
करोड़ों की जमीन पर रसूखदारों की नज़र — आरआई पर मनमानी का आरोप, प्रक्रिया की धज्जियां उड़ाने से मचा हंगामा
बिला
Bilaspur। बिलासपुर के जूना बिलासपुर क्षेत्र के करबला इलाके में करोड़ों जमीन के सीमांकन को लेकर को जमकर बवाल मच गया। आरोप है कि भू-माफियाओं के इशारे पर सिर्फ नियमों को ताक पर रख दिया, बल्कि रातों-रात नोटिस देकर सुबह सीमांकन पूरा भी कर लिया।
स्थानीय लोगों का कहना है कि सीमांकन प्रक्रिया में न तो वास्तविक पक्षकार मौजूद थे, न ही नियमानुसार पूर्व सूचना दी गई। बावजूद विवादित जमीन का सीमांकन कर दिया, जिससे पूरे क्षेत्र में रोष फैल गया।
करबला की ‘कोदू होटल चौक’ की जमीन पर माफियाई साया
जूना बिलासपुर पटवारी हल्का के अंतर्गत कोदू होटल चौक स्थित जमीन वर्षों से विवादित रही है। यह भूमि बेहद कीमती मानी जाती है, जिसका बाजार मूल्य करोड़ों रुपये में है।
यहां नीलम कश्यप सहित कई लोगों की करीब एक एकड़ जमीन दर्ज है। वहीं शिवप्रताप साव के परिवार की पुरानी भूमि भी इसके पास ही स्थित है।
शिवप्रताप साव पक्ष का आरोप है कि उनकी जमीन पर कुछ लोगों ने अवैध कब्जा कर लिया है। इसी को लेकर उन्होंने तहसील कार्यालय में सीमांकन के लिए आवेदन प्रस्तुत किया था। लेकिन दूसरी तरफ, स्थानीय लोगों का दावा है कि यह पूरा सीमांकन एक पूर्वनियोजित ‘स्क्रिप्ट’ के तहत भू-माफियाओं की ओर से करवाया गया है।
“रात में नोटिस, सुबह नाप” — प्रक्रिया की धज्जियां उड़ाईं
प्रभावित पक्षों का आरोप है कि आरआई मनीष शुक्ला ने रात में ही नोटिस चिपका दिया और सुबह-सुबह सीमांकन की कार्रवाई शुरू कर दी।
आम तौर पर सीमांकन के लिए कम से कम तीन बार पूर्व सूचना व नोटिस देना आवश्यक होता है, ताकि सभी पक्ष मौके पर मौजूद रह सकें।
स्थानीय लोगों ने विरोध दर्ज कराया, लेकिन आरआई ने कार्रवाई जारी रखी।
अब असंतुष्ट पक्षों ने कहा है कि वे सीमांकन प्रक्रिया की वैधता को लेकर न्यायालय का दरवाजा खटखटाएंगे।
दूसरे पक्ष का तर्क — “तीन बार नोटिस दिया गया”
वहीं, शिवप्रताप साव और उनके परिवार का कहना है कि उन्होंने नियमानुसार तहसील कार्यालय में आवेदन किया था और तीन बार नोटिस जारी किए जाने के बाद ही सीमांकन कराया गया है। उनका कहना है कि उनकी जमीन पर कब्जा जमाने वाले अब बेबुनियाद आरोप लगा रहे हैं। Ri मनीष शुक्ला का कहना है कि तहसीलदार के आदेश पर दो ri और चार पटवारी की टीम ने सीमांकन किया है जिसकी रिपोर्ट जल्दी न्यायालय को सौंप दी जाएगी।
राजस्व विभाग की भूमिका पर उठे सवाल
इस पूरे विवाद में सबसे बड़ा प्रश्न राजस्व विभाग की पारदर्शिता और जवाबदेही पर खड़ा हो गया है।
जहां एक ओर सीमांकन जैसी संवेदनशील प्रक्रिया में पक्षकारों की अनुपस्थिति और शॉर्ट नोटिस ने विभाग की नीयत पर संदेह गहरा दिया है, वहीं दूसरी ओर मौजूदा आरआई के कार्यशैली पर माफिया गठजोड़ के आरोप प्रशासनिक व्यवस्था पर सीधा हमला हैं।
स्थानीय नागरिकों ने मांग की है कि पूरा मामला तहसील और कलेक्टर स्तर पर पुनः जांच के लिए भेजा जाए तथा संबंधित अधिकारी के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की जाए।
बड़ा सवाल: क्या अब सीमांकन भी ‘प्रेशर पॉलिटिक्स’ का औजार बन गया है?
बिलासपुर जैसे शहर में जहां हर इंच जमीन सोने के भाव है, वहां राजस्व विभाग के कुछ अफसरों पर भू-माफियाओं के प्रभाव का आरोप अब आम बात हो चली है।
ऐसे में “सीमांकन” जैसी तकनीकी प्रशासनिक प्रक्रिया को यदि प्रभावशाली वर्गों की सुविधा के अनुसार मोड़ा जाएगा, तो यह न सिर्फ न्यायिक अधिकार का हनन होगा, बल्कि राजस्व तंत्र की विश्वसनीयता पर सीधा प्रहार भी। इस पूरे मसले पर बिलासपुर एसडीएम मनीष साहू ने कहा कि सीमांकन की प्रक्रिया आम है। जूना बिलासपुर में विवाद के संबंध में उन्हें कोई शिकायत नहीं मिली है।



