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कार्डियक इमरजेंसी में जान बचाने की तैयारी: CIMS बिलासपुर में डॉक्टरों को BLS-ACLS की ट्रेनिंग, राष्ट्रीय स्तर के विशेषज्ञों ने संभाला मोर्चा

Mohammed Israil
Mohammed Israil  - Editor
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हार्ट अटैक और कार्डियक अरेस्ट जैसी आपात स्थितियों में अब त्वरित और सटीक उपचार पर जोर, पोस्टग्रेजुएट छात्रों और युवा चिकित्सकों को CPR से लेकर डिफिब्रिलेशन तक का दिया जा रहा व्यावहारिक प्रशिक्षण; तीन दिवसीय कार्यशाला में देश के प्रतिष्ठित चिकित्सा संस्थानों के विशेषज्ञ शामिल

बिलासपुर। अस्पताल में किसी मरीज की सांसें थमने लगें, दिल की धड़कन अचानक रुक जाए या सड़क दुर्घटना के बाद मरीज की हालत गंभीर हो जाए, तो ऐसे समय में डॉक्टरों का त्वरित निर्णय और जीवनरक्षक तकनीकों का सही इस्तेमाल जिंदगी और मौत के बीच का अंतर साबित हो सकता है। चिकित्सा क्षेत्र में इसी चुनौती से निपटने के लिए छत्तीसगढ़ आयुर्विज्ञान संस्थान (CIMS), बिलासपुर में डॉक्टरों को आधुनिक जीवनरक्षक तकनीकों में दक्ष बनाने की पहल की गई है। संस्थान में बेसिक लाइफ सपोर्ट (BLS) और एडवांस कार्डियक लाइफ सपोर्ट (ACLS) की तीन दिवसीय प्रशिक्षण कार्यशाला का आयोजन किया जा रहा है। इसमें पोस्टग्रेजुएट मेडिकल विद्यार्थियों और युवा चिकित्सकों को कार्डियक इमरजेंसी के दौरान तत्काल उपचार, CPR, कृत्रिम श्वसन, डिफिब्रिलेशन, एयरवे मैनेजमेंट और टीम आधारित आपातकालीन चिकित्सा का प्रशिक्षण दिया जा रहा है।

एनेस्थीसिया विभाग की ओर से मेडिकल एजुकेशन यूनिट के सहयोग से आयोजित इस कार्यशाला में देश के प्रतिष्ठित चिकित्सा संस्थानों के विशेषज्ञ चिकित्सक प्रशिक्षण दे रहे हैं। कार्यशाला का उद्देश्य केवल मेडिकल विद्यार्थियों को सैद्धांतिक जानकारी देना नहीं, बल्कि उन्हें ऐसी व्यावहारिक दक्षता प्रदान करना है, जिससे अस्पताल में किसी भी गंभीर आपात स्थिति के दौरान वे बिना समय गंवाए सही निर्णय लेकर मरीज को जीवनरक्षक उपचार दे सकें।

डीन डॉ. रमणेश मूर्ति ने किया शुभारंभ, बोले- प्रशिक्षित डॉक्टर समाज के लिए सुरक्षा कवच

कार्यशाला का शुभारंभ CIMS के डीन डॉ. रमणेश मूर्ति ने दीप प्रज्वलित कर किया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि आधुनिक चिकित्सा व्यवस्था में इस तरह के प्रशिक्षण की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है। केवल चिकित्सा की डिग्री और किताबी ज्ञान पर्याप्त नहीं है, बल्कि आपातकालीन परिस्थितियों में तत्काल निर्णय लेने और जीवनरक्षक प्रक्रियाओं को प्रभावी तरीके से लागू करने की क्षमता भी जरूरी है।

उन्होंने कहा, “ऐसे प्रशिक्षण आधुनिक चिकित्सा व्यवस्था की रीढ़ हैं। प्रशिक्षित डॉक्टरों की उपस्थिति समाज के लिए सुरक्षा कवच जैसी होती है। हम CIMS को देश का एक अग्रणी प्रशिक्षण संस्थान बनाना चाहते हैं, जहां शिक्षा के साथ-साथ व्यावहारिक दक्षता भी विकसित हो।”
राष्ट्रीय स्तर के विशेषज्ञों से सीख रहे जीवनरक्षक तकनीकें

कार्यशाला में देश के प्रतिष्ठित चिकित्सा संस्थानों से जुड़े विशेषज्ञ चिकित्सक प्रशिक्षण दे रहे हैं। इनमें प्रमुख रूप से शामिल हैं।

*डॉ. मधुमिता मूर्ति – विभागाध्यक्ष, एनेस्थीसिया विभाग, CIMS बिलासपुर।

डॉ. शिल्पा खन्ना – एसोसिएट प्रोफेसर, गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज (GMC), अंबिकापुर।

डॉ अनीशा नगरिया प्रोफेसर बालाजी मेडिकल कॉलेज रायपुर

17 प्रतिभागियों ने यह कठिन प्रशिक्षण प्राप्त किया
30 th and 31 st October दो दिवसीय कार्यशाला

इसके अलावा मौलाना आजाद मेडिकल कॉलेज, दिल्ली के चिकित्सकों की ऑनलाइन सहभागिता भी इस प्रशिक्षण कार्यक्रम को राष्ट्रीय स्तर का शैक्षणिक मंच प्रदान कर रही है। विशेषज्ञों के अनुभव और मार्गदर्शन से युवा चिकित्सकों को आपातकालीन चिकित्सा की आधुनिक प्रक्रियाओं को समझने और उनका व्यावहारिक ज्ञान हासिल करने का अवसर मिल रहा है।

BLS और ACLS में क्या है अंतर, डॉक्टरों के लिए क्यों जरूरी है यह प्रशिक्षण?

इस कार्यशाला का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा बेसिक लाइफ सपोर्ट और एडवांस कार्डियक लाइफ सपोर्ट का प्रशिक्षण है। दोनों ही तकनीकें गंभीर आपातकालीन परिस्थितियों में मरीज की जान बचाने के लिए महत्वपूर्ण मानी जाती हैं।

1. बेसिक लाइफ सपोर्ट (BLS):

BLS प्राथमिक जीवनरक्षक प्रशिक्षण है। इसमें कार्डियक अरेस्ट जैसी स्थिति में मरीज को तत्काल CPR (कार्डियोपल्मोनरी रिससिटेशन), कृत्रिम श्वसन और अन्य बुनियादी जीवनरक्षक प्रक्रियाएं देने का प्रशिक्षण दिया जाता है। इसका उद्देश्य शरीर में रक्त संचार और ऑक्सीजन की आपूर्ति बनाए रखने के लिए समय रहते जरूरी कदम उठाना है।

2. एडवांस कार्डियक लाइफ सपोर्ट (ACLS):

ACLS उच्च स्तरीय कार्डियक इमरजेंसी प्रशिक्षण है। इसमें गंभीर हृदय संबंधी आपात स्थितियों के दौरान कार्डियक मॉनिटरिंग, आवश्यक दवाओं का इस्तेमाल, डिफिब्रिलेशन, एयरवे मैनेजमेंट और उन्नत जीवनरक्षक प्रक्रियाओं का प्रशिक्षण दिया जाता है। इसके साथ ही आपातकालीन परिस्थितियों में मेडिकल टीम के बीच बेहतर समन्वय और त्वरित निर्णय लेने की क्षमता विकसित की जाती है।

इन दोनों प्रशिक्षणों का उद्देश्य चिकित्सकों को ऐसी परिस्थितियों के लिए तैयार करना है, जहां उपचार शुरू करने में होने वाली देरी मरीज के जीवन के लिए गंभीर खतरा बन सकती है।

अस्पताल की इमरजेंसी सेवाओं को मिलेगी नई मजबूती

CIMS के मेडिकल सुपरिटेंडेंट डॉ. लखन सिंह ने इस प्रशिक्षण को अस्पताल की आपातकालीन चिकित्सा सेवाओं की गुणवत्ता से जुड़ी महत्वपूर्ण पहल बताया। उन्होंने कहा कि प्रशिक्षित चिकित्सक सड़क दुर्घटनाओं, कार्डियक अरेस्ट, हार्ट अटैक और अन्य गंभीर चिकित्सकीय परिस्थितियों में मरीजों को समय पर जीवनरक्षक उपचार देने में अधिक सक्षम होंगे।

उनके मुताबिक, इस तरह के प्रशिक्षण से चिकित्सकों की आपातकालीन चिकित्सा संबंधी दक्षता बढ़ेगी और अस्पताल में गंभीर मरीजों के उपचार के दौरान बेहतर समन्वय स्थापित करने में मदद मिलेगी।

डॉ. मधुमिता मूर्ति बोलीं- हर युवा डॉक्टर जीवनरक्षक तकनीकों में हो दक्ष

कार्यशाला की आयोजक एवं एनेस्थीसिया विभाग की विभागाध्यक्ष डॉ. मधुमिता मूर्ति ने बताया कि प्रशिक्षण का मूल उद्देश्य युवा चिकित्सकों को जीवनरक्षक तकनीकों में दक्ष बनाना है। उन्होंने कहा कि किसी भी आपात स्थिति में डॉक्टर को यह पता होना चाहिए कि मरीज की स्थिति का आकलन कैसे करना है, कौन-सी प्रक्रिया तत्काल शुरू करनी है और किस तरह सही समय पर निर्णय लेना है।

उन्होंने कहा कि पहले दिन प्रशिक्षण में विद्यार्थियों की सक्रिय भागीदारी और उत्साह देखने को मिला। आगामी दो दिन और अधिक गहन एवं व्यावहारिक प्रशिक्षण के लिए निर्धारित हैं। इसमें चिकित्सकों को अलग-अलग आपातकालीन परिस्थितियों के अनुरूप प्रशिक्षित किया जाएगा।
वरिष्ठ चिकित्सकों की रही मौजूदगी

कार्यशाला के शुभारंभ अवसर पर संस्थान के वरिष्ठ संकाय सदस्य डॉ. राकेश नहरेल, डॉ. बी.पी. सिंह, डॉ. भूपेंद्र कश्यप और डॉ. सुजीत नायक विशेष रूप से उपस्थित रहे। उन्होंने BLS और ACLS जैसे जीवनरक्षक प्रशिक्षणों की आवश्यकता पर जोर देते हुए आयोजन से जुड़े चिकित्सकों को बधाई दी।

अगले दो दिन होंगे महत्वपूर्ण, सिमुलेशन और डिफिब्रिलेटर का मिलेगा व्यावहारिक प्रशिक्षण

कार्यशाला के आगामी सत्रों में चिकित्सकों को केवल तकनीकी जानकारी ही नहीं, बल्कि वास्तविक आपातकालीन परिस्थितियों के अनुरूप अभ्यास भी कराया जाएगा। इसके तहत प्रमुख रूप से निम्न विषय शामिल हैं।

  • एडवांस कार्डियक केस सिमुलेशन: गंभीर हृदय संबंधी आपात स्थितियों का अभ्यास और उपचार संबंधी निर्णय लेने का प्रशिक्षण।
  • डिफिब्रिलेटर तकनीक: कार्डियक अरेस्ट की निर्धारित परिस्थितियों में डिफिब्रिलेशन की प्रक्रिया और उपकरणों के इस्तेमाल की जानकारी।
  • मेडकिट प्रबंधन: आपातकालीन उपचार में इस्तेमाल होने वाली दवाओं और आवश्यक मेडिकल किट के प्रबंधन का प्रशिक्षण।
  • टीम बेस्ड रिस्पॉन्स: गंभीर मरीजों के उपचार के दौरान मेडिकल टीम के सदस्यों के बीच बेहतर तालमेल और जिम्मेदारियों का समन्वय।
  • केस आधारित चर्चा: वास्तविक चिकित्सकीय परिस्थितियों से जुड़े मामलों पर विशेषज्ञों के साथ चर्चा।
  • वीडियो डेमो: जीवनरक्षक प्रक्रियाओं और आधुनिक चिकित्सा तकनीकों को वीडियो के माध्यम से समझना।

इन सत्रों के माध्यम से युवा चिकित्सकों को गंभीर मरीजों के उपचार में व्यावहारिक अनुभव और निर्णय लेने की क्षमता विकसित करने का अवसर मिलेगा।

चिकित्सा शिक्षा से आगे मरीजों की सुरक्षा से जुड़ी पहल

चिकित्सा क्षेत्र में कार्डियक अरेस्ट और अन्य गंभीर आपात स्थितियों के दौरान शुरुआती कुछ मिनट बेहद महत्वपूर्ण होते हैं। ऐसे समय में प्रशिक्षित चिकित्सक, सही तकनीक और मेडिकल टीम के बीच बेहतर समन्वय मरीज के उपचार की दिशा बदल सकते हैं। इसलिए BLS और ACLS जैसे प्रशिक्षण केवल मेडिकल कॉलेजों के शैक्षणिक कार्यक्रम तक सीमित नहीं हैं, बल्कि अस्पतालों में आपातकालीन चिकित्सा व्यवस्था को मजबूत करने का भी महत्वपूर्ण माध्यम हैं।

CIMS बिलासपुर में आयोजित यह कार्यशाला चिकित्सा शिक्षा को व्यावहारिक जीवनरक्षक कौशल से जोड़ने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। संस्थान में युवा डॉक्टरों को आधुनिक कार्डियक इमरजेंसी प्रबंधन का प्रशिक्षण देकर भविष्य में मरीजों को बेहतर और समयबद्ध चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने की तैयारी की जा रही है।

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