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बिलासपुर ट्रेन हादसे पर CRS की बड़ी रिपोर्ट: रेलवे प्रशासन की चूक से गई 12 जानें, अप्रशिक्षित चालक के हाथ में थी MEMU की कमान

Mohammed Israil
Mohammed Israil  - Editor
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बिलासपुर/नई दिल्ली।
छत्तीसगढ़ के बिलासपुर ज़िले के लालखदान–गतोरा रेलखंड में 4 नवंबर 2025 को हुई भीषण रेल दुर्घटना को लेकर रेलवे सुरक्षा आयुक्त (CRS) की प्रारंभिक रिपोर्ट सामने आ गई है। नागरिक उड्डयन मंत्रालय के तहत दक्षिण-पूर्व सर्किल, कोलकाता के रेल सुरक्षा आयुक्त बी.के. मिश्रा द्वारा जारी इस रिपोर्ट में हादसे की पूरी जिम्मेदारी रेलवे प्रशासन और उसकी परिचालन प्रणाली पर बताई गई है। रिपोर्ट में यह भी दर्ज है कि कोरबा–बिलासपुर लोकल MEMU ट्रेन की कमान ऐसे असिस्टेंट लोको पायलट (ALP) को सौंप दी गई, जो साइकोलॉजिकल टेस्ट पास नहीं कर सकी थीं। इस स्थिति ने दुर्घटना की गंभीरता को बढ़ाया, जिसमें 12 यात्रियों की मौत हुई और 20 से अधिक लोग घायल हुए थे।
दुर्घटना के बाद रेलवे को करोड़ों रुपए का आर्थिक नुकसान भी उठाना पड़ा। घटनास्थल का निरीक्षण करने के बाद यह प्रारंभिक रिपोर्ट सोमवार देर रात SECR जोन मुख्यालय और बिलासपुर डिवीजन को भेजी गई है।
कैसे हुआ था हादसा — 4 नवंबर की पूरी घटना
4 नवंबर की शाम कोरबा से बिलासपुर आ रही ट्रेन संख्या 68733 कोरबा–बिलासपुर लोकल MEMU अप लाइन पर खड़ी कोयला लोड मालगाड़ी से जाकर टकरा गई थी। टक्कर इतनी जोरदार थी कि MEMU के मोटर कोच और कई डिब्बे बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गए। प्रारंभिक सूचना के अनुसार 12 यात्रियों की मृत्यु और 20 से अधिक के घायल होने की जानकारी सामने आई थी। कई यात्रियों ने बताया था कि ट्रेन गति में थी और टक्कर के पहले किसी तरह का ब्रेक लगने का आभास नहीं हुआ।
CRS की जांच: 3 दिनों तक पूछताछ, विभागीय अधिकारियों से जवाब-तलब
दुर्घटना के बाद CRS बी.के. मिश्रा स्वयं घटनास्थल पहुंचे और लगातार तीन दिनों तक निरीक्षण करते रहे। इस दौरान—
इलेक्ट्रिकल OHE,
इलेक्ट्रिकल,
S&T,
मैकेनिकल,
C&W,
ऑपरेटिंग विभाग
के अधिकारियों और कर्मचारियों से विस्तृत पूछताछ की गई।
कुल मिलाकर दर्जनों कर्मचारियों के बयान जुटाए गए और ट्रेन संचालन, सिग्नलिंग, रिकॉर्डिंग उपकरण, और सुरक्षा प्रक्रियाओं को लेकर डाटा इकट्ठा किया गया।
अस्पताल में की गई गहन पूछताछ: दो घंटे चली बातचीत
20 दिन बाद CRS टीम ने दुर्घटना के समय MEMU चला रही असिस्टेंट लोको पायलट रश्मि राज से केंद्रीय रेलवे अस्पताल में मुलाकात की। दो घंटे की बातचीत में उनसे ट्रेन की गति, नियंत्रण, सिग्नल स्थिति, ब्रेकिंग प्रक्रिया और हादसे के पहले के घटनाक्रम पर जानकारी ली गई। रश्मि राज दुर्घटना में घायल हुई थीं, इसलिए पूछताछ अस्पताल में ही की गई।
रिपोर्ट का मुख्य बिंदु: “हादसे की पूरी गलती रेल प्रशासन की”
CRS की रिपोर्ट में साफ उल्लेख है कि—
✔ रेल प्रशासन ने साइको टेस्ट में फेल चालक को यात्री ट्रेन की कमान सौंप दी थी।
रिपोर्ट में कहा गया है कि यदि चालक साइकोलॉजिकल परीक्षण में पास नहीं था, तो उसे किसी भी परिस्थितियों में यात्री ट्रेन परिचालन करने की जिम्मेदारी नहीं दी जानी चाहिए थी।
✔ MEMU जैसे तेज रफ्तार और लगातार सिग्नल-आधारित संचालन वाली ट्रेन में अनुभवहीन चालक को लगाना गंभीर चूक थी।
रिपोर्ट के अनुसार यह निर्णय रेलवे की परिचालन सुरक्षा नीति और मानक प्रक्रियाओं के विरुद्ध था।
सिग्नलिंग और मॉनिटरिंग में कमियां — जांच में जो सामने आया
रिपोर्ट में रेलवे प्रशासन और चालक दोनों को जिम्मेदारी के दायरे में रखा गया है। इसके साथ ही अनेक तकनीकी और प्रणालीगत कमजोरियाँ भी बताई गई हैं—
1. सभी रिकॉर्डिंग व मॉनिटरिंग उपकरणों की घड़ियाँ GPS समय से सिंक नहीं थीं
इसमें शामिल है—
SCADA सिस्टम
TCMS
BBR (ब्लैक बॉक्स रिकॉर्डर)
लोको/मोटर कोच स्पीडोमीटर
2. CCTV सिस्टम को लेकर सवाल
RDSO के निर्देशों के अनुसार MEMU रैक में लगाए गए CCTV सिस्टम की कार्यप्रणाली की जांच आवश्यक बताई गई है।
ट्रेन 68733 में लगे CCTV सिस्टम की विश्वसनीयता पर सवाल उठे हैं।
3. उन्नत सहायक चेतावनी प्रणाली का उपयोग लंबित
MEMU ट्रेनों के लिए विकसित एडवांस्ड ऑक्ज़िलरी वार्निंग सिस्टम का परीक्षण पूरा होने के बाद भी इसे SECR में लागू नहीं किया गया था।
रिपोर्ट में बताया गया है कि यह सिस्टम लोको पायलट द्वारा सिग्नल मिस (SPAD) की घटनाओं को कम कर सकता है।
4. डीज़ल पावर कंट्रोल को सूचना में देरी — हूटर 7 मिनट देरी से बजा
डीजल कंट्रोल ऑफिस को समय पर संचार न मिलने के कारण चेतावनी हूटर सात मिनट देर से सक्रिय हुआ।
रिपोर्ट में इसे संचार व्यवस्था की कमजोरी माना गया है।
5. मेडिकल टेस्टिंग में बदलाव से कमियां
ALP के लिए जरूरी रक्त परीक्षण—
लिपिड प्रोफाइल
शुगर लेवल
आदि में हाल ही में हुए संशोधनों से कुछ प्रक्रियाओं में कमियां पाई गईं।
रिपोर्ट में इन निर्देशों की समीक्षा की आवश्यकता बताई गई है।
6. सिग्नलिंग नियमों में महत्वपूर्ण अंतर
GR 3.07 और 3.08 के अनुसार “डबल यलो” का अर्थ है—
आगे प्रतिबंधित गति
अगले सिग्नल पर रुकने की तैयारी
लेकिन SECR में इसके लिए कोई विशेष निर्देश लागू नहीं पाए गए।
SPAD जांच समिति ने इसे लंबे समय से लागू करने की सिफारिश की थी।
कार्रवाई की संभावनाएँ — रिपोर्ट SECR मुख्यालय को सौंप दी गई
CRS की प्रारंभिक रिपोर्ट SECR जोन मुख्यालय और बिलासपुर डिवीजन को सौंप दी गई है। इसमें दर्ज चूकों के आधार पर संबंधित विभागीय अधिकारियों पर कार्रवाई की संभावनाएँ बनी हुई हैं।
चूंकि यह प्रारंभिक रिपोर्ट है, इसलिए आगे विभागीय जांच, बयान और तकनीकी मूल्यांकन के बाद अंतिम रिपोर्ट जारी की जाएगी।
घटना के प्रभाव — जनहानि, आर्थिक नुकसान और कई परिवारों पर गहरा असर
दुर्घटना में—
12 यात्रियों की मौत,
20 से अधिक यात्री घायल,
रेलवे को करोड़ों रुपये का नुकसान दर्ज किया गया।
टक्कर में MEMU का मोटर कोच बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया और मालगाड़ी के कई वैगन प्रभावित हुए।
पूरी रिपोर्ट राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में
रेलवे सुरक्षा व्यवस्था, प्रशिक्षण प्रक्रिया, सिग्नलिंग प्रणाली, चिकित्सा मानकों और संचार तंत्र से जुड़े कई सवाल इस दुर्घटना के बाद राष्ट्रीय स्तर पर उठ रहे हैं। MEMU ट्रेनों का उपयोग बड़े पैमाने पर होने के कारण यह घटना रेलवे के सुरक्षा ढांचे पर केंद्रित बहस को और गंभीर बना रही है।

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