मोहम्मद इसराइल बबलू
बिलासपुर ,रायपुर।
रियल एस्टेट प्रोजेक्टों की रहवासी सोसायटियों में चल रही सालों पुरानी गड़बड़ियों पर आखिरकार बड़ा प्रहार हुआ है। छत्तीसगढ़ में गलत अधिनियम के तहत पंजीकरण कराने वाली सोसायटियों के खिलाफ सरकार ने कड़ा रुख अपनाते हुए रायपुर की एक सोसायटी का पंजीकरण रद्द कर दिया है, जबकि 360 अन्य सोसायटियों को कारण बताओ नोटिस जारी किए गए हैं। कॉलोनियों में मेंटेनेंस और शुल्क वसूली के नाम पर चल रहे अनियमित संचालन पर यह अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई मानी जा रही है।
रायपुर में आनंद विहार रेसिडेंट्स विकास सोसायटी पर गाज गिरते ही राज्यभर की हाउसिंग सोसायटियों में हड़कंप मच गया है। रजिस्ट्रार, फर्म्स एवं संस्थाएं, छत्तीसगढ़ ने जांच में पाया कि कई रहवासी सोसायटियां ऐसे अधिनियम में पंजीकृत थीं, जिसमें कॉलोनी के दैनिक रख-रखाव, मेंटेनेंस या शुल्क वसूली जैसी कोई कानूनी अनुमति ही नहीं है, बावजूद इसके वे सालों से यह काम कर रही थीं।
गलत श्रेणी में पंजीकरण कराने और उसके विपरीत जाकर वसूली करने के आरोपों के बाद आनंद विहार सोसायटी का पंजीयन अधिनियम की धारा-34 के तहत निरस्त किया गया। यही नहीं, इसी तरह के मामले सामने आने पर राज्य की 360 सोसायटियों को नोटिस भेजकर 15 दिनों में अपने उद्देश्य और पंजीयन दस्तावेज ऑनलाइन पोर्टल पर संशोधित करने के निर्देश दिए गए हैं।
कार्रवाई का आधार भू-संपदा (विनियमन एवं विकास) अधिनियम, 2016 और छत्तीसगढ़ कोऑपरेटिव एक्ट 1960 के वे प्रावधान बने, जिनमें स्पष्ट है कि 50% से अधिक आवंटन होने के बाद तीन महीने के भीतर सोसायटी या एसोसिएशन का गठन अनिवार्य है और इन्हें सहकारी अधिनियम के तहत ही पंजीकृत होना चाहिए। वहीं सामाजिक, शैक्षणिक और सांस्कृतिक संस्थाओं वाले छत्तीसगढ़ सोसायटी पंजीकरण अधिनियम, 1973 में मेंटेनेंस और शुल्क वसूली की कोई व्यवस्था नहीं है।
रजिस्ट्रार पद्मिनी भोई साहू की ओर से साफ किया गया है कि तय समय में सुधार न होने या शिकायत मिलने पर पंजीयन रद्द करने की कार्रवाई सीधे होगी। अब राज्य की ये 360 सोसायटियां जांच के दायरे में हैं और राज्य क के रियल एस्टेट सेक्टर में भी इस कदम को लेकर हलचल बढ़ गई है।



