लगरा में आरटीओ की शासकीय भूमि पर अवैध खेती — 1 दिसंबर को होगा सीमांकन, विभाग हुआ सक्रिय
मोहम्मद इसराइल बबलू बिलासपुर।
सीपत रोड स्थित ग्राम लगरा में क्षेत्रीय परिवहन कार्यालय (आरटीओ) परिसर की शासकीय भूमि पर अवैध कब्जे और वर्षों से हो रही खेती का मामला अब उजागर हुआ है। परिवहन विभाग की उस जमीन पर, जिस पर ई-ट्रैक निर्माण का प्रस्ताव पहले ही पारित हो चुका है, स्थानीय नागरिकों द्वारा धान की फसल उगाए जाने का तथ्य सामने आया है।

अब प्रशासन ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए 1 दिसंबर को राजस्व टीम द्वारा सीमांकन की कार्यवाही तय कर दी है। किसी भी नागरिक की आपत्ति केवल उसी दिन मौके पर सुनी जाएगी। उसके बाद किसी आपत्ति पर विचार नहीं किया जाएगा।
कहां है यह जमीन?
स्थान — ग्राम लगरा, नियर ट्रैफिक पार्क, सीपत रोड, बिलासपुर
खसरा नंबर — 637/1 एवं 637/4
कुल रकबा — लगभग 2.218 तथा 4.047 हेक्टेयर
स्वामित्व — परिवहन विभाग, छत्तीसगढ़
उद्देश्य — ई-ट्रैक निर्माण हेतु आवंटित शासकीय भूमि
कैसे सरकारी जमीन पर पहुंच गई धान की फसल?
यह वही भूमि है, जिसे शासन ने परिवहन विभाग को आवंटित किया है। सीमांकन और चिहांकन की औपचारिकताएँ पूरी होने के बाद विभाग द्वारा ई-ट्रैक निर्माण की प्रक्रिया शुरू की जानी है।
लेकिन इन जमीनों पर लंबे समय से ग्रामीणों द्वारा अवैधानिक खेती की जा रही है। धान के रकबे और फसल का होना साफ बताता है कि सरकारी जमीन पर कब्जे की जानकारी विभागीय तंत्र तक नहीं पहुँचाई गई या फिर अनदेखी होती रही।
— उठते सवाल
शासकीय भूमि पर धान की पूरी फसल कैसे बो दी गई?
विभागीय अधिकारी इतने समय तक चुप क्यों रहे?
खाली पड़ी जमीन का रिकॉर्ड अपडेट क्यों नहीं किया गया?
ई-ट्रैक निर्माण योजना पर इसका असर क्यों नहीं बताया गया?
अब होगी कार्रवाई—1 दिसंबर को सीमांकन
राजस्व निरीक्षक, मंडल मोपका द्वारा यह भूमि न्यायालयीन आदेश के परिपालन में 1 दिसंबर 2025 को सीमांकित की जाएगी।
सीमांकन का समय — सुबह 10 बजे से शाम 5 बजे तक
जिस भी व्यक्ति को जमीन को लेकर आपत्ति हो, उसे उसी दिन दस्तावेज़ों के साथ मौके पर उपस्थित होना होगा।
उस तिथि के बाद की कोई आपत्ति स्वीकार नहीं की जाएगी।
— शासन की आधिकारिक सूचना
जारीकर्ता — कार्यालय क्षेत्रीय परिवहन अधिकारी, बिलासपुर
पत्रांक — 2273 / तकनीकी / क्षे.प.अ./2025
दिनांक — 28.11.2025
प्रतिलिपि भेजी गई — जनसंपर्क विभाग को प्रकाशन हेतु
समस्त दैनिक समाचार पत्रों को
आरटीओ असीम माथुर का आधिकारिक बयान
किसी तरह का जमीन विवाद नहीं है। यह शासकीय भूमि लंबे समय से खाली पड़ी थी, इसलिए कुछ लोगों ने धान लगा दी थी। फसल की कटाई हो चुकी है, अब भूमि का सीमांकन कर उसे सुरक्षित रखा जाएगा। ई-ट्रैक निर्माण की प्रक्रिया शासन के निर्देशानुसार आगे बढ़ाई जाएगी।”
— असीम माथुर, क्षेत्रीय परिवहन अधिकारी, बिलासपुर
मामला क्यों बना गंभीर?
जमीन सरकारी है, धान निजी लोगों की।
शासन द्वारा आवंटित भूमि पर इस स्तर का कब्जा प्रशासनिक लापरवाही का सीधा प्रश्न उठाता है।
ई-ट्रैक जैसे तकनीकी प्रोजेक्ट के लिए चिन्हित परिसर पर खेती यह संकेत देती है कि जमीन की निगरानी और रिकॉर्ड रखने वाली प्रणाली में गंभीर खामियाँ हैं।



