


बिलासपुर। शहर के स्लम और मध्यम वर्गीय इलाकों में जहाँ बीमारी और गरीब-मजदूरों का बोझ पहले ही भारी है, वहीं मुख्यमंत्री शहरी स्लम स्वास्थ्य योजना की मोबाइल मेडिकल यूनिट (MMU) के बंद होने से एक बड़ा स्वास्थ्य संकट खड़ा हो गया है। बीते पाँच वर्षों से बस्तियों के दरवाजे पर मुफ्त इलाज, लैब टेस्ट और दवाएँ पहुँचाने वाली ये यूनिट बसें अब अचानक सड़क से गायब हो गईं। इससे उन हजारों परिवारों पर असर पड़ा है, जो अस्पताल तक पहुँचने में असमर्थ होते थे और इन बसों पर ही निर्भर थे। इस योजना के प्रभारी बिलासपुर नगर निगम के इंजीनियर अनुपम तिवारी का कहना है कि एग्रीमेंट समाप्त होने के कारण यह स्थिति उत्पन्न हुई है।
इन सेवाओं को चलाने वाले साई राम टेक्नो मैनेजमेंट सलूशन प्रा.लि. भोपाल के कर्मचारी अब बेरोजगारी और अनिश्चितता के दौर से गुजर रहे हैं। इन कर्मचारियों ने प्रशासन को ज्ञापन सौंपकर बताया कि उनका अनुबंध नियमों के मुताबिक बढ़ाया जा सकता था, पर सेवा अचानक रोक दी गई, जिसका असर आम नागरिकों तक पहुँच गया है।
5 साल का अनुबंध, 2 साल बढ़ाने का प्रावधान—फिर भी सेवा स्थगित
बिलासपुर जिला अर्बन पब्लिक सर्विस सोसायटी और साई राम टेक्नो मैनेजमेंट सलूशन के बीच हुआ अनुबंध 01 नवंबर 2020 से 05 वर्ष के लिए था। अनुबंध की कंडिका 17(1) साफ तौर पर कहती है—
“सहमतिपूर्वक 02 वर्ष का अतिरिक्त विस्तार दिया जा सकता है।”
कंपनी ने समय-समय पर विस्तार के लिए पत्र भेजे, पर कर्मचारियों के मुताबिक उन्हें संदर्भित पत्र में यह सूचित कर दिया गया कि—
“सेवा स्थगित की जाती है, राज्य सरकार के आगामी आदेश की प्रतीक्षा करें।”
इसी के साथ पाँच साल से लगातार MMU में सेवा दे रहे डॉक्टरों, नर्सों, लैब टेक्नीशियन, ड्राइवरों और हेल्थ सपोर्ट स्टाफ के सामने जीविकोपार्जन का संकट खड़ा हो गया।

रायपुर, दुर्ग, धमतरी, भिलाई में अभी भी चल रही बसें—पर बिलासपुर में बंद
कर्मचारियों ने उल्लेख किया कि छत्तीसगढ़ के कई प्रमुख शहरों—
रायपुर • दुर्ग • धमतरी • भिलाई
में अनुबंध की अवधि खत्म होने के बाद भी MMU सेवाएँ जारी हैं। वहीं बिलासपुर में इन बसों के रुक जाने से सबसे ज्यादा असर उन इलाकों पर पड़ा है जहाँ रोजमर्रा की मजदूरी करने वाले गरीब और मध्यम वर्ग के परिवार रहते हैं।
शहरी गरीब और मध्यम वर्ग की पहली और एकमात्र ‘डोरस्टेप हेल्थ सर्विस’ बंद
स्लम और मध्यमवर्गीय बस्तियाँ जहाँ छोटी-छोटी बीमारी भी बड़ी मुसीबत बन जाती है—वहीं यह मोबाइल मेडिकल यूनिट बसें वर्षों से राहत बनकर पहुँच रही थीं। इनके बंद होते ही पूरे सेक्टर में खालीपन साफ महसूस हो रहा है।
मोबाइल मेडिकल यूनिट क्या करती थी?
एक बस = एक चलता-फिरता अस्पताल
42 मुफ्त लैब टेस्ट
LFT
थायराइड
विटामिन B-12
विटामिन D-3
यूरिक एसिड
CBC सहित अधिकांश बेसिक–एडवांस ब्लड टेस्ट
डॉक्टर और मेडिकल स्टाफ मौके पर
बुखार
संक्रमण
रक्तचाप
diabetes मॉनिटरिंग
महिला स्वास्थ्य जांच
मुफ्त दवाइयाँ—इसी बस से मिल जाती थीं
नियमित शेड्यूल—
वार्डों, बस्तियों, कॉलोनियों में समय-समय पर कैंप
डिजिटल सुविधा
नया ऐप—
लोकेशन
रिपोर्ट डाउनलोड
अपॉइंटमेंट
इनसे उन परिवारों को बहुत राहत मिलती थी जिन्हें काम छोड़कर अस्पताल जाने में मजदूरी का नुकसान होता था।
अब बस्तियों में फिर वही पुरानी समस्या—“इलाज चाहिए, पर अस्पताल नहीं जा सकते”
सुपेला, तिफरा, सरकंडा, बहतराई, चिंगराजपारा, देवरीखुर्द जैसे क्षेत्रों में रहने वाले लोग इन मोबाइल बसों के आदी हो चुके थे।
बुजुर्गों को घर-पास इलाज
महिलाओं को नियमित स्वास्थ्य जांच
मजदूर वर्ग को छुट्टी और खर्च दोनों से राहत
बच्चों की हेमोग्लोबिन और पोषण जांच
अब सेवा बंद होने से कई बस्तियों में फिर लंबी लाइनों, दूर अस्पताल जाने की मजबूरी, और खर्च बढ़ने की चिंता की स्थिति लौट आई है।
कर्मचारियों की पीड़ा—“सेवा बंद, तनख्वाह बंद, परिवार की चिंता शुरू”
यूनिट क्रमांक 01, 02, 03 और 04 में काम करने वाले कर्मचारियों ने कहा कि यह काम उनका एकमात्र सहारा था।
डॉक्टर
नर्स
लैब टेक्नीशियन
ड्राइवर
अटेंडर
…सभी अचानक बेरोजगार हो गए।
कर्मचारियों ने प्रशासन को दिए ज्ञापन में आग्रह किया है कि योजना के प्रथम चरण का संचालन पुनः प्रारंभ किया जाए।
ज्ञापन में दर्ज प्रमुख तथ्य
01 नवंबर 2020 को 05 वर्ष के लिए अनुमति
अनुबंध 30-08-2025 तक
कंडिका 17(1) में 02 वर्ष विस्तार का स्पष्ट प्रावधान
कंपनी ने पत्र भेजे, पर सेवा स्थगित
अन्य महानगरों में सेवा जारी
बस्तियों में स्वास्थ्य पहुँच पर असर
कर्मचारियों का रोजगार प्रभावित
“यह जनता की अनिवार्य सेवा, जल्द बहाल होनी चाहिए” : श्याम साहू

मोबाइल मेडिकल यूनिट बंद होने के बाद अब नगर निगम से भी इस मुद्दे पर आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने आई है। सफाई एवं स्वास्थ्य विभाग के प्रभारी श्याम साहू ने स्पष्ट कहा कि शहरी गरीब और मध्यम वर्ग को मिलने वाली यह सुविधा अत्यंत आवश्यक है और इसके बंद होने से बस्तियों में स्वास्थ्य सेवाओं की बड़ी कमी महसूस की जा रही है।
श्याम साहू ने बताया कि यह योजना वर्षों से उन परिवारों के लिए जीवनरेखा बनी हुई थी, जिनके लिए अस्पताल तक पहुँचना कठिन होता है। उन्होंने कहा—
“यह बहुत ही जरूरी सुविधा है, इसे हर हाल में दोबारा शुरू होना चाहिए। जनता इससे वंचित न रहे, इसके लिए मैं स्वयं उप मुख्यमंत्री एवं नगरीय प्रशासन मंत्री अरुण साव को शीघ्र पत्र लिख रहा हूँ।”
उन्होंने यह भी जोड़ा कि शहर की जरूरतों और नागरिकों के स्वास्थ्य हितों को ध्यान में रखते हुए मोबाइल मेडिकल यूनिट को पुनः चालू कराना प्राथमिकता के मुद्दों में शामिल किया जाएगा, ताकि बस्तियों में रहने वाले लोगों को फिर से घर-दरवाजे पर चिकित्सा सेवा उपलब्ध हो सके।



