






लिंगियाडीह में महिलाओं ने काली पट्टी बांधकर जताया विरोध, रेडक्रॉस दवा दुकान के उद्घाटन में विधायक, महापौर और अधिकारी रहे मौजूद; आमंत्रण पत्र से पार्षद का नाम गायब होने पर कांग्रेस ने प्रशासन को घेरा
बिलासपुर। लिंगियाडीह में अपना आशियाना बचाने के लिए महिलाएं पिछले 347 दिनों से आंदोलन कर रही हैं, लेकिन उनकी समस्या का समाधान अब तक नहीं निकल पाया है। इस बीच बुधवार को उसी चौक पर रेडक्रॉस सोसायटी की दवा दुकान का उद्घाटन समारोह आयोजित किया गया। कार्यक्रम में बेलतरा विधायक सुशांत शुक्ला, महापौर श्रीमती पूजा विधानी और जिला प्रशासन के अधिकारी मौजूद रहे, लेकिन जिस वार्ड में यह आयोजन हुआ, वहां के निर्वाचित पार्षद दिलीप पाटिल को न तो अतिथि बनाया गया और न ही आमंत्रण पत्र में उनका नाम शामिल किया गया। इसे लेकर अब वार्ड में नाराजगी बढ़ गई है। बुधवार को वार्डवासियों ने काली पट्टी बांधकर विरोध जताया।
पार्षद बोले- मेरे ही वार्ड में कार्यक्रम, लेकिन मुझे ही भुला दिया
पार्षद दिलीप पाटिल ने मीडिया से चर्चा करते हुए कहा कि रेडक्रॉस दवा दुकान के उद्घाटन समारोह में उन्हें आमंत्रित नहीं किया गया। यहां तक कि कार्यक्रम के आमंत्रण पत्र में भी उनका नाम नहीं था। उन्होंने सवाल उठाया कि जिस वार्ड की जनता ने उन्हें चुनकर अपना प्रतिनिधि बनाया है, उसी वार्ड में सरकारी कार्यक्रम आयोजित होने पर उन्हें पूरी तरह नजरअंदाज क्यों किया गया? पाटिल ने कहा कि भाजपा सरकार गरीबों का आशियाना उजाड़ने पर आमादा है, जबकि प्रभावित परिवार लंबे समय से अपने घर बचाने की लड़ाई लड़ रहे हैं। यह रवैया गलत है।
महेंद्र गंगोत्री ने पूछा- किसके दबाव में हटाया गया नाम?
जिला कांग्रेस कमेटी ग्रामीण के अध्यक्ष महेंद्र गंगोत्री ने इस घटनाक्रम पर तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि सरकारी आयोजन के आमंत्रण पत्र से स्थानीय पार्षद का नाम गायब कर देना दुर्भाग्यजनक है। राज्य से लेकर नगर निगम तक भाजपा की सरकार है, ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर किसके दबाव में पार्षद दिलीप पाटिल का नाम हटाया गया? क्या प्रशासन का व्यवहार वार्ड के निर्वाचित जनप्रतिनिधि के साथ सौतेला है?
गंगोत्री ने कहा कि एक तरफ लिंगियाडीह में गरीबों के आशियाने उजाड़ने की कोशिश की जा रही है, दूसरी तरफ उनकी आवाज उठाने वालों को भी नजरअंदाज किया जा रहा है। कांग्रेस पार्टी पूरी तरह आंदोलनकारी महिलाओं और प्रभावित परिवारों के साथ है। उन्होंने कहा कि गरीबों को उनका हक और सुरक्षित आशियाना दिलाने के लिए कांग्रेस संघर्ष जारी रखेगी।
347 दिन से धरने पर महिलाएं, पट्टे और आशियाने का इंतजार
लिंगियाडीह में चल रहा आंदोलन केवल मकान बचाने की मांग तक सीमित नहीं है। प्रभावित परिवारों का कहना है कि वे लंबे समय से यहां निवास कर रहे हैं। राजीव गांधी आश्रय योजना के तहत पात्रता सर्वे और पट्टे की प्रक्रिया के दौरान कुछ परिवारों ने निर्धारित राशि भी जमा की थी, लेकिन इसके बावजूद उन्हें अब तक पट्टा नहीं मिला। बेदखली की आशंका के बीच महिलाएं लगातार धरने पर बैठी हैं।
आंदोलनकारियों के मुताबिक, सड़क और नाला निर्माण के नाम पर पहले भी मकान हटाए गए हैं और अब अन्य परिवारों पर भी बेदखली का खतरा मंडरा रहा है। इस मामले में प्रभावित 36 रहवासियों को छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट से अंतरिम राहत भी मिल चुकी है। इसके बावजूद आंदोलनकारी परिवार स्थायी समाधान की मांग कर रहे हैं।
एक तरफ सरकारी उद्घाटन, दूसरी तरफ घर बचाने की गुहार
लिंगियाडीह में रेडक्रॉस दवा दुकान का उद्घाटन क्षेत्र के लिए स्वास्थ्य सुविधाओं के लिहाज से महत्वपूर्ण पहल है, लेकिन इसी आयोजन के बीच 347 दिनों से संघर्ष कर रही महिलाओं की समस्या और स्थानीय पार्षद की उपेक्षा ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। आंदोलनकारी महिलाओं का कहना है कि जनप्रतिनिधि और अधिकारी क्षेत्र में आते हैं, कार्यक्रम करते हैं, लेकिन उनके घरों और भविष्य से जुड़ी समस्या पर कोई ठोस पहल नहीं होती।
बुधवार को काली पट्टी बांधकर वार्डवासियों ने इसी नाराजगी का इजहार किया। अब सवाल यह है कि प्रशासन आंदोलनकारी परिवारों की मांगों पर कब गंभीरता से निर्णय लेगा और स्थानीय जनप्रतिनिधि को सरकारी कार्यक्रम से दूर रखने की वजह क्या है? फिलहाल इस संबंध में जिला प्रशासन की ओर से कोई आधिकारिक स्पष्टीकरण सामने नहीं आया है।
