


00 बिलासपुर जिले में लगातार की जा रही कार्रवाई
बिलासपुर। छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिले में कलेक्टर संजय अग्रवाल और आबकारी विभाग के प्रभारिक सहायक आयुक्त नवनीत तिवारी के मार्गदर्शन में आबकारी विभाग ने राजस्व वृद्धि के एक नए कीर्तिमान को छुआ है। पिछले वित्तीय वर्ष में 50.21 करोड़ रुपये की शराब बिक्री दर्ज करने के बाद, इस वर्ष यह आंकड़ा 71.40 करोड़ रुपये तक पहुंच गया। यह 42 प्रतिशत की अभूतपूर्व वृद्धि को दर्शाता है, जो 21.19 करोड़ रुपये के इजाफे के रूप में सामने आई है।
यह उपलब्धि केवल संख्याओं का खेल नहीं है, बल्कि यह आबकारी विभाग की रणनीतिक योजनाओं और लगातार अभियान चलाने का परिणाम है। विभाग ने अवैध शराब के निर्माण, बिक्री और वितरण पर लगाम लगाने के लिए सक्रियता दिखाई है, जिसके सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं।
अवैध शराब पर सख्त कार्रवाई
बिलासपुर जिले में अवैध शराब, विशेष रूप से महुआ शराब के निर्माण और वितरण को रोकने के लिए आबकारी विभाग ने नियमित रूप से अभियान चलाए। इन अभियानों के तहत बड़ी मात्रा में अवैध शराब जब्त की गई और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की गई।
महुआ शराब, जो स्थानीय स्तर पर तैयार की जाती है, स्वास्थ्य के लिए खतरनाक साबित हो सकती है। इस पर लगाम लगाने के लिए विभाग ने गांव-गांव जाकर जनजागरूकता फैलाने के साथ-साथ कानून प्रवर्तन में भी तेजी लाई है। न केवल स्थानीय बल्कि बाहरी राज्यों से आने वाली अवैध शराब पर भी रोकथाम के प्रयास किए गए।
सीमा चौकियों पर कड़ी निगरानी
छत्तीसगढ़ की सीमा से लगे राज्यों से अवैध शराब की तस्करी को रोकने के लिए आबकारी विभाग ने विशेष चौकियों की स्थापना की। इन चौकियों पर तैनात टीमों ने लगातार निगरानी रखते हुए तस्करी के कई प्रयासों को नाकाम किया।
विशेष रूप से मध्य प्रदेश (एमपी) से शराब लाकर छत्तीसगढ़ में खपाने की कोशिशों को विफल किया गया। विभाग ने इन मामलों में सख्त कदम उठाते हुए तस्करों पर नकेल कसने का काम किया।
सरकारी शराब दुकानों की बिक्री में इजाफा
आबकारी विभाग ने अपनी सफलता का श्रेय न केवल सख्त कानून लागू करने को दिया है, बल्कि समुदाय के सहयोग और जागरूकता अभियानों को भी प्रमुख कारक माना है। ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में जागरूकता कार्यक्रमों के जरिए लोगों को अवैध शराब के खतरों के बारे में बताया गया। इसके साथ ही वैध और लाइसेंसशुदा दुकानों के माध्यम से शराब की खरीद को बढ़ावा दिया गया।
कैसे मिली सफलता
- अवैध शराब पर कठोर कार्रवाई: विभाग द्वारा नियमित छापेमारी और कार्रवाई ने अवैध गतिविधियों को सीमित किया।
- सीमा पर सख्त चौकसी: राज्य की सीमाओं पर तस्करी रोकने के लिए विशेष अभियान चलाए गए।
- सामुदायिक सहभागिता: जनजागरूकता अभियानों से लोगों को वैध तरीके से शराब खरीदने के लिए प्रोत्साहित किया गया।
- कुशल प्रबंधन: विभाग की योजनाओं और अभियान संचालन में प्रभावी प्रबंधन और समन्वय देखा गया।
राजस्व वृद्धि के फायदे
राजस्व में 42% की वृद्धि न केवल आर्थिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि यह यह भी दर्शाता है कि सरकारी नीतियों और सख्त कार्रवाई का सीधा प्रभाव कैसे पड़ता है। इस राशि का उपयोग जिले की विभिन्न विकास योजनाओं और जनकल्याण कार्यक्रमों में किया जा सकता है।
आबकारी विभाग की यह सफलता अन्य जिलों और राज्यों के लिए एक प्रेरणा है। अवैध शराब पर लगाम लगाने के साथ-साथ वैध कारोबार को बढ़ावा देने के प्रयास यदि इसी तरह जारी रहे, तो आने वाले समय में और भी बेहतर परिणाम देखने को मिलेंगे।
आगे की योजना
विभाग ने घोषणा की है कि भविष्य में भी अवैध शराब के खिलाफ सख्ती जारी रहेगी। इसके साथ ही, शराब की गुणवत्ता और वैध बिक्री को बढ़ावा देने के लिए नई रणनीतियों पर काम किया जा रहा है।
बिलासपुर जिले की यह उपलब्धि यह दर्शाती है कि जब प्रशासन और समुदाय मिलकर काम करते हैं, तो हर चुनौती को पार किया जा सकता है।




