



बिलासपुर ।
छत्तीसगढ़ की न्यायधानी बिलासपुर इन दिनों रेत के अवैध कारोबार को लेकर एक बार फिर सुर्खियों में है। नियमों को ताक पर रखकर नदियों का सीना चीरने का खेल थमने का नाम नहीं ले रहा है। ताजा मामला खनिज विभाग के अंतर्गत आने वाले नीरतू क्षेत्र के रेत घाट का है, जहाँ शासन से ठेका मिलने के बाद ठेकेदार द्वारा तय शर्तों और नियमों की जमकर धज्जियां उड़ाई जा रही हैं।
मशीन से हो रहा नियमों का उल्लंघन
नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) के स्पष्ट निर्देश हैं कि नदी के घाटों से पर्यावरण संतुलन बनाए रखने के लिए मशीनों के जरिए रेत का उत्खनन पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा। इसके बावजूद नीरतू रेत घाट पर बेधड़क भारी-भरकम पोकलेन और जेसीबी मशीनों का उपयोग कर रेत निकाली जा रही है। नदी के प्राकृतिक स्वरूप को नुकसान पहुँचाते हुए गहराई तक अवैध उत्खनन जारी है।
विभाग की चुप्पी पर उठ रहे सवाल
हैरानी की बात यह है कि इस पूरे अवैध खेल की जानकारी खनिज विभाग के जिम्मेदार अधिकारियों को होने के बावजूद अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है। शिकायतें और सूचनाएँ मिलने के बाद भी विभाग की यह रहस्यमयी चुप्पी कई गंभीर सवाल खड़े करती है:
- क्या ठेकेदार को नियम दरकिनार करने की खुली छूट दी गई है?
- क्या खनिज विभाग और ठेकेदार के बीच कोई अंदरूनी सांठगांठ है?
- क्या राजस्व और पर्यावरण की हानि पर अधिकारियों की कोई जवाबदेही तय नहीं होगी?
स्थानीय ग्रामीणों और पर्यावरण प्रेमियों में इस मनमानी को लेकर भारी आक्रोश है। यदि जल्द ही नीरतू घाट पर पोकलेन मशीनों के इस्तेमाल पर रोक नहीं लगाई गई और दोषी ठेकेदार व लापरवाह अधिकारियों पर कार्रवाई नहीं हुई, तो आने वाले दिनों में उग्र आंदोलन की स्थिति बन सकती है।
