मोहम्मद इसराइल बबलू
बिलासपुर की सेंट्रल यूनिवर्सिटी सोमवार को छात्रों के उग्र आक्रोश की गिरफ्त में रही। मेन गेट पर टनभर भीड़, दीवारों पर चढ़ते छात्र नेता और पुलिस की कई कंपनियों को मैदान में उतरना—कैंपस का हर कोना कड़क विरोध की आवाज से कांपता रहा।
बिलासपुर। सेंट्रल यूनिवर्सिटी में लंबे समय से चल रहे आरोपों, अव्यवस्थाओं और छात्र विरोधी रवैये के खिलाफ सोमवार को एनएसयूआई का उफनता गुस्सा पूरी तरह फट पड़ा। सुबह होते ही कैंपस का मेन एंट्री गेट विरोध का अखाड़ा बन गया, जहां छात्रों ने यूनिवर्सिटी प्रबंधन पर वह आरोप दे मारा जिसने पूरे मामले को विस्फोटक बना दिया—“छात्रों को रोकने गेट को वेल्डिंग कर बंद कर दिया गया।”

प्रबंधन ने तुरंत पलटवार करते हुए कहा कि यह वेल्डिंग नई नहीं बल्कि पिछली घटना में टूटा एल-ड्रॉप ठीक किया गया था, लेकिन जमीन पर खड़ी हजारों की भीड़ इस सफाई को मानने के मूड में नहीं दिखी। नारों की गूंज, संघर्ष का उफान और छात्रों का दीवार–गेट पर चढ़ जाना—नजारा ऐसा कि पुलिस की किलाबंदी भी हिलने लगी।
भीड़ इतनी भारी कि शहर के छह थानों से अतिरिक्त बल बुलाना पड़ा। पुलिस बैरिकेड बनाकर खड़ी रही, पर आक्रोशित भीड़ ने धक्का देकर सुरक्षा घेरे को तोड़ दिया और प्रशासनिक भवन की ओर बढ़ गई। प्रदर्शन का नेतृत्व प्रदेश अध्यक्ष नीरज पांडे सहित वरिष्ठ कांग्रेस नेताओं और एनएसयूआई के प्रदेश पदाधिकारियों ने किया।
छात्रों का गुस्सा दो बड़े मुद्दों पर भड़का हुआ था—
निष्कासित छात्र सुदीप शास्त्री की वापसी
छात्र अर्सलान अंसारी की संदिग्ध मौत की जवाबदेही
छात्र नेताओं ने आरोप लगाया कि कैंपस में सुरक्षा शून्य पर है और प्रबंधन जवाबदेही से बचता आ रहा है। प्रदर्शन की तीव्रता देखकर कुलसचिव समेत वरिष्ठ अधिकारी गेट पर पहुंचे। अधिकारियों ने जानकारी दी कि सुदीप शास्त्री के आवेदन पर 22 नवंबर की स्टैंडिंग कमेटी बैठक में निर्णय लिया जाएगा। वहीं अर्सलान की मौत की जांच में लापरवाही सामने आने पर केयर टेकर और चार वॉर्डन को हटाए जाने की पुष्टि की।
प्रबंधन की कोशिशें विरोध की आग शांत नहीं कर सकीं
विश्वविद्यालय प्रशासन ने दबाव बढ़ने पर घोषणा की कि—
अर्सलान मामले की विस्तृत रिपोर्ट 10 दिनों में पेश
कैंपस में सुरक्षा को दुरुस्त करने के लिए सीसीटीवी की पूरी नई श्रृंखला
महिला सुरक्षा के लिए यूजीसी गाइडलाइन लागू
पॉक्सो प्रावधानों को लेकर अलग निगरानी तंत्र
प्रोफेसर मनीष श्रीवास्तव के अनुसार निष्कासन का मामला पूरी तरह स्टैंडिंग कमेटी के दायरे में है और अगली बैठक में इसे समीक्षा के लिए रखा जाएगा। उन्होंने बताया कि अर्सलान केस की जांच लगभग पूरी है।
भीड़ का दबदबा—पांच घंटे तक कैंपस में तूफान
आठ जिलों से आए 3000 से अधिक एनएसयूआई कार्यकर्ताओं ने विश्वविद्यालय परिसर को पांच घंटे तक विरोध के शिकंजे में रखा। कुलपति की अनुपस्थिति पर गुस्सा और भड़क गया। कुलसचिव को भारी सुरक्षा घेरे में पुलिस ने बाहर निकाला।
नारे, भीड़ और पुलिस के सायरनों के बीच सेंट्रल यूनिवर्सिटी पूरा दिन जंग के मैदान में तब्दील रही—जहां छात्र शक्ति, प्रबंधन की ढिलाई और पुलिस की थकान एक साथ दिखाई दी।



