
मोहम्मद इसराइल बबलू |बिलासपुर, रा
छत्तीसगढ़ कांग्रेस में इन दिनों “सृजन अभियान” से ज्यादा चर्चा “सोशल मीडिया अभियान” की है।
जिलाध्यक्षों की नियुक्ति को लेकर एआईसीसी दफ्तर तक सूची पहुंच चुकी है, लेकिन उससे पहले ही फेसबुक से लेकर व्हाट्सऐप ग्रुप्स तक जिला अध्यक्षों की “अनौपचारिक घोषणाएं” तेज हो गई हैं।
कहीं “नाम फाइनल” का दावा है, कहीं “दावेदार मजबूत” का, तो कहीं “पेज फंसा हुआ” बताकर उत्सुकता बढ़ाई जा रही है।
राज्यभर के जिलों में राजनीतिक हलचल इतनी तेज है कि सृजन शब्द अब संगठन की प्रक्रिया से ज़्यादा, सत्ता समीकरण की परीक्षा बन गया है। रायपुर शहर — “हरितवाल सबसे आगे”, “मेनन मजबूत”, “दीपक मिश्रा भी रेस में”
राजधानी रायपुर में तीन नामों की सोशल मीडिया पर बाढ़ है — सुबोध हरितवाल, श्रीकुमार मेनन, और दीपक मिश्रा।
कांग्रेस कार्यकर्ताओं के अलग-अलग समूहों ने अपने-अपने पसंदीदा चेहरों को लेकर “संभावित अध्यक्ष” के पोस्टर जारी कर दिए हैं।
दिल्ली से लेकर रायपुर सिटी दफ्तर तक चर्चा यही —
“कौन है असली सृजन का चेहरा?”
रायपुर ग्रामीण — “प्रवीण साहू फाइनल” से लेकर “बंजारे भी रेस में”
रायपुर ग्रामीण में भी माहौल कम गर्म नहीं।
प्रवीण साहू का नाम सोशल मीडिया पर “फाइनल” बताया जा रहा है,
वहीं पप्पू बंजारे और नागभूषण राव के समर्थक भी “अभी कुछ तय नहीं” का दावा कर रहे हैं।
पार्टी दफ्तर के बाहर चर्चा —
“फेसबुक ने फाइनल कर दिया, अब बस आदेश बाकी है!”
दुर्ग — “राकेश ठाकुर तय” पर बवाल, शहर में बाकलीवाल बनाम वर्मा
दुर्ग ग्रामीण में राकेश ठाकुर का नाम लगभग तय बताया जा रहा है, लेकिन आधिकारिक पुष्टि से पहले ही ‘क्लोज फ्रेंड्स’ पोस्ट वायरल हो चुके हैं।
दुर्ग शहर कांग्रेस में धीरज बाकलीवाल और आर.एन. वर्मा के बीच “संगठन सृजन” से ज्यादा “समर्थक सृजन” चल रहा है।
हर पक्ष अपने नेता को “प्रदेश स्तर पर स्वीकार्य चेहरा” साबित करने में जुटा है।
अंबिकापुर — पाठक बनाम शफी, ‘पेज फंसा’ की थ्योरी
अंबिकापुर जिला अध्यक्ष को लेकर सोशल मीडिया पर दो समानांतर लहरें हैं —
एक बालकृष्ण पाठक को “अभियान का चेहरा” बता रही है,
दूसरी शफी अहमद को “मजबूत विकल्प” मान रही है।
बीच में तीसरा वर्ग यह दावा कर रहा है —
“यहाँ तो पेज फंस गया है, फाइनल लिस्ट दिल्ली में अटकी है।”
🔹 बिलासपुर शहर — “शैलेश-महेश दोनों फाइनल”, समर्थक उलझे
बिलासपुर शहर कांग्रेस में सोशल मीडिया पोस्ट देखकर दिल्ली भी उलझ गई है।
कहीं लिखा जा रहा है “शैलेश पांडे फाइनल”, तो कहीं “महेश दुबे ने मात दी”।
दोनों पक्षों के समर्थक एक-दूसरे के स्टेटस को “अधिकारिक सूचना” की तरह साझा कर रहे हैं।
राज्य स्तरीय एक नेता ने मुस्कराते हुए कहा —
“यहाँ संगठन नहीं, घोषणा पहले हो रही है!”
🔹 बिलासपुर ग्रामीण — ‘चार दावेदारों’ में दो आगे
आशीष सिंह, प्रमोद नायक, राजेंद्र साहू, और शिवबालक कौशिक —
चारों नाम एक ही जिले में “संभावित अध्यक्ष” के तौर पर प्रचारित हो रहे हैं।
कुछ पेज “आशीष सिंह को मजबूत” बता रहे हैं,
कुछ “प्रमोद नायक के नाम पर सहमति” का दावा कर रहे हैं।
यानी यहाँ सृजन से ज्यादा “सूचना सृजन” जारी है।
प्रदेश स्तर पर हलचल — दिल्ली में फाइल, सोशल मीडिया में फैसला
पार्टी सूत्रों के मुताबिक, एआईसीसी दफ्तर दिल्ली में सूची अंतिम दौर में है,
पर सोशल मीडिया पर “स्वघोषित फाइनल लिस्ट” ने पहले ही माहौल बना दिया है।
कुछ जिलों में समर्थकों ने ‘बधाई संदेश’ तक लिख दिए हैं।
वहीं कुछ पुराने कार्यकर्ता चुटकी लेते हैं —
“दिल्ली से पहले रायपुर की वॉल तय कर रही है नेतृत्व।”
सृजन या सोशल मीडिया रणनीति?
कांग्रेस का “सृजन अभियान” अब राजनीतिक प्रतीक बन गया है।
पार्टी का उद्देश्य संगठन को नए जोश, युवा नेतृत्व और नई दिशा देना है,
पर इस सृजन की जमीनी तस्वीर सोशल मीडिया के ‘कमेंट बॉक्स’ में दिख रही है।
हर जिले में अपने-अपने “एडमिन” अब “अनौपचारिक प्रवक्ता” बन चुके हैं।
भीतरखाने की चर्चा
पार्टी के जानकार मानते हैं कि यह हलचल कांग्रेस के लिए सकारात्मक संकेत भी है —
“कम से कम संगठन को लेकर चर्चा तो हो रही है,
पहले उदासीनता थी, अब उत्सुकता है।”
लेकिन वहीं दूसरे धड़े का तर्क —
“अगर हर जिले में चार-चार फाइनल लिस्ट होंगी,
तो असली सृजन दिल्ली से नहीं, सोशल मीडिया से होगा।”
छत्तीसगढ़ कांग्रेस में सृजन की घोषणा तो दिल्ली करेगी,
लेकिन सृजन की चर्चा सोशल मीडिया पहले ही कर चुका है।
कहीं नाम तय बताकर बधाई दी जा रही है,
तो कहीं “पेज फंसा” कहकर सस्पेंस को ज़िंदा रखा जा रहा है।
असली सवाल यह नहीं कि कौन बनेगा जिलाध्यक्ष,
बल्कि यह कि कौन पहले खुद को घोषित कर देता है।



