मोहम्मद इसराइल बबलू
बिलासपुर। शनिवार को नगर निगम और राजस्व विभाग की संयुक्त टीम ने जवाली नाले पर बड़े पैमाने पर कार्रवाई की।
टीम भारी पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंची और सरकारी जमीन पर अवैध निर्माणों पर बुलडोज़र चलाते हुए 40 से अधिक कब्ज़े हटाने का दावा किया।
कार्रवाई के दौरान इलाके में भारी विवाद की स्थिति बनी रही। स्थानीय लोगों ने प्रशासनिक टीम को रोकते हुए कहा कि “हमारे पास 30 साल पुरानी रजिस्ट्री है, जमीन नंबरी है,” लेकिन अधिकारियों ने सीमांकन रिपोर्ट का हवाला देते हुए काम जारी रखा।



शाम तक कई मकान, दुकानें और बाउंड्री वॉल ढहा दी गईं, जिससे पूरे इलाके में हड़कंप मच गया।
सीमांकन रिपोर्ट में 40 से अधिक कब्ज़े उजागर
हाईकोर्ट के निर्देश पर चार आरआई, पांच पटवारी और एक सब इंजीनियर की टीम ने तेलीपारा रोड तक नाले की नापजोख की थी।
रिपोर्ट में यह सामने आया कि करीब 40 मकान, दुकानें और प्लॉट नाले की जमीन पर बने हुए हैं।
कुछ ने 3 से 7 फीट तक, तो कुछ ने 50 फीट तक सरकारी जमीन पर निर्माण कर रखा था।
इसी रिपोर्ट के आधार पर निगम ने शनिवार को नोटिसधारकों के निर्माणों को तोड़ने की कार्रवाई शुरू की।
विरोध और विवाद – “रजिस्ट्री हमारी, कब्ज़ा प्रशासन का बहाना”
कार्रवाई के दौरान प्रभावित लोगों ने जमकर विरोध किया। उनका कहना था कि उनके पास तीन दशक पुरानी रजिस्ट्री और नंबरी जमीन के दस्तावेज़ हैं।
लोगों ने आरोप लगाया कि यह पूरा अभियान “एक बिल्डर को लाभ पहुंचाने के लिए” चलाया जा रहा है, जो पास की चार एकड़ जमीन पर प्रोजेक्ट शुरू करने की तैयारी में है।
क्षेत्र के कई व्यापारियों ने कहा कि सीमांकन की फाइल या रिपोर्ट की कॉपी तक नहीं दी जा रही, बस जगह खाली कराने के लिए दबाव बनाया जा रहा है।
नाले और नजूल की जमीन पर कब्ज़ा





नाले के किनारे नजूल भूमि पर भी कब्ज़े पाए गए हैं।
नगर निगम की टीम ने इससे पहले कमल नागवानी, रेश्मा नागवानी और विक्की थदानी के निर्माणों पर कार्रवाई की थी,
लेकिन प्रकाश आडवाणी, गोपी गंगवानी और अन्य प्रभावशाली लोगों के निर्माणों पर कार्रवाई रोक दी गई।
टीम ने सीमांकन के दौरान 2 से 3 मीटर तक अवैध निर्माणों पर रेड मार्किंग की थी, लेकिन कार्रवाई नहीं की गई।
स्थानीय लोगों ने कहा कि रसूखदारों के निर्माण बच गए हैं, जबकि आम नागरिकों के घर तोड़े जा रहे हैं।
40 करोड़ की डील का जिक्र
क्षेत्र के लोगों का आरोप है कि नाले के बगल की चार एकड़ जमीन 40 करोड़ रुपये में एक बिल्डर को बेची गई है।
इस जगह पर कॉमर्शियल कॉम्प्लेक्स बनाने की तैयारी है, लेकिन वहां की सड़क महज 20 फीट चौड़ी है।
नियम के अनुसार, ले-आउट पास करने के लिए सड़क 40 फीट की होना जरूरी है।
लोगों का कहना है कि इसी कारण नाले किनारे के कब्ज़े हटाकर सड़क चौड़ी करने की कार्रवाई की जा रही है, ताकि बिल्डर का प्रोजेक्ट आगे बढ़ सके।
निगम और पुलिस की संयुक्त कार्रवाई


शनिवार सुबह निगम की अतिक्रमण निवारण टीम भारी पुलिस बल के साथ जब जवाली नाले पहुंची,
तो कई लोगों ने अपनी जमीन को खरीदी हुई बताते हुए विरोध करना शुरू किया।
स्थिति बिगड़ने पर पुलिस को सख्ती दिखानी पड़ी।
निगम अधिकारियों ने सीमांकन रिपोर्ट का हवाला देते हुए चेतावनी दी कि
“सरकारी कार्य में बाधा डालने वालों पर सख्त कार्रवाई होगी।”
इसके बाद टीम ने कई मकानों, दुकानों और बाउंड्री दीवारों को तोड़ना शुरू किया।
प्रशासन का बयान
नगर निगम के भवन अधिकारी अनुपम तिवारी नने कहा कि
“हाईकोर्ट के आदेश पर संयुक्त टीम ने सीमांकन किया था। जिन जगहों पर कब्ज़ा पाया गया है, उन्हें हटाने की कार्रवाई की जा रही है।”
जवाली नाला सीमांकन विवाद
वर्षकार्रवाईमुख्य परिणाम2020सड़क और रेलिंग निर्माणतेलीपारा तक रेलिंग बनी2021-22पहली सीमांकन रिपोर्ट40 से अधिक कब्ज़े चिह्नित2025 (अक्टूबर)कोर्ट आदेश पर दोबारा सीमांकनकब्ज़ों की पुष्टि2025 (शनिवार)निगम की कार्रवाई40 से अधिक अवैध निर्माण ढहे
तनाव का माहौल
कार्रवाई के बाद क्षेत्र में तनाव और विरोध का माहौल है।
कई परिवार अपने मकान टूटने के बाद खुले में बैठे हैं।
निगम की ओर से कार्रवाई जारी रहने की संभावना है, जबकि प्रभावित लोग इसे “एकतरफा और चयनित अभियान” बता रहे हैं।



