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बिलासपुर में फर्जी गरीब और राशन कार्डधारियों की खुलेगी पोल

Mohammed Israil
Mohammed Israil  - Editor
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Mohammed israil


7 हजार से ज्यादा कार्ड संदिग्ध, पटवारियों पर कार्रवाई की चेतावनी

बिलासपुर, 26 सितंबर।
जिले में राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम के तहत चल रही जांच ने बड़ा फर्जीवाड़ा उजागर किया है। हजारों ऐसे परिवार सामने आए हैं, जो अमीर होते हुए भी खुद को गरीब बताकर सरकारी राशन और योजनाओं का लाभ हड़प रहे थे। प्रारंभिक जांच में 7058 कार्डधारियों के नाम संदिग्ध पाए गए हैं। इन परिवारों के पास पाँच एकड़ से ज्यादा कृषि भूमि होने की संभावना जताई गई है।

कलेक्टर संजय अग्रवाल ने सख्त रुख अपनाते हुए साफ कहा —
👉 “सच्चे गरीबों को योजनाओं से वंचित नहीं होने दिया जाएगा। लेकिन जो अपात्र हैं और फर्जीवाड़ा कर रहे हैं, उनके खिलाफ कार्रवाई तय है। इस काम में कोताही बरतने वाले पटवारियों पर भी कठोर दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।”

फर्जी गरीबों की भीड़

प्रशासन का मानना है कि जांच आगे बढ़ने पर फर्जी कार्डों की संख्या और भी बढ़ सकती है। यानी जिले में “अमीरों के बीच छिपे गरीब” अब बेनकाब होने वाले हैं।

असली गरीबों का हक मारा गया

राशन दुकानों पर भीड़ बढ़ने और पात्र परिवारों का नाम कट जाने की वजह यही फर्जीवाड़ा माना जा रहा है। कई गांवों से शिकायतें आ रही थीं कि “सचमुच गरीब परिवारों को अनाज नहीं मिल पा रहा, जबकि बड़े जमीन मालिक आसानी से कार्ड बनवाकर अनाज ले रहे हैं।”


1 : अब तक की जांच

  • 7058 कार्ड संदिग्ध पाए गए
  • सभी के नामों की जमीन का सत्यापन जारी
  • जांच पटवारी और तहसील स्तर पर

बॉक्स-2 : कलेक्टर का बयान

“अपात्रों को तुरंत बाहर किया जाएगा।
सत्यापन में गड़बड़ी करने वाले पटवारियों पर
सख्त विभागीय कार्रवाई होगी।”

संजय अग्रवाल, कलेक्टर बिलासपुर


-3 : क्यों जरूरी है सख्ती

  • असली गरीब परिवार योजनाओं से वंचित
  • खाद्य वितरण प्रणाली अव्यवस्थित
  • अपात्र परिवारों से सरकारी राजस्व पर बोझ

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