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“एक शव… और विवि का जश्न!”

Mohammed Israil
Mohammed Israil  - Editor
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मोहम्मद इसराइल बबलू


00 बिलासपुर सेंट्रल यूनिवर्सिटी में छात्र की संदिग्ध मौत ने खोला सिस्टम की संवेदनहीनता का काला चेहरा


कैंपस में मौत, मंच पर नाच और प्रशासन की चुप्पी…
बिलासपुर, रायपुर।गुरु घासीदास सेंट्रल यूनिवर्सिटी (GGU) बिलासपुर में तीसरे वर्ष के छात्र अर्सलान अंसारी की रहस्यमय मौत ने पूरे शैक्षणिक तंत्र की संवेदनहीनता और भ्रष्ट मानसिकता को उजागर कर दिया है।
जहां एक ओर परिवार बेटे की लाश पहचान रहा था, वहीं उसी समय विश्वविद्यालय प्रशासन “खुशियों के पल” कार्यक्रम में तालियों और गीतों के बीच झूम रहा था। सवाल अब यह नहीं कि अर्सलान कैसे मरा — बल्कि यह है कि संवेदनाएँ मर क्यों गईं?


मौत की कहानी — तीन दिन की चुप्पी, एक सड़ा हुआ सच
अर्सलान अंसारी, बीएससी फिजिक्स के तीसरे वर्ष का छात्र, विवेकानंद छात्रावास में रहता था।
18 अक्टूबर को वह लापता हुआ।
यूनिवर्सिटी प्रशासन की ओर से कोई आधिकारिक सर्च नोटिस नहीं निकला, न कोई जांच टीम गठित हुई।
परिवार खुद खोज में जुटा रहा — और तीन दिन बाद कैंपस के भीतर तालाब से मिली लाश ने सबको झकझोर दिया।
शव की हालत सड़ी-गली थी, जिससे स्पष्ट था कि मौत कई दिन पहले हो चुकी थी।


प्रशासन की संवेदनहीनता — शव कैंपस में, मंच पर नाच-गाना
जिस दिन पोस्टमार्टम की तैयारी चल रही थी, उसी दिन यूनिवर्सिटी ने “खुशियों के पल” नाम से कार्यक्रम आयोजित किया।
कुलपति, उनकी धर्मपत्नी और चीफ वार्डन डॉ. प्रतिभा मिश्रा बुजुर्ग महिलाओं के साथ मंच पर नृत्य कर रही थीं।
छात्र अर्सलान का शव विवि के तालाब में पड़ा था, और विवि की छवि चमकाने के लिए कैमरे फ्लैश कर रहे थे।
यही दृश्य आज सोशल मीडिया पर “संवेदनहीनता की पराकाष्ठा” के रूप में वायरल है।
छात्र बोले — “जांच नहीं, औपचारिकता चल रही है”


छात्रों ने आरोप लगाया है कि विवि प्रशासन पूरे मामले को दबाने में लगा है।
जांच समिति तो बनी है — पर सवाल यह है कि जांच किनके खिलाफ है और कौन जांच कर रहा है?
डीएसडब्ल्यू शैलेंद्र कुमार और डॉ. भारती अहिरवार को जिम्मेदारी दी गई है,
पर वही अधिकारी उस तंत्र का हिस्सा हैं जो पहले ही इस घटना पर मौन रहा।
छात्रों का आरोप:
हॉस्टल वार्डन डॉ. महेश ढपोला को बचाने के लिए विवि ने जानबूझकर कार्रवाई नहीं की।
एडमिन वार्डन के पास इंटरनेशनल गेस्ट हाउस का अतिरिक्त चार्ज दे दिया गया, जबकि उन्हीं के कार्यकाल में छात्र लापता हुआ।
चीफ वार्डन घटना के दिन भी कार्यक्रम में शामिल थीं।
पोस्टमार्टम रिपोर्ट गायब — पुलिस की चुप्पी पर भी सवाल
घटना के 10 दिन बाद भी पोस्टमार्टम रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं की गई है।
एसपी कार्यालय और सिविल लाइन थाना दोनों इस पर मौन हैं।
सवाल यह है — क्या विश्वविद्यालय प्रशासन और पुलिस के बीच कोई ‘सहमति की खामोशी’ है?
अभी तक न किसी को सस्पेंड किया गया, न किसी पर आपराधिक मामला दर्ज हुआ।
इंश्योरेंस का जाल — क्या दो लाख में निपटा दी जाएगी जान?
यूनिवर्सिटी ने जनवरी 2024 में छात्रों के लिए दुर्घटना बीमा कराया था,
जिसमें मृत्यु पर दो लाख रुपये का दावा किया जा सकता है।
अब सवाल यह है कि जब मौत की परिस्थितियाँ संदिग्ध हैं,
तो क्या प्रशासन इस बीमा को ‘मुआवज़े’ के रूप में दिखाकर केस दबा देगा?
बीमा कंपनी तभी भुगतान करेगी जब मृत्यु दुर्घटनात्मक मानी जाएगी —
पर क्या यह दुर्घटना थी या हत्या — इसका जवाब अब तक किसी के पास नहीं।
अंदरूनी गुटबाजी और सत्ता का खेल
GGU के अंदर वर्षों से प्रशासनिक गुटबाजी और आरोप-प्रत्यारोप का माहौल रहा है।
फैकल्टी से लेकर हॉस्टल प्रबंधन तक, कुर्सी और पद ही संवेदना से ज्यादा महत्वपूर्ण माने जाते हैं।
छात्र संघों का कहना है —
“कैंपस में डर का माहौल है, अधिकारी सवाल करने वालों को टारगेट करते हैं।”
30 अक्टूबर को आंदोलन का ऐलान
अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) ने इस पूरे प्रकरण के विरोध में 30 अक्टूबर को यूनिवर्सिटी गेट पर प्रदर्शन की घोषणा की है।
छात्र मांग कर रहे हैं —
वार्डन और एडमिन वार्डन को तत्काल निलंबित किया जाए।
पोस्टमार्टम रिपोर्ट सार्वजनिक की जाए।
स्वतंत्र जांच टीम गठित की जाए।
अर्सलान की मौत सिर्फ एक छात्र का खो जाना नहीं है,
यह उस सिस्टम के सड़ जाने की कहानी है,
जहां एक लाश के बगल में तालियां बजती हैं,
और संवेदनाएँ फाइलों में दबी रह जाती हैं।
जब विश्वविद्यालय जैसे पवित्र संस्थान में ऐसी अमानवीयता दिखे,
तो यह केवल “प्रशासनिक विफलता” नहीं,
बल्कि हमारी शिक्षा व्यवस्था की आत्मा की हत्या है।
छात्र की मौत पर मौन, मंच पर जश्न — GGU की अमानवीय तस्वीर!
पोस्टमार्टम रिपोर्ट गायब, पुलिस और विवि की मिलीभगत के संकेत!
वार्डन पर सवाल, लेकिन कार्रवाई शून्य!
ABVP का अल्टीमेटम — जवाब नहीं तो ताला बंद आंदोलन!

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