बिलासपुर। ज़िला कांग्रेस कमेटी ( शहर/ग्रामीण ) द्वारा 30 जनवरी को गांधी चौक में महात्मा गांधी की पुण्यतिथि मनाई ,उनके आदमकद प्रतिमा पर माल्यार्पण कर श्रध्दांजलि दी गई।
शहर अध्यक्ष विजय पांडेय ने कहा कि गांधी जी से पहले स्वतन्त्रता आंदोलन बिखरा सा था, जिन्हें गांधी जी ने वैचारिक एकता , सिद्धांत और लक्ष्य निर्धारित कर एक सूत्र में पिरोया ,गांधी जी ने आंदोलन को व्यापक बनाने के लिए समाज के अंतिम व्यक्ति को जोड़ा और पद यात्रा की,उनसे मिले ,संवाद की और सभी वर्गों के लिए कार्यक्रम बनाया गया ,चरखा चला कर आत्मनिर्भर का संदेश दिया ,सत्य -अहिंसा को अपना अमोघ अस्त्र बनाकर आगे बढ़े,गांधी जी ने तीन बड़े बड़े आंदोलन किया असहयोग आंदोलन, नमक आंदोलन और भारत छोड़ो आंदोलन और कई वर्ष जेल में रहे, अंततः अंग्रेज विवश हुए और 15 अगस्त 1947 को देश आज़ाद हुआ,
फिर भी एक देश के अंदर 1925 से एक ऐसा विचार धारा चल रही थी ,जो आवरण से देश भक्त बने थे पर वास्तविकता में अंग्रेजो के भारतीय जासूस थे,जो भोली भाली जनता को गुमराह करते थे , अंग्रेजी सेना में युवाओ को भर्ती होने के लिए प्रोत्साहित करते और अंग्रेजो से मोटी रकम लेते ,
नही तो देश 1942 में ही आज़ाद हो जाता,
देश के आज़ाद होने से हतोसहित ये लोग जश्न की जगह तिरंगा को जलाया,पैरो तले कुचले इससे भी उनका दिल नही भरा तो 30 जनवरी 1948 को महात्मा गांधी जी की हत्या कर दी गई, महात्मा गांधी ने अंतिम शब्द ” हे राम ” कह कर चिर निद्रा में सो गए,तब से देश के अंदर दो विचार धारा चली आ रही है एक गांधी जी के विचार सत्य -अहिंसा पर चलने वाले और दूसरे गांधी जी के विरोधी विचार ।
संयोजक ज़फ़र अली ,हरीश तिवारी ने कहा कि पोरबन्दर रियासत के दीवान कमरचन्द गांधी के घर 2 अक्टूबर 1869 को गांधी जी जन्म हुआ, बैरिस्टर की पढ़ाई की,पर वकालत की जगह गरीब जनता के लिये राजकोट की न्यायालय में अर्जी लिखा करते थे ,एक केस के सिलसिले में दक्षिण अफ्रीका जाना पड़ा और वही से गांधी जी का व्यक्तित्व और कृतित्व का प्रसार हुआ ,1914 को गांधीजी का भारत आगमन हुआ,पूरा देश उनके विचारों से और आंदोलन से प्रभावित था फिर आज़ादी की लड़ाई में गांधी युग का प्रारम्भ हुआ और उनके नेतृत्व में देश आजाद हुआ ,
कार्यक्रम में शहर अध्यक्ष विजय पांडेय, महापौर प्रत्याशी प्रमोद नायक, संयोजक ज़फ़र अली, हरीश तिवारी, माधव ओत्तालवार,विनोद शर्मा,अभय नारायण राय,बद्री जायसवाल,शिवा मिश्रा ,ऋषि पांडेय, शहज़ादी कुरैशी,स्वर्णा शुक्ला, प्रियंका यादव,अन्नपूर्णा ध्रुव,शैलेन्द्र जायसवाल,वसीम बख्स,राजेश शर्मा,सत्येंद्र तिवारी,महेश दुबे,गौरव एरी,बंटी गुप्ता,सुभाष ठाकुर,सूर्या कश्यप,पवन सोनी,चन्द्रहास केशरवानी,संतोष ताम्रकार,राकेश तिवारी,कुंती यूके,विमल सोनी,मोती ठारवानी,मनोज शर्मा,अरविंद शुक्ला,रमाकांत सोनी,रमेश तिवारी,पिंकी बतरा,बद्री यादव,काजू महाराज,बाबा शहज़ादा,राजू यादव,प्रशान्त पांडेय,विजय दुबे,आदि उपस्थित थे।



