बिलासपुर। मोहम्मद इसराइल बबलू
छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिले के लाल खदान स्टेशन के पास हुई भीषण रेल दुर्घटना के बाद अब मामले की जांच कई स्तरों पर शुरू हो गई है। रेलवे सुरक्षा आयुक्त (CRS) बृजेश कुमार मिश्रा ने बुधवार से हादसे की औपचारिक जांच आरंभ कर दी है। वहीं दूसरी ओर बिलासपुर पुलिस ने रेलवे की शिकायत पर अज्ञात व्यक्तियों के खिलाफ लापरवाही से मौत और दूसरों की जान खतरे में डालने का मामला दर्ज कर लिया है।


मंगलवार की शाम हुए इस हादसे में 11 लोगों की मौत हुई थी, जिनमें छह महिलाएं और एक लोको पायलट शामिल हैं, जबकि 20 यात्री घायल हुए हैं। यह हादसा तब हुआ जब गेवरा से बिलासपुर आ रही मेमू यात्री ट्रेन ने लाल सिग्नल पार करते हुए एक खड़ी मालगाड़ी को 60-70 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से पीछे से टक्कर मार दी। टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि मेमू ट्रेन के आगे के तीन डिब्बे क्षतिग्रस्त हो गए और यात्रियों में अफरा-तफरी मच गई।
CRS ने शुरू की तकनीकी जांच, 19 अधिकारी-कर्मचारी तलब
रेलवे सुरक्षा आयुक्त (CRS) बृजेश कुमार मिश्रा ने हादसे की तहकीकात के लिए दो दिवसीय जांच प्रक्रिया शुरू की है। 6 और 7 नवंबर को बिलासपुर DRM कार्यालय में पूछताछ होगी, जिसमें रेलवे के करीब 19 कर्मचारी और अधिकारी आवश्यक दस्तावेजों सहित तलब किए गए हैं।
इनमें मेमू ट्रेन की सहायक लोको पायलट रश्मि राज, मालगाड़ी के गार्ड सुनील कुमार साहू, सहायक लोको पायलट पुनीत कुमार, मेमू ट्रेन के मैनेजर एके दीक्षित, मालगाड़ी के मैनेजर शैलेश चंद्र, तीन स्टेशन मास्टर आशा रानी, ज्योत्स्ना रात्रे और निशा कुमारी, सेक्शन कंट्रोलर पूजा गिरी, CLI एसके आचार्य, CSM एसके निर्मलकर, सेक्शन इंजीनियर जेपी राठौर, जेके चौधरी, नरेंद्र साहू, बोधन गड़रिया, और कई अन्य तकनीकी कर्मचारी शामिल हैं।
जांच टीम ने गतौरा स्टेशन के सिग्नल पैनल रूम, रेल लाइन और दोनों प्रभावित ट्रेनों का निरीक्षण शुरू कर दिया है। CRS की टीम दुर्घटना स्थल पर सिग्नलिंग सिस्टम, ब्रेकिंग पॉइंट, और ट्रेन संचालन के सभी रिकॉर्ड का सूक्ष्म परीक्षण कर रही है।
हादसे के कारणों पर फोकस — मानव त्रुटि या तकनीकी विफलता?
CRS जांच का मुख्य उद्देश्य यह पता लगाना है कि लाल सिग्नल पार होने की वास्तविक वजह क्या थी — क्या यह सिग्नलिंग फेल्योर, संचालनिक लापरवाही, या मानव त्रुटि का परिणाम था। प्रारंभिक रिपोर्टों के अनुसार, ट्रेन के कंट्रोल पैनल लॉग और सिग्नल डेटा रिकॉर्डर (SDR) को जब्त कर लिया गया है।
रेलवे सूत्रों का कहना है कि जांच रिपोर्ट में सिग्नल की स्थिति, ड्राइवर और स्टेशन मास्टर के बीच संचार, कंट्रोल रूम से मिले आदेश, और मेमू ट्रेन के ब्लैक बॉक्स (डाटा रिकॉर्डर) की जांच को आधार बनाया जाएगा।
तीन दिन में मांगी गई रिपोर्ट
रेलवे बोर्ड ने CRS से तीन दिनों के भीतर प्रारंभिक जांच रिपोर्ट तलब की है। इस रिपोर्ट के आधार पर सुरक्षा समीक्षा और जिम्मेदारी तय करने की प्रक्रिया शुरू होगी। रेल मंत्रालय ने साफ किया है कि इस जांच को “सर्वोच्च प्राथमिकता” दी गई है, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।
पुलिस जांच भी शुरू — अज्ञात आरोपियों के खिलाफ केस दर्ज
उधर, तोरवा थाना पुलिस ने रेलवे अधिकारी के ज्ञापन पर भारतीय न्याय संहिता की धारा 106 (लापरवाही से मौत), 125 (दूसरों की जान को खतरे में डालना) और रेलवे अधिनियम की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज कर लिया है। थाना प्रभारी अभय सिंह बैस ने बताया कि दुर्घटना की आपराधिक जांच समानांतर रूप से की जा रही है।
उन्होंने कहा कि तकनीकी और प्रशासनिक जांच के साथ-साथ जिम्मेदार व्यक्तियों की भूमिका और लापरवाही की कानूनी जवाबदेही भी तय की जाएगी। पुलिस ने स्टेशन और कंट्रोल रूम के अधिकारियों के बयान दर्ज करने शुरू कर दिए हैं।
अस्पतालों में घायलों का इलाज जारी, मुआवजा घोषित
रेलवे प्रशासन ने मृतकों के परिजनों को 10-10 लाख रुपये, गंभीर रूप से घायलों को 5-5 लाख रुपये और सामान्य रूप से घायलों को 1-1 लाख रुपये की सहायता राशि देने की घोषणा की है।
दुर्घटना में जान गंवाने वालों में मेमू ट्रेन के लोको पायलट विद्या सागर भी शामिल हैं, जबकि सहायक लोको पायलट रश्मि राज, ट्रेन प्रबंधक अशोक कुमार दीक्षित, और मालगाड़ी के गार्ड शैलेश चंद्र अभी भी अस्पताल में भर्ती हैं।
सुरक्षा बढ़ाई गई, यात्रियों से सतर्कता की अपील
हादसे के बाद बिलासपुर और आसपास के सभी स्टेशनों पर सुरक्षा बढ़ा दी गई है। रेलवे ने यात्रियों से अपील की है कि आगामी तीन दिनों तक किसी भी संदिग्ध गतिविधि या तकनीकी गड़बड़ी की सूचना तुरंत सुरक्षा अधिकारियों को दें।
जांच में पारदर्शिता की मांग
स्थानीय जनप्रतिनिधियों और यात्रियों के परिजनों ने मांग की है कि जांच प्रक्रिया पारदर्शी हो, और CRS रिपोर्ट को सार्वजनिक किया जाए ताकि यह स्पष्ट हो सके कि इस त्रासदी का जिम्मेदार कौन था — सिग्नल सिस्टम, रेल प्रबंधन या मानव लापरवाही?



