00 डीन और एमएस की मेहनत लाने लगी रंग


बिलासपुर। छत्तीसगढ़ इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज़ (CIMS), बिलासपुर के बायोकैमिस्ट्री विभाग द्वारा सिकल सेल रोग की पहचान, परामर्श और उपचार के क्षेत्र में निरंतर उल्लेखनीय कार्य किया जा रहा है। विभाग ने अब तक 1200 से अधिक होमोजाइगस (सिकल सेल रोग से पीड़ित) मरीजों का पंजीकरण किया है, जिनमें से सभी को नियमित रूप से नि:शुल्क दवाइयां वितरित की जा रही हैं। विभाग प्रतिदिन लगभग 40 मरीजों की स्क्रीनिंग एवं प्रति सप्ताह लगभग 50 मरीजों का एचपीएलसी रक्त परीक्षण करता है। पिछले वर्ष विभाग ने कुल 12421 स्क्रीनिंग परिक्षण एवं कुल 886 एचपीएलसी परीक्षण किये।
नवजात शिशुओं में जेनेटिक परीक्षण के माध्यम से सिकल सेल जांच की सुविधा वर्तमान में केवल सिम्स चिकित्सा महाविद्यालय में ही उपलब्ध है।
बायोकैमिस्ट्री विभाग द्वारा न केवल नियमित सामाजिक एवं जेनेटिक काउंसलिंग की जा रही है, बल्कि समय-समय पर सिकल सेल जागरूकता व परीक्षण शिविरों का भी आयोजन किया जा रहा है, जिससे दूर-दराज़ के ग्रामीण क्षेत्रों में भी इस गंभीर बीमारी की पहचान एवं उपचार संभव हो रहा है।
जेनेटिक काउंसलिंग:
सिकल सेल रोगियों एवं उनके परिवारजनों को जेनेटिक काउंसलिंग के माध्यम से यह बताया जाता है कि यह बीमारी अनुवांशिक है, विवाह पूर्व जांच से रोग के प्रसार को कैसे रोका जा सकता है तथा आगामी पीढ़ी में इसके प्रभाव को न्यूनतम करने के उपाय क्या हैं।
सामाजिक काउंसलिंग:
सामाजिक काउंसलिंग सत्रों में मरीजों को रोग से जुड़े सामाजिक स्थिति को दूर करने, उचित खानपान, जीवनशैली सुधार, रोग के लक्षणों की पहचान तथा समय पर इलाज के लिए प्रेरित किया जाता है, ताकि उनका आत्मविश्वास बढ़े और समाज में उनका समुचित पुनर्वास हो सके।
सिम्स का बायोकैमिस्ट्री विभाग सीसीएमबी हैदराबाद के साथ किए गए समझौता ज्ञापन (MoU) के तहत संयुक्त रूप से सिकल सेल रोगियों के लिए एचपीएलसी आधारित जांच सुविधा भी प्रदान कर रहा है। इसके अतिरिक्त, विभाग CRISPR (क्रिस्पर) प्रोजेक्ट में भी भाग ले रहा है, जो भविष्य में सिकल सेल रोग के जीन-स्तरीय स्थायी उपचार की दिशा में एक क्रांतिकारी पहल साबित हो सकती है।
सिम्स के डीन डॉ. रमणेश मूर्ति ने कहा “बायोकैमिस्ट्री विभाग द्वारा सिकल सेल रोग को लेकर जो सेवाएं दी जा रही हैं, वह न केवल चिकित्सा क्षेत्र में उत्कृष्टता की मिसाल हैं, बल्कि यह विभाग जनकल्याण के क्षेत्र में भी एक प्रेरक उदाहरण प्रस्तुत कर रहा है। नि:शुल्क दवाएं, शिविर, जेनेटिक परामर्श और शोध आधारित सेवाएं विभाग को प्रदेशभर में अग्रणी बनाती हैं।”
सिम्स अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. लखन सिंह ने बताया कि “सिम्स अस्पताल में सिकल सेल रोगियों के लिए परामर्श, जांच, दवा वितरण और इमरजेंसी इलाज की सभी सुविधाएं उपलब्ध हैं। अस्पताल का प्रयास है कि सिकल सेल रोग से पीड़ित हर मरीज को समय पर समुचित देखभाल और चिकित्सकीय सहयोग मिले।”
डॉ. प्रशांत निगम, विभागाध्यक्ष बायोकैमिस्ट्री ने विभाग का रुख स्पष्ट करते हुए कहा कि “हमारा लक्ष्य न केवल सिकल सेल रोग की पहचान और प्रबंधन करना है, बल्कि इसका दीर्घकालिक समाधान तलाशना है। हमारा विभाग शोध, जागरूकता, परामर्श और जनसहयोग के समन्वय से इस बीमारी को जड़ से खत्म करने की दिशा में लगातार प्रयासरत है। CRISPR (क्रिस्पर) जैसे जेनेटिक प्रोजेक्ट्स में हमारी सहभागिता, इस विज़न की दिशा में एक मजबूत कदम है।”
बायोकैमिस्ट्री विभाग, सिम्स का यह कार्य स्वास्थ्य सेवा के क्षेत्र में एक आदर्श मिसाल बनता जा रहा है और आने वाले समय में यह छत्तीसगढ़ को सिकल सेल मुक्त राज्य बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।



