



00 अमर, धरम, धरमजीत या सुशांत की निकलेगी लॉटरी
00 छत्तीसगढ़: मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के मंत्रिमंडल विस्तार की तैयारी, नए चेहरों और वरिष्ठ नेताओं के बीच प्रतिस्पर्धा तेज
बिलासपुर। छत्तीसगढ़ में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार के मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर एक बार चर्चा फिर तेज हो गई है। एक साल पुरानी इस सरकार के मंत्रिमंडल का यह पहला विस्तार होगा, जिससे न केवल राज्य की राजनीति में नई दिशा तय होगी, बल्कि पार्टी के आंतरिक समीकरण भी प्रभावित होंगे।
दिल्ली से लेकर रायपुर तक चर्चाओं का दौर जारी है कि नए मंत्रिमंडल में किसे शामिल किया जाएगा और कौन मंत्री बनने की दौड़ में आगे है। प्रदेश के प्रमुख जिले बिलासपुर का कद विष्णु मंत्रिमंडल में बढ़ेगा या फिर कोई खास परिवर्तन नहीं होगा, इसकी भी अटकलें लगाई जा रही हैं। वर्तमान में लोरमी के विधायक अरुण साव उपमुख्यमंत्री के साथ कई प्रमुख विभागों को संभाल रहे हैं। मंत्रिमंडल के विस्तार में पूर्व मंत्री अमर अग्रवाल, पूर्व विधानसभा अध्यक्ष धरमलाल कौशिक, पूर्व विधानसभा उपाध्यक्ष धर्मजीत सिंह और युवा और तेजतर्रार विधायक सुशांत शुक्ला मैं से किसी एक को स्थान मिलने की उम्मीद जताई जा रही है। मालूम हो कि अविभाजित मध्य प्रदेश के समय में बिलासपुर जिले से कांग्रेस के शासनकाल में चार चार मंत्री हुआ करते थे।
मंत्रिमंडल विस्तार की संभावनाएं
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने सोमवार रात दिल्ली में भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा और अन्य वरिष्ठ नेताओं से मुलाकात की। यह बैठक मंत्रिमंडल विस्तार की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
संभावित संख्या: छत्तीसगढ़ में 14 मंत्रियों की अधिकतम सीमा है। वर्तमान में कुछ पद खाली हैं, और विस्तार में तीन नए मंत्रियों को शामिल किए जाने की संभावना है।
हरियाणा फार्मूला: चर्चा है कि हरियाणा की तरह छत्तीसगढ़ में भी 90 सीटों की विधानसभा के आधार पर तीन मंत्री बनाए जा सकते हैं।
मंत्री पद के दावेदारों में बढ़ी बेचैनी
राज्य की राजनीति में कई चेहरे मंत्री बनने की दौड़ में हैं। इनमें वरिष्ठ नेता और पहली बार विधायक बने कुछ युवा नेता भी शामिल हैं।
क्षेत्रीय संतुलन और संभावित दावेदार:
1. रायपुर से:
सुनील सोनी: हाल ही में रायपुर दक्षिण उपचुनाव से विजेता। भाजपा के सक्रिय कार्यकर्ता और युवा चेहरा।
2. बस्तर से:
किरण देव: प्रदेश भाजपा अध्यक्ष। क्षेत्रीय संतुलन बनाए रखने के लिए उनका नाम प्रमुखता से चर्चा में है।
3. दुर्ग से:
गजेंद्र यादव: पहली बार विधायक और संघ परिवार से जुड़े नेता।
वरिष्ठ विधायकों में प्रबल दावेदार:
धरमलाल कौशिक: भाजपा के वरिष्ठ नेता, पूर्व विधानसभा अध्यक्ष और नेता प्रतिपक्ष। उन्हें अब तक मंत्री पद नहीं मिला है, और उनकी दावेदारी मजबूत मानी जा रही है।
अमर अग्रवाल, अजय चंद्राकर और राजेश मूणत: ये तीनों नेता रमन सरकार में मंत्री रहे हैं और मंत्री बनने की दौड़ में शामिल हैं।
क्या नए चेहरों को मिलेगा मौका?
साय सरकार के मंत्रिमंडल में पहले से ही कई नए चेहरे हैं। यदि इस बार भी नए विधायकों को मौका दिया गया, तो वरिष्ठ नेताओं की नाराजगी बढ़ सकती है।
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मंत्रिमंडल विस्तार के पीछे भाजपा की रणनीति
भाजपा नेतृत्व इस मंत्रिमंडल विस्तार के जरिए राज्य में पार्टी की पकड़ मजबूत करने की रणनीति बना रहा है।
क्षेत्रीय और जातिगत संतुलन: मंत्रिमंडल में रायपुर, बस्तर और दुर्ग से एक-एक मंत्री शामिल किए जाने की संभावना है।
2024 लोकसभा चुनाव की तैयारी: नए चेहरों को मौका देकर पार्टी युवा और नए मतदाताओं को साधने की कोशिश कर सकती है।
आंतरिक संतुलन: वरिष्ठ नेताओं को मंत्रिमंडल में शामिल कर पार्टी के भीतर असंतोष को कम करने का प्रयास किया जा सकता है।
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छत्तीसगढ़ में मंत्रिमंडल का विस्तार कैसे होता है?
मंत्रिमंडल गठन की प्रक्रिया:
छत्तीसगढ़ में विधानसभा की 90 सीटों के आधार पर अधिकतम 14 मंत्री बनाए जा सकते हैं।
मुख्यमंत्री, राज्यपाल और केंद्रीय नेतृत्व की सहमति से मंत्रियों का चयन होता है।
क्या होगा
1. क्षेत्रीय संतुलन: विभिन्न क्षेत्रों से मंत्रियों का चयन।
2. जातिगत समीकरण: अनुसूचित जाति, जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्ग का प्रतिनिधित्व।
3. राजनीतिक अनुभव: वरिष्ठ नेताओं और नए चेहरों का सामंजस्य।
हरियाणा फार्मूला क्या है?
हरियाणा में भी 90 सीटों की विधानसभा है, जहां तीन मंत्रियों का फार्मूला अपनाया गया। छत्तीसगढ़ में भी इसी आधार पर तीन नए मंत्री बनाए जा सकते हैं।
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राजनीतिक समीकरण और चुनौतियां
भाजपा नेतृत्व के सामने यह चुनौती है कि वह नए और पुराने नेताओं के बीच संतुलन बनाए।
रमन सरकार में मंत्री रहे वरिष्ठ नेताओं की महत्वाकांक्षा और साय सरकार के नए चेहरों के बीच चयन करना आसान नहीं होगा।
क्या अप्रत्याशित फैसले होंगे?
भाजपा नेतृत्व की रणनीति अक्सर अप्रत्याशित रही है। ऐसे में यह संभव है कि मंत्रिमंडल विस्तार में कुछ चौंकाने वाले नाम सामने आएं।छत्तीसगढ़ में मंत्रिमंडल विस्तार राज्य की राजनीति को नई दिशा देने वाला कदम साबित हो सकता है। भाजपा नेतृत्व का यह फैसला आगामी लोकसभा चुनाव के मद्देनजर राज्य में पार्टी की स्थिति को मजबूत करने का संकेत है। मंत्रिमंडल में नए चेहरों और वरिष्ठ नेताओं के बीच संतुलन साधना पार्टी के लिए एक चुनौती और अवसर दोनों है।



