मोहम्मद इसराइल बबलू
बिलासपुर ,कोरबा, रायपुर।
छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले में गुरुवार शाम एक बार फिर प्रकृति की सबसे रहस्यमयी झलक देखने को मिली। यहां वही दुर्लभ काले रंग का सफेद धारियों वाला किंग कोबरा दोबारा दिखा, जिसका पहला रेस्क्यू 2021 में हुआ था। इस बार यह विषधर सांप न केवल एक फीट लंबा (13 फीट) हो चुका है, बल्कि पहले की तुलना में और अधिक आक्रामक और शक्तिशाली भी दिखाई दिया। वन विभाग और नोवा नेचर वेलफेयर सोसायटी की टीम ने डेढ़ घंटे की मशक्कत के बाद इसे सफलतापूर्वक रेस्क्यू किया।

भारत के मध्य क्षेत्र में फैले घने जंगलों और जैव-विविधता के लिए प्रसिद्ध कोरबा जिला एक बार फिर चर्चा में है। यहां गांव पसरखेत के पास गुरुवार शाम 4 बजे ग्रामीणों ने एक विशालकाय किंग कोबरा को देखा तो दहशत फैल गई। देखते ही देखते भीड़ जुट गई और वन विभाग को सूचना दी गई।
सूचना मिलते ही रेस्क्यूअर जितेंद्र सारथी, एम सूरज, सिद्धांत जैन और बबलू मारवा की टीम कोरबा डीएफओ प्रेमलता यादव के निर्देश पर मौके के लिए रवाना हुई। ग्रामीणों को पहले सुरक्षित दूरी पर किया गया और फिर तय प्रोटोकॉल के तहत रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू हुआ।
डेढ़ घंटे की जद्दोजहद के बाद हुआ ‘ब्लैक किंग’ का रेस्क्यू
रेस्क्यू टीम के अनुसार, 2021 में जब इस किंग कोबरा को पहली बार पकड़ा गया था, तब यह काफी शांत था। लेकिन इस बार यह बेहद आक्रामक व्यवहार कर रहा था। बार-बार फुफकारते हुए उसने कई बार हमला करने की कोशिश की। करीब 90 मिनट तक चले रेस्क्यू ऑपरेशन के बाद टीम ने धैर्य और तकनीक का इस्तेमाल करते हुए इसे सुरक्षित रूप से थैले में डाल लिया।
रेस्क्यू के बाद नियमानुसार पंचनामा तैयार किया गया और फिर किंग कोबरा को उसके प्राकृतिक आवास वाले घने जंगल में छोड़ दिया गया। इस दौरान पासरखेत वन परिक्षेत्र अधिकारी देवदत्त खांडे, नोवा नेचर के सदस्य और ग्रामीण मौजूद रहे।
किंग कोबरा की ‘कोरबा में स्थायी मौजूदगी’ की पुष्टि
वन विभाग ने बताया कि यह वही किंग कोबरा है जो चार साल पहले (2021) इसी इलाके से रेस्क्यू किया गया था। उसकी लंबाई तब 12 फीट थी, जो अब बढ़कर 13 फीट हो चुकी है। यह तथ्य यह भी साबित करता है कि कोरबा वन क्षेत्र किंग कोबरा की स्थायी आबादी और प्राकृतिक विकास के लिए बेहद अनुकूल है।
डीएफओ प्रेमलता यादव ने कहा,
“किंग कोबरा को वन्यप्राणी (संरक्षण) अधिनियम-1972 की अनुसूची-1 में रखा गया है।
यह एक संरक्षित जीव है और इसे छेड़ना या मारना कानूनी अपराध है।
किसी भी सांप के दिखने पर वन विभाग को सूचना देना जरूरी है।”
डीएनए एनालिसिस से होगी वैज्ञानिक पुष्टि
वन विभाग अब इस किंग कोबरा के डीएनए एनालिसिस की तैयारी कर रहा है ताकि यह स्पष्ट हो सके कि यह वही नर है, जिसे पहले रेस्क्यू किया गया था। विशेषज्ञों के अनुसार, किंग कोबरा 20 फीट तक लंबा हो सकता है और यह दुनिया का सबसे लंबा विषधर सांप है। यह अन्य सांपों को खाकर खाद्य श्रृंखला का संतुलन बनाए रखता है।
किंग कोबरा की ‘राजसी प्रवृत्ति’ — अपने इलाके में किसी और नर को नहीं सहता
वन्यजीव विशेषज्ञों ने बताया कि यह वयस्क नर किंग कोबरा अपने इलाके को लेकर बेहद पजेसिव (संवेदनशील) होता है। जिस क्षेत्र में एक नर किंग कोबरा रहता है, वहां दूसरे नर के आने पर भीषण द्वंद की स्थिति बन जाती है। यही कारण है कि यह सांप बार-बार अपने इलाके का चक्कर लगाता है।
पर्यावरण संतुलन के लिए अनिवार्य जीव
किंग कोबरा को पारिस्थितिक तंत्र का टॉप प्रीडेटर (शीर्ष शिकारी) माना जाता है। यह अन्य सांपों की संख्या नियंत्रित करता है और जंगल की खाद्य श्रृंखला का अहम हिस्सा है। विशेषज्ञों का कहना है कि यह बिना वजह मनुष्यों पर हमला नहीं करता, केवल खतरा महसूस होने पर आक्रामक हो जाता है।
Fact File
रेस्क्यू स्थान: ग्राम पसरखेत, कोरबा वनमंडल
रेस्क्यू की तिथि: गुरुवार, 30 अक्टूबर 2025
लंबाई: 13 फीट (2021 में 12 फीट थी)
उम्र: लगभग 8 वर्ष
प्रजाति: King Cobra (Ophiophagus hannah)
संरक्षण श्रेणी: वन्यप्राणी संरक्षण अधिनियम 1972 की अनुसूची-I
रेस्क्यू टीम: जितेंद्र सारथी, एम सूरज, सिद्धांत जैन, बबलू मारवा, देवदत्त खांडे (वन अधिकारी)




