Latest news

कांग्रेस में संगठनात्मक रिश्वत का संगीन आरोप: छत्तीसगढ़ में जिला अध्यक्ष पद के लिए मांगे जा रहे 5 से 7 लाख रुपए — पूर्व विधायक बृहस्पति सिंह का बड़ा खुलासा

Mohammed Israil
Mohammed Israil  - Editor
5 Min Read

मोहम्मद इसराइल बबलू | बिलासपुर, रायपुर/नई दिल्ली
छत्तीसगढ़ कांग्रेस एक बार फिर अंदरूनी विवादों में घिर गई है। पार्टी के पूर्व विधायक बृहस्पति सिंह ने संगठन के भीतर जिला अध्यक्ष पद की नियुक्ति को लेकर बड़ा खुलासा करते हुए सनसनी फैला दी है। उनका कहना है कि जिला अध्यक्ष बनाए जाने के नाम पर 5 से 7 लाख रुपए तक की रिश्वत की मांग की जा रही है। इस खुलासे के बाद कांग्रेस के अंदर हलचल मच गई है, वहीं बीजेपी ने इसे “कांग्रेस के भीतर चल रहे भ्रष्टाचार का नया चेहरा” बताया है।
वायरल वीडियो में बृहस्पति सिंह का बयान


सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे एक वीडियो में बृहस्पति सिंह ने साफ कहा है —
“मुझे सरगुजा संभाग के कई जिलों से सूचना मिली है कि एक व्यक्ति, जो स्वयं को कांग्रेस की छत्तीसगढ़ सह प्रभारी जरिता जी का सेक्रेटरी बता रहा है, जिला अध्यक्ष पद के दावेदारों से संपर्क कर रहा है। वह एक महिला के जरिए बातचीत करवाता है और उनसे 5 से 7 लाख रुपए की डिमांड की जा रही है। कहा जा रहा है कि पैसा देने पर अध्यक्ष बना दिया जाएगा।”
सिंह ने कहा कि यह सब कुछ राहुल गांधी की पारदर्शिता की सोच के खिलाफ है और इससे संगठन की साख पर गहरा असर पड़ेगा।
“जरिता मैडम के नाम पर हो रहा सौदा”
पूर्व विधायक का कहना है कि कांग्रेस हाईकमान ने जिला और ब्लॉक स्तर पर नई नियुक्तियों की प्रक्रिया संगठनात्मक रूप से पारदर्शी रखने के निर्देश दिए थे। इसके तहत अन्य प्रदेशों से पर्यवेक्षकों की नियुक्ति की गई थी, ताकि निचले स्तर तक पार्टी की पकड़ मजबूत हो।
लेकिन अब जिस तरह जरिता जी के नाम पर लेनदेन की बात सामने आई है, वह न केवल संगठन की गरिमा पर सवाल उठाती है, बल्कि केंद्रीय नेतृत्व की मंशा पर भी चोट करती है।
सिंह ने कहा,
“अगर यह सब कुछ हाईकमान की जानकारी के बिना हो रहा है तो यह गंभीर अनुशासनहीनता है। जरिता जी के खिलाफ जांच और कार्रवाई होनी चाहिए ताकि संगठन में साफ-सुथरी परंपरा कायम रहे।”
पार्टी की छवि को भारी नुकसान
कांग्रेस के अंदर चल रही यह कथित सौदेबाजी उस वक्त सामने आई है जब पार्टी राज्य में अपनी संगठन सृजन मुहिम चला रही है और सत्ता में वापसी के लिए नए ढांचे का निर्माण कर रही है। ऐसे में संगठनात्मक पदों के लिए पैसों की डिमांड की खबरें पार्टी की विश्वसनीयता पर सीधा प्रहार मानी जा रही हैं।
राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि यह विवाद केवल छत्तीसगढ़ तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर कांग्रेस नेतृत्व की नैतिक स्थिति पर भी सवाल खड़ा करेगा — खासकर उस समय जब राहुल गांधी लगातार “साफ राजनीति” और “संगठनिक ईमानदारी” की बात कर रहे हैं।
“संगठन को तोड़ने की साजिश या अंदरूनी रार?”
पार्टी सूत्रों के मुताबिक, हाईकमान को इस पूरे प्रकरण की जानकारी दी गई है और जल्द ही संगठन प्रभारी एवं पर्यवेक्षकों से रिपोर्ट मांगी जा सकती है। हालांकि, अभी तक कांग्रेस के आधिकारिक प्रवक्ता की ओर से इस पर कोई टिप्पणी नहीं की गई है।
पार्टी के एक वरिष्ठ नेता ने नाम न छापने की शर्त पर कहा,
“ऐसे आरोप संगठन को कमजोर करते हैं। यदि किसी ने भी पैसे के बदले पद का सौदा करने की कोशिश की है तो उसे तुरंत बाहर का रास्ता दिखाया जाना चाहिए।”
भाजपा का पलटवार
उधर, बीजेपी ने इस मुद्दे को हाथों-हाथ लेते हुए कांग्रेस पर तीखा हमला बोला है।
छत्तीसगढ़ भाजपा प्रवक्ता ने कहा,
“कांग्रेस अब टिकट से लेकर पद तक बेचने में लग गई है। यह पार्टी अब आंदोलन की नहीं, ‘आय के पदों’ की राजनीति करती है। यह वही कांग्रेस है जो भ्रष्टाचार पर नैतिकता का भाषण देती है।”
संगठन पर छाया असमंजस
इस खुलासे ने छत्तीसगढ़ कांग्रेस में संगठनात्मक अस्थिरता और अंदरूनी खींचतान को फिर से उजागर कर दिया है। एक तरफ पार्टी नए नेतृत्व की तलाश में जुटी है, वहीं दूसरी तरफ पैसे लेकर पद देने के आरोप ने हाईकमान की रणनीति पर बड़ा प्रश्नचिह्न खड़ा कर दिया है।
फिलहाल पार्टी ने मामले की जांच की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है, लेकिन बृहस्पति सिंह के आरोपों ने छत्तीसगढ़ से दिल्ली तक कांग्रेस नेतृत्व को असहज जरूर कर दिया है।

खबर को शेयर करने के लिए क्लिक करे।।