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VIP आएंगे… शहर थमेगा: बिलासपुर फिर बनेगा ‘नो-गो ज़ोन’, आम लोगों की रफ्तार पर ताला

Mohammed Israil
Mohammed Israil  - Editor
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मोहम्मद इसराइल बबलू

बिलासपुर में शनिवार को मुख्यमंत्री के दौरे से पहले फिर वही पुराना दृश्य सामने है—सड़कों पर डायवर्जन, ट्रैफिक थमेगा, और आम नागरिकों की दिनचर्या VIP प्रोटोकॉल की भेंट चढ़ेगी। सरकारी कार्यक्रमों की लंबी लिस्ट तो तैयार है, लेकिन शहरवासियों के लिए तैयार है जाम, बंद रास्ते और घंटों की मशक्कत। सवाल उठता है कि क्या हर VIP मूवमेंट पर पूरा शहर क्यों ठहर जाए?

बिलासपुर, 15 नवंबर —
मुख्यमंत्री के नगर आगमन को लेकर पुलिस प्रशासन ने शहर में छह बड़े कार्यक्रमों की रूट प्लानिंग जारी कर दी है, और इसके साथ ही शहरवासी एक बार फिर ‘VIP डे’ के लिए मानसिक रूप से तैयार हो रहे हैं। कार्यक्रम लगातार अलग-अलग एवेन्यू में फैले हुए हैं—कोनी से लेकर बस स्टैंड, साइंस कॉलेज मैदान से लेकर स्टेडियम तक… यानी शहर का आधा हिस्सा ‘क्लोज्ड सर्किट’ में और जनता ‘सतर्क मोड’ में।
दिनभर ये कार्यक्रम और जनता पर असर:
कोनी में संभागीय आयुक्त कार्यालय का लोकार्पण
पुलिस परेड ग्राउंड में जनजातीय गौरव दिवस
राजा रघुराज सिंह की प्रतिमा का अनावरण
पुराने बस स्टैंड क्षेत्र में वंदे मातरम उद्यान का लोकार्पण
साइंस कॉलेज मैदान में स्वदेशी मेला
लाल बहादुर शास्त्री स्कूल मैदान में राउत नाचा महोत्सव
कार्यक्रम भले विकास की तस्वीर पेश करते हों, लेकिन शहर की सूरत कुछ और ही कहानी कहती है—हर कार्यक्रम की तैयारी का असर सबसे पहले आम जनता पर पड़ता है।
गंभीर मरीज है तो हो जाएं सावधान…
जब शहर में VIP मूवमेंट होता है, तो आम लोगों के लिए मुश्किलें कई गुना बढ़ जाती हैं—खासकर उन परिवारों के लिए जिनके पास कोई गंभीर मरीज होता है। ट्रैफिक डायवर्जन के कारण एंबुलेंस तक का रास्ता बदल दिया जाता है और कई बार घंटेभर की देरी भी हो जाती है। सबसे चिंताजनक बात यह है कि ऐसे मौकों पर ग्रीन कॉरिडोर की कोई व्यवस्था नहीं होती। अगर किसी मरीज की जान बचाने के लिए तुरंत अस्पताल पहुंचना जरूरी हो, तब भी VIP प्रोटोकॉल सड़क पर प्राथमिकता ले लेता है। सवाल यही—क्या एक मरीज की जान से भी ज्यादा जरूरी VIP रास्ता है?


सबसे बड़ी परेशानी: आम लोगों की रफ्तार से छेड़छाड़
VIP मूवमेंट के दौरान शहर में इस कदर डायवर्जन लगाए जाते हैं कि स्कूल-कॉलेज जाने वाले बच्चे, ऑफिस कर्मचारी, मरीज, और रोज़मर्रा के राहगीर सड़क पर फंसे रह जाते हैं।
ट्रैफिक पुलिस का निर्देश है—“वैकल्पिक मार्ग का उपयोग करें”,
लेकिन हर VIP दौरे पर जनता की जुबान पर एक ही वाक्य होता है:
“कौन सा वैकल्पिक मार्ग? पूरा शहर ही घूमकर जाना पड़ता है।
हालात ऐसे हो जाते हैं मानो VIP नहीं,
नगर से राष्ट्रपति का काफिला निकला हो।
जरा सा कार्यक्रम और पूरा शहर ‘सावधान’ की मुद्रा में खड़ा।
सोशल मीडिया में पहले से चर्चा:
शहरवासियों ने पहले ही सोशल मीडिया पर व्यंग्य कसने शुरू कर दिए हैं—
“बिलासपुर में VIP मूवमेंट हो तो Google Maps भी हाथ जोड़ लेता है।”
“जिन रास्तों पर हम रोज चलते हैं, VIP आने पर वही रास्ते हमसे छीन लिए जाते हैं।”
प्रशासन की अपील बनाम जनता की मजबूरी:
यातायात पुलिस ने अपील की है कि लोग निर्देशों का पालन करें।
लेकिन जनता पूछ रही है—
“क्या पालन करने के लिए हमारे पास विकल्प भी है?”
सड़कों पर डायवर्जन भले ‘सुरक्षा’ के लिए हों,
लेकिन आम आदमी का काम, स्कूल, इलाज, और रोज़मर्रा की जिंदगी किसी VIP कार्यक्रम के कारण रुक जाए—
ये कब तक ‘नॉर्मल’ माना जाएगा?

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