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“तीन दिन लापता छात्र की लाश सेंट्रल यूनिवर्सिटी बिलासपुर तालाब में — गुमशुदगी पर चुप रहा प्रशासन, अब दबाने की कोशिश के आरोप”

Mohammed Israil
Mohammed Israil  - Editor
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बिलासपुर। मोहम्मद इसराइल बबलू


गुरु घासीदास सेंट्रल यूनिवर्सिटी का सिस्टम सवालों के घेरे में — तीन दिन तक गायब छात्र की रिपोर्ट तक दर्ज नहीं, वार्डन-गार्ड मौन, और अब शव मिलने पर ‘प्रबंधन की सफाई’ भारी पड़ रही है मातम में डूबे परिवार की चीखों पर।

तालाब में मिली खामोशी, जो चीख रही है सवालों में
बिलासपुर के गुरु घासीदास सेंट्रल यूनिवर्सिटी (GGU) के तालाब से 23 अक्टूबर को मिला शव सिर्फ एक छात्र की मौत नहीं, बल्कि उस व्यवस्था का प्रतिबिंब है जो “अकादमिक अनुशासन” के नाम पर संवेदनहीन हो चुकी है।
तीन दिन से लापता बीएससी (फिजिक्स) थर्ड ईयर का छात्र अर्सलान अंसारी, जिसकी गुमशुदगी की भनक तक वार्डन, सुरक्षा अधिकारी और यूनिवर्सिटी प्रबंधन को नहीं लगी। हॉस्टल की हाजिरी रजिस्टर रोज भरते रहे, लेकिन एक छात्र का नाम तीन दिन तक “अनुपस्थित” नहीं दिखा — और अब वही नाम “मृतक” के कॉलम में दर्ज है।
तीन दिन की चुप्पी, एक दिन की अफरा-तफरी
21 अक्टूबर की शाम 5 बजे अर्सलान वीडियो कॉल पर बात करते हुए हॉस्टल से बाहर निकला था। कमरे में पंखा चलता रहा, और वार्डन का दफ्तर बंद।
24 अक्टूबर की सुबह जब तालाब से शव मिला तो यूनिवर्सिटी प्रशासन “पहचान” से पहले “पॉलिश्ड बयान” तैयार करने में जुटा था।
मीडिया सेल प्रभारी डॉ. मनीष श्रीवास्तव ने कहा — “भाई आया है, लेकिन पूरी पुष्टि नहीं कर सका… पिता के आने पर पोस्टमार्टम होगा।”
शव अब भी सिम्स मरच्यूरी में है। और परिसर में सन्नाटा, जो “सुरक्षा” की पोल खोल रहा है।
विद्यार्थी परिषद का आरोप: ‘मामले को दबा रही है यूनिवर्सिटी’
शनिवार को अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) के कार्यकर्ता एसएसपी रजनीश सिंह से मिले। ज्ञापन में कहा गया —
“प्रबंधन जानबूझकर घटना को दबा रहा है। 130 से अधिक सिक्योरिटी गार्ड और तीन-तीन वार्डन होने के बावजूद कोई जवाबदेह नहीं।”
उन्होंने पोस्टमार्टम की वीडियोग्राफी, सीसीटीवी फुटेज की जांच और एसआईटी गठन की मांग की।
उनका कहना था — “यह सिर्फ हादसा नहीं, यह सिस्टम की विफलता है जिसे यूनिवर्सिटी प्रशासन ‘संवेदनशील विषय’ बताकर छिपा रहा है।”
सवालों में डूबा कैंपस, जवाब में डूबे अफसर
चीफ वार्डन डॉ. प्रतिभा मिश्रा, प्रशासनिक वार्डन डॉ. महेश ढपोला और सुरक्षा अधिकारी डॉ. सीमा राय — तीनों के पास सुरक्षा रिपोर्ट है, लेकिन किसी के पास जवाब नहीं कि “एक छात्र हॉस्टल से तालाब तक कैसे गया?”
कुलपति प्रो. आलोक चक्रवाल शहर से बाहर हैं। इस बीच, तालाब से मोबाइल खोजने के लिए एसडीआरएफ टीम बुलाने की तैयारी की जा रही है — जबकि छात्र का मोबाइल आखिरी बार हॉस्टल के बाहर लोकेशन दिखा रहा था।
छोटे भाई की पहचान पर भी असमंजस
भोपाल से पहुंचे छोटे भाई गौहर अयूब ने शव देखकर कहा —
“60 प्रतिशत तक लग रहा है कि वही है… लेकिन पूरी तसल्ली के लिए पिता को बुलाना होगा।”
उसकी हालत देख पुलिस ने सिम्स में काउंसलिंग का इंतज़ाम कराया। शव को फिलहाल मरच्यूरी में रखा गया है।
‘तीन दिन बाद’ की सक्रियता, ‘तीन दिन पहले’ की लापरवाही
कांग्रेस जिला अध्यक्ष विजय केशरवानी ने कहा —
“छात्र रोज अटेंडेंस देता था। उसकी अनुपस्थिति तीन दिन तक नोट नहीं की गई। यह लापरवाही नहीं, अपराध है।”
उन्होंने सीयू प्रबंधन पर मामले को दबाने का आरोप लगाते हुए उच्चस्तरीय जांच की मांग की है।

सीयू कैंपस की हर दीवार पर अब वही सवाल गूंज रहा है —
“अगर यह हादसा नहीं था, तो यह कैसे हुआ?”
क्योंकि तालाब की लहरें अब सिर्फ एक शव नहीं, बल्कि उस “संवेदनहीन अकादमिक सिस्टम” को उजागर कर रही हैं जो हर सवाल के जवाब में चुप है।

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