Latest news

धान खरीदी में भ्रष्टाचार फूटा….एरमसाही धान खरीदी केंद्र में बड़ा खेल उजागर — 920 क्विंटल धान गायब, बैंक मैनेजर–सुपरवाइजर पर भी गिरी गाज

Mohammed Israil
Mohammed Israil  - Editor
5 Min Read

बिलासपुर में खरीदी व्यवस्था चरमरा गई, भ्रष्टाचार के नए सबूतों से हड़कंप
बिलासपुर।
धान खरीदी को लेकर बिलासपुर जिले में फैले अव्यवस्थाओं और भ्रष्टाचार की परतें एक-एक कर खुल रही हैं। कलेक्टर संजय अग्रवाल ने खरीदी व्यवस्था को दुरुस्त करने का दावा तो किया था, लेकिन बुधवार को मस्तूरी ब्लॉक के एरमसाही उपार्जन केंद्र में जो कुछ सामने आया, उसने जिले की पूरी खरीदी मशीनरी पर ही प्रश्नचिह्न खड़ा कर दिया है।
जिला स्तरीय आकस्मिक निरीक्षण में इस केंद्र में वृहद गड़बड़ी, फर्जीवाड़ा और रिकॉर्ड से छेड़छाड़ का ऐसा जाल मिला जिसने अधिकारियों को भी हिला दिया।
फर्जी एंट्री का खेल – 920 क्विंटल धान हवा में गायब
निरीक्षण करने पहुंचे डिप्टी कमिश्नर सहकारिता सी.एस. जायसवाल, खाद्य नियंत्रक अमृत कुजुर और सहकारिता विस्तार अधिकारी मस्तूरी गोधुली वर्मा ने पाया कि—
कंप्यूटर ऑपरेटर काशीराम खुटे ने धान खरीदी केंद्र में बिना धान लाए फर्जी आवक की एंट्री कर दी।
भौतिक सत्यापन में 920 क्विंटल धान की कमी पकड़ी गई — यानी धान कागजों में आ गया, पर गोदाम तक पहुँचा ही नहीं।
663 नग नया बारदाना और 5414 नग वापुरान बारदाना भी अधिक पाया गया, जिससे साफ है कि रिकॉर्ड और वास्तविक स्टॉक में भारी छेड़छाड़ की गई है।
यह पूरा मामला एक सुनियोजित नेटवर्क की ओर संकेत करता है जिसमें समिति के लोग, ऑपरेटर और निगरानी तंत्र तक शामिल बताए जा रहे हैं।
अशासकीय प्राधिकृत अधिकारी हटाए गए, ऑपरेटर पर FIR
कलेक्टर के आदेश पर फर्जीवाड़े में सीधे पकड़े गए कंप्यूटर ऑपरेटर काशीराम खुटे के खिलाफ थाने में FIR दर्ज कराने का आदेश जारी किया गया है।
साथ ही, धान खरीदी केंद्र के अशासकीय प्राधिकृत अधिकारी दुर्गा प्रसाद पटेल को तत्काल पद से हटाने की कार्रवाई की गई है।
यह पहली बार नहीं है जब खरीदी केंद्रों में प्राधिकृत अधिकारियों की भूमिका पर सवाल उठे हों — लेकिन एरमसाही का मामला अब जिले की सबसे बड़ी हेराफेरी बनकर उभर रहा है।
जिला सहकारी बैंक पर भी उठे सवाल — मैनेजर और सुपरवाइजर को नोटिस
मस्तूरी शाखा के जिला सहकारी बैंक मैनेजर सुशील पनौरे और पर्यवेक्षक वजूर सिंह राज को धान खरीदी की निगरानी में लापरवाही के लिए कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है।
बिलासपुर जिले में सहकारी बैंक की भूमिका पिछले कई सीजनों से विवादों में रही है—
किसानों को भुगतान में देरी
खरीदी केंद्रों में निरीक्षण का अभाव
समितियों के साथ कथित सांठगांठ
इन सबके बीच एरमसाही में उजागर हुआ यह फर्जीवाड़ा जिले की सहकारिता प्रणाली पर गंभीर सवाल उठाता है।
यह वही बिलासपुर जिला है जहां हर सीजन धान खरीदी में माफियाओं, दलालों और नेटवर्क के हावी होने की शिकायतें उठती हैं, पर कार्रवाई के नाम पर छोटी मछलियाँ ही पकड़ी जाती रही हैं। 이번 पकड़े गए मामले ने दिखा दिया है कि गड़बड़ी निचले स्तर से ऊपर तक पसरी है।
खरीदी व्यवस्था बिखर चुकी — जिले के हालात बेहद खराब
एरमसाही केंद्र में उजागर गड़बड़ी ने साफ कर दिया है कि बिलासपुर की धान खरीदी व्यवस्था कागज़ों में सख्त, लेकिन जमीन पर ढीली और भ्रष्टाचार से सनी हुई है।
केंद्रों में स्टॉक का मिलान नहीं
निगरानी दलों का औपचारिक दौरा
बारदानों की चोरी–फर्जी दिखावे में वापसी
किसानों को लाइन में खड़ा कर, धान अंदर–अंदर दूसरी जगह भेजना
ऐसे मॉडल पर खरीदी चल रही है, जिससे किसानों को नुकसान और माफियाराज को लाभ मिलता है।
इस पूरे घटनाक्रम ने जिला प्रशासन को चौकन्ना जरूर किया है, लेकिन सवाल यह है कि—
अगर अचानक निरीक्षण न होता, तो क्या यह 920 क्विंटल धान और हजारों बारदानों की यह गड़बड़ी कभी सामने आती?
जिला प्रशासन में हड़कंप, खरीदी केंद्रों की अब होगी कड़ी पड़ताल
कलेक्टर संजय अग्रवाल ने स्पष्ट किया है कि किसी भी स्तर पर गड़बड़ी बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
निरीक्षण टीम को और सक्रिय किया जा रहा है, ताकि किसी भी केंद्र में इस तरह के फर्जीवाड़े को रोका जा सके।
गड़बड़ी उजागर होने के बाद जिले में अन्य केंद्रों पर भी अचानक जांच की संभावना बढ़ गई है।

खबर को शेयर करने के लिए क्लिक करे।।