वाड, एफएसएल
प्रधान आरक्षक: सत्य प्रकाश यादव, राहुल सिंह, आतिश पारिख
आरक्षक: महादेव कुजूर, प्रशांत सिंह, जलेश्वर साहू, सोमेश्वर साहू, चंदन मानिकपुरी, अखिलेश पारकर, दीप कंवर, प्रफुल्ल यादव, संजय श्याम
उनके उत्कृष्ट समन्वय, सतर्कता, तकनीकी दक्षता और लगातार फील्ड वर्क ने अंधे कत्ल को तीन दिनों में सुलझाने में अहम भूमिका निभाई।

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