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बिलासपुर : कफन वाली अम्मा कृष्णा बाई यादव ने दुनिया को कहा अलविदा

Mohammed Israil
Mohammed Israil  - Editor
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बिलासपुर: समाजसेवा की मिसाल पेश करने वाली “कफन वाली अम्मा” कृष्णा बाई यादव का आज 8 मार्च की शाम निधन हो गया। 85 वर्ष की आयु में उनका निधन हुआ। लंबे समय से बीमार चल रही कृष्णा बाई यादव का निधन उनके निवास स्थान पर हुआ, जिसके बाद शहरवासियों में शोक की लहर दौड़ गई।

कृष्णा बाई यादव, जिन्हें “कफन वाली अम्मा” के नाम से जाना जाता है, ने पिछले 40 वर्षों में समाज सेवा की एक अद्भुत मिसाल पेश की। उन्होंने सिम्स अस्पताल में आने वाली लावारिस लाशों के लिए कफन की व्यवस्था की और किसी भी लावारिस शव को बिना कफन के नहीं छोड़ा। यह कार्य उन्होंने बिना किसी स्वार्थ के, समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारी और मानवता की भावना से किया। उनके इस योगदान को कभी भुलाया नहीं जा सकता, और वे हमेशा शहरवासियों के दिलों में जीवित रहेंगी।

कृष्णा बाई यादव ने अपना पूरा जीवन समाज सेवा में समर्पित किया। वे हमेशा दूसरों के दुख-दर्द को महसूस करती थीं और बिना किसी प्रचार के दूसरों की मदद करती थीं। उन्होंने यह सुनिश्चित किया कि गरीब और लावारिस शवों को सम्मान के साथ अंतिम संस्कार मिल सके, जो एक बड़ा सामाजिक कार्य था।

लंबे समय से बीमार चल रही कफन वाली अम्मा की सेवा की भावना और उनका समर्पण उन्हें हमेशा लोगों के बीच एक प्रेरणा के रूप में याद रहेगा। उनके निधन से बिलासपुर ने एक महान मानवता की सेवा करने वाली शख्सियत को खो दिया है।

कृष्णा बाई यादव का निधन न केवल उनके परिवार के लिए, बल्कि पूरे शहर के लिए एक अपूरणीय क्षति है। उनके द्वारा किए गए महान कार्यों को हमेशा याद किया जाएगा, और उनके योगदान को आगे बढ़ाने की प्रेरणा मिलती रहेगी।

सभी शहरवासी और समाज सेवा से जुड़ी संस्थाएँ कफन वाली अम्मा के योगदान को सलाम करती हैं और उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करती हैं।

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