मस्तूरी शूटआउट पार्ट 2: 200 मीटर दूर था थाना, फिर भी चली गोलियां — पुलिस के सामने अब 20 से ज़्यादा अनसुलझे सवाल
एसीसीयू की पूछताछ में 20 से अधिक लोग, किंगपिन की तलाश जारी — हथियारों की बरामदगी ने खोली सिस्टम की परते बिलासपुर | मोहम्मद इसराइल बबलू
मस्तूरी की सड़कों पर चली गोलियों की आवाज़ अब भी बिलासपुर की हवा में गूंज रही है —
एक के बाद एक गिरफ्तारी, लेकिन असली मास्टरमाइंड अब भी आज़ाद है। हालांकि बिलासपुर पुलिस के घेरे में शहर के तीन भाईजान और दो कांग्रेस नेता इस कांड को लेकर घेरे में आ गए हैं। यही नहीं उनके कुछ और साथी भी जल्द ही पकड़े जाएंगे। इसकी चर्चा पूरे शहर में शुरू हो गई है।
थाने से मात्र 200 मीटर की दूरी पर अंधाधुंध फायरिंग होती है, कांग्रेस नेता नितेश सिंह को निशाना बनाया जाता है,
और पुलिस “जांच जारी है” कहकर मामले को शांत करने की कोशिश में है।
यह वही मस्तूरी है जहाँ से अब बिलासपुर की कानून व्यवस्था पर सबसे बड़े सवाल उठ खड़े हुए हैं —
क्या अपराधी अब थानों की छांव में भी गोली चला सकते हैं?
क्या पुलिस जानबूझकर “बड़े नामों” को बचा रही है?
और क्या वाकई इस शूटआउट के पीछे सत्ता से जुड़ा किंगपिन छिपा है?
20 से अधिक लोगों से पूछताछ — किंगपिन अब भी गायब
एसीसीयू की टीम अब तक 20 से ज़्यादा लोगों से पूछताछ कर चुकी है।
एडिशनल एसपी ग्रामीण अर्चना झा ने पुष्टि की है कि “कई बड़े नाम सामने आए हैं” —
यानि यह मामला केवल आपसी रंजिश नहीं, बल्कि संगठित आपराधिक गठजोड़ की बू दे रहा है।
शूटरों की गिरफ्तारी के बाद भी रहस्य कायम है —
किसने फायरिंग कराई? किसने हथियार दिए? किसने बच निकलने की राह बनाई?
पुलिस के पास कुछ जवाब हैं, लेकिन ज़्यादा सवाल हैं।
एसीसीयू के हाथ लगे हथियार, लेकिन कहानी अधूरी
जांच टीम ने शुक्रवार को मस्तूरी क्षेत्र से वारदात में इस्तेमाल किए गए कुछ सामान जब्त किए,
परिवार के मुताबिक पुलिस ने केवल एक पिस्टल और दो देसी कट्टे बरामद किए,
जबकि फायरिंग के दौरान कम से कम चार हथियारों से गोलियां चलीं।
इससे साफ है कि कुछ हथियार अब भी गायब हैं — और उनके साथ शायद असली सच्चाई भी।
सिरगिट्टी का ‘पिस्टल कनेक्शन’ — अब जांच की नई दिशा
सिरगिट्टी में तीन मजदूरों के घर की छत पर मिली .22 एमएम की पिस्टल,
मस्तूरी शूटआउट से जुड़ी बताई जा रही है।
मैग्ज़ीन में 12 राउंड में से केवल 3 बुलेट मिलीं — एक लोडेड, बाकी गायब।
थाना प्रभारी और सीएसपी भले इनकार कर रहे हों,
लेकिन बिलासपुर के क्राइम सर्कल में चर्चा है कि यह वही हथियार है जो फायरिंग में इस्तेमाल हुआ था।
और सबसे चौंकाने वाली बात —
पिस्टल देने वाला आरोपी नारायण अवस्थी अब मध्यप्रदेश के ग्वालियर में घूम रहा है,
और पुलिस अब तक उसे पकड़ नहीं सकी।
क्या वह किसी “ऊपर के दबाव” से बचाया जा रहा है?
अपराधियों का साहस या पुलिस की नींद?
शहर में अब यह सवाल खुलेआम पूछा जा रहा है —
थाने के ठीक सामने गोलीबारी, और पुलिस को भनक तक नहीं?
किसके संरक्षण में घूम रहे ये हथियारबंद गिरोह?
क्यों मवेशी तस्कर, खनिज माफिया, अवैध शराब कारोबारी
और ठेकेदारों की दबंग लॉबी पुलिस की नज़रों से ओझल हैं?
मस्तूरी गोलीकांड अब सिर्फ एक फायरिंग नहीं,
बल्कि बिलासपुर पुलिस के सिस्टम की सड़ांध को उजागर करने वाला दर्पण बन गया है।
सवाल जो पुलिस की साख पर वार कर रहे हैं
थाना पास होते हुए भी अपराधियों को रोकने में नाकामी क्यों?
अपराधियों के पास इतनी बड़ी संख्या में हथियार कैसे पहुँचे?
हथियारों की सप्लाई चैन पर पुलिस का कोई ट्रैक नहीं?
सिरगिट्टी में मिला हथियार मस्तूरी फायरिंग से जुड़ा या नहीं — जवाब क्यों नहीं?
नारायण अवस्थी जैसे नामचीन आपूर्तिकर्ता अब तक फरार कैसे?
क्या स्थानीय राजनेता अपराधियों को संरक्षण दे रहे हैं?
कांग्रेस नेता पर हमले के राजनीतिक मायने क्या हैं?
क्या फायरिंग किसी ठेका विवाद या वसूली रैकेट से जुड़ी है?
बिलासपुर में लगातार बढ़ रहे हथियार मामलों पर कोई ठोस नीति क्यों नहीं?
क्या पुलिस को भीतर से लीक हो रही हैं सूचनाएं?
अपराधियों के पास हर बार पुलिस की जानकारी पहले कैसे पहुँचती है?
क्या यह शूटआउट किसी संगठित गैंग का संकेत है?
एसीसीयू की रिपोर्ट सार्वजनिक क्यों नहीं की जा रही?
अपराधियों के कॉल डिटेल से जुड़े बड़े नामों पर चुप्पी क्यों?
क्या पुलिस सच्चाई दबाने में लगी है?
बिलासपुर में अवैध शराब, खनन और रंगदारी का अंडरवर्ल्ड कौन चला रहा है?
क्या यह नेटवर्क माफिया-पॉलिटिशियन-पुलिस गठजोड़ का हिस्सा है?
फायरिंग के दिन गश्त कहां थी?
मस्तूरी में लगातार हो रही अवैध गतिविधियों पर पुलिस की खामोशी क्यों?
क्या इस गोलीकांड की सच्चाई सामने आने से कुछ “बड़े नाम” बेनकाब हो जाएंगे?



