00 छत्तीसगढ़ के बिलासपुर स्थित सरकंडा थाने का मामला
00 कनिष्ठ अधिकारी व कर्मचारी संघ ने ने कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक को सौंपा ज्ञापन, निष्पक्ष जांच और कार्रवाई की मांग
बिलासपुर। छत्तीसगढ़ के बिलासपुर स्थित सरकंडा थाना क्षेत्र में नायब तहसीलदार व कार्यपालिक मजिस्ट्रेट के साथ कथित मारपीट व दुर्व्यवहार के मामले म ने तूल पकड़ लिया है। इससे नाराज कनिष्ठ अधिकारी व कर्मचारी संघ ने सरकंडा थानेदार वह स्टाफ के खिलाफ मंगलवार को मोर्चा खोल दिया । संघ के पदाधिकारी व सदस्यों ने कलेक्टर व पुलिस के अधिकारियों से मुलाकात कर पूरे मामले की निष्पक्ष जांच करते हुए दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने की मांग की है।
क्या है पूरा मामला
बस्तर जिले के करपावंड तहसील में कार्यरत कार्यपालिक मजिस्ट्रेट पुष्पराज मिश्रा का आरोप है कि वे बिलासपुर-हावड़ा एक्सप्रेस ट्रेन से अपने निवास स्थान लौट रहे थे। 17 नवंबर की रात करीब 1:35 बजे, वह अपने पिता और भाई के साथ श्रीराम चौक के पास पहुंचे। वहाँ डीएलएस कॉलेज के समीप मौजूद दो पुलिसकर्मियों ने उन्हें रुकने का इशारा किया। अंधेरा होने के कारण तुरंत रुकने में थोड़ी देरी हुई, जिसके बाद पुलिसकर्मियों ने गालियां दीं और अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल किया।पीड़ित का कहना है कि पुलिसकर्मी नशे में थे और उनसे दुर्व्यवहार करने लगे। जब पीड़ित ने खुद को सरकारी कर्मचारी बताया, तो पुलिसकर्मियों ने 112 पेट्रोलिंग वाहन को बुलाया। इसके बाद, उन्हें जबरन गाड़ी में बैठाया गया और गाली-गलौज करते हुए शारीरिक रूप से प्रताड़ित किया गया।
पुलिस पर यह आरोप भी
पुलिसकर्मियों ने पीड़ित पर शराब के नशे में होने का आरोप लगाया। इसके लिए एक अल्कोहल मीटर का उपयोग किया गया, जिसमें पहले पुलिसकर्मियों ने स्वयं फूंक मारी और फिर पीड़ित को ऐसा करने को मजबूर किया। इसके बाद, बिना किसी मेडिकल रिपोर्ट के पीड़ित को झूठे मामले में फंसाने की धमकी दी गई।पीड़ित ने यह भी आरोप लगाया कि पुलिस ने उनके मोबाइल फोन छीन लिए और उनके भाई द्वारा बनाए गए वीडियो और अन्य सबूत डिलीट कर दिए। पीड़ित के पिता और भाई ने बार-बार घटना का विरोध किया, लेकिन उनकी बातों को नजरअंदाज करते हुए पुलिसकर्मियों ने उन्हें भी धमकी दी।
परिवार पर मानसिक दबाव
घटना के दौरान, पीड़ित और उनके परिवार को अपमानजनक गालियां दी गईं और उन्हें शारीरिक तथा मानसिक रूप से प्रताड़ित किया गया। पीड़ित का कहना है कि इस घटना ने उनके परिवार को गहराई से आहत किया है और वे डरे-सहमे हुए हैं।
न्याय की मांग
पीड़ित ने पुलिस अधीक्षक, मानवाधिकार आयोग, और उच्च अधिकारियों से मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है। उन्होंने दोषी पुलिसकर्मियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की अपील की है। पीड़ित का कहना है कि वह एक ईमानदार सरकारी कर्मचारी हैं और इस तरह की घटनाएं न केवल उनके सम्मान को ठेस पहुंचाती हैं, बल्कि समाज में पुलिस व्यवस्था पर भी सवाल खड़े करती हैं।यह घटना पुलिस की कार्यशैली और नागरिकों के साथ उनके व्यवहार पर गंभीर प्रश्न खड़ा करती है। यदि इस मामले की निष्पक्ष जांच नहीं की गई, तो यह नागरिक अधिकारों के हनन का उदाहरण बन सकता है। संबंधित अधिकारियों से उम्मीद की जा रही है कि वे दोषियों को दंडित कर न्याय सुनिश्चित करेंगे।इस घटना ने एक बार फिर से पुलिस और जनता के बीच विश्वास बहाली की आवश्यकता को रेखांकित किया है।
संघ ने दी आंदोलन की चेतावनी
संघ ने चेतावनी दी है कि अगर मामले में जल्द कार्रवाई नहीं हुई, तो वे व्यापक विरोध प्रदर्शन करेंगे। उनका कहना है कि ऐसे मामलों से प्रशासनिक सेवाओं में काम करने वाले अधिकारियों का मनोबल गिरता है और जनता में प्रशासनिक व्यवस्था के प्रति विश्वास कम होता है।
मुख्यमंत्री और गृह मंत्री से भी की गई अपील
संघ ने मुख्यमंत्री और गृह मंत्री से भी अपील की है कि मामले की निष्पक्ष जांच सुनिश्चित की जाए। संघ का कहना है कि यदि प्रशासनिक अधिकारियों के साथ ऐसा दुर्व्यवहार हो सकता है, तो यह आम जनता के लिए भी चिंता का विषय है।इस ज्ञापन के बाद अब प्रशासन पर दबाव बढ़ गया है। देखना होगा कि मामले में आगे क्या कार्रवाई होती है।



