एम्स के गेट नंबर-4 के पास ई-रिक्शा से मिली थीं कोडीनयुक्त कफ सिरप की 40 शीशियां; स्थानीय बिक्री से लेकर सप्लायर तक पहुंची जांच, NDPS कोर्ट ने सुनाई कठोर सजा
रायपुर |
छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में नशीली कफ सिरप के अवैध कारोबार से जुड़े एक मामले में विशेष NDPS न्यायालय ने तीन दोषियों को 20-20 वर्ष के सश्रम कारावास से दंडित किया है। मामले में कुल 10 लाख रुपये का अर्थदंड लगाया गया है। इस प्रकरण की अहम कड़ी यह रही कि पुलिस की कार्रवाई केवल नशीली सिरप की बरामदगी और मौके पर पकड़े गए आरोपियों तक सीमित नहीं रही, बल्कि विवेचना स्थानीय बिक्री से आगे बढ़कर कथित आपूर्तिकर्ता तक पहुंची। वैज्ञानिक परीक्षण, मोबाइल फोन से जुड़े तकनीकी साक्ष्य और अभियोजन की प्रक्रिया ने मामले को न्यायालय तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
रायपुर पुलिस कमिश्नरेट के अनुसार, यह मामला थाना आमानाका में दर्ज अपराध क्रमांक 340/2025 से जुड़ा है। विशेष दांडिक प्रकरण क्रमांक 61/2026 में विशेष न्यायाधीश (NDPS एक्ट) रायपुर की अदालत ने युवराज सिंह चौहान, वाजिद खान और निहाल सिंह को दोषी ठहराते हुए सजा सुनाई। पुलिस की ओर से जारी प्रेस विज्ञप्ति के मुताबिक, 28 अक्टूबर 2026 को जारी सजायाबी वारंटों के आधार पर सजा की कार्रवाई की गई।
एम्स के गेट पर पकड़ी गई नशीली सिरप की खेप
मामले की शुरुआत 16 अक्टूबर 2025 को मिली एक मुखबिर सूचना से हुई। सूचना थी कि रायपुर के टाटीबंध स्थित एम्स अस्पताल के गेट नंबर-4 के पास, जीई रोड पर दो व्यक्ति ई-रिक्शा में नशीली कफ सिरप रखकर बिक्री के लिए ग्राहक तलाश रहे हैं।
सूचना के आधार पर उप निरीक्षक मिनेश्वर बघेल के नेतृत्व में पुलिस टीम ने मौके पर घेराबंदी की। ई-रिक्शा में मौजूद युवराज सिंह चौहान और वाजिद खान को पकड़ा गया। तलाशी के दौरान ई-रिक्शा की पिछली सीट पर रखे बैग से Glankof-1 ब्रांड की कोडीनयुक्त कफ सिरप की 40 शीशियां बरामद हुईं। प्रत्येक शीशी 100 मिलीलीटर की थी। इस तरह कुल चार लीटर सिरप जब्त की गई, जिसकी बताई गई कीमत 9,200 रुपये थी।
पुलिस के अनुसार, दोनों आरोपी सिरप रखने अथवा उसकी बिक्री के संबंध में वैध दस्तावेज प्रस्तुत नहीं कर सके। इसके बाद सिरप के साथ घटना में प्रयुक्त ई-रिक्शा और मोबाइल फोन भी जब्त किए गए तथा उसी दिन अपराध दर्ज कर विवेचना शुरू की गई।
बरामदगी से आगे बढ़ी जांच, सामने आया कथित सप्लायर
इस प्रकरण में जांच का महत्वपूर्ण पहलू कथित आपूर्ति नेटवर्क की पड़ताल रहा। पुलिस के मुताबिक, युवराज सिंह चौहान और वाजिद खान से पूछताछ के दौरान सिरप सरोदार, जिला दुर्ग निवासी निहाल सिंह से खरीदकर बिक्री के लिए लाने की जानकारी सामने आई। इस आधार पर पुलिस ने निहाल सिंह को भी 16 अक्टूबर 2025 को गिरफ्तार किया।
इस कार्रवाई ने मामले को केवल मौके पर बरामद नशीली सिरप तक सीमित नहीं रहने दिया। पुलिस ने कथित तौर पर बिक्री करने वाले व्यक्तियों से लेकर आपूर्ति की अगली कड़ी तक पहुंचने का प्रयास किया। हालांकि, प्रेस विज्ञप्ति में आपूर्ति नेटवर्क के इससे आगे के अन्य लोगों, बड़े वितरकों या किसी व्यापक अंतरजिला नेटवर्क के संबंध में अलग विवरण नहीं दिया गया है।
मोबाइल रिकॉर्ड से लेकर लैब परीक्षण तक जुटाए गए साक्ष्य
पुलिस के अनुसार, विवेचना में भौतिक बरामदगी के साथ वैज्ञानिक और तकनीकी साक्ष्यों को भी शामिल किया गया। जब्त सिरप का न्यायालय से भौतिक सत्यापन और इन्वेंटरी संबंधी कार्यवाही कराई गई। इसके बाद विधि विज्ञान प्रयोगशाला, रायपुर से वैज्ञानिक परीक्षण कराया गया।
आरोपियों के मोबाइल नंबरों की ग्राहक आवेदन पत्रिका (CAF) और कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR) प्राप्त किए गए। इनके माध्यम से आपसी संपर्क तथा कथित आपूर्ति श्रृंखला से संबंधित साक्ष्य जुटाए गए। इसके अलावा गवाहों के बयान, कार्रवाई से जुड़े दस्तावेज और इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य भी संकलित किए गए।
विवेचना पूरी होने के बाद पुलिस ने NDPS एक्ट की धारा 21(C) और 29 के तहत अभियोग पत्र तैयार किया। एक अप्रैल 2026 को विशेष NDPS न्यायालय, रायपुर के समक्ष चालान पेश किया गया।
अदालत का फैसला: तीनों दोषियों को 20-20 साल का कारावास
विशेष न्यायाधीश (NDPS एक्ट) रायपुर श्रीमती किरण थवाईत की अदालत ने तीनों आरोपियों को दोषी ठहराते हुए सजा सुनाई। पुलिस की प्रेस विज्ञप्ति में दर्ज सजा का विवरण इस प्रकार है:
1. युवराज सिंह चौहान: NDPS एक्ट की धारा 21(C) तथा धारा 29 सहपठित धारा 21(C) के तहत प्रत्येक अपराध में 20-20 वर्ष का सश्रम कारावास और प्रत्येक अपराध में दो-दो लाख रुपये अर्थदंड।
2. वाजिद खान: धारा 21(C) तथा धारा 29 सहपठित धारा 21(C) के तहत प्रत्येक अपराध में 20-20 वर्ष का कारावास और प्रत्येक अपराध में दो-दो लाख रुपये अर्थदंड।
3. निहाल सिंह: धारा 29 सहपठित धारा 21(C) के तहत 20 वर्ष का सश्रम कारावास और दो लाख रुपये अर्थदंड।
अदालत के आदेश के अनुसार, युवराज सिंह चौहान और वाजिद खान को दी गई कारावास की सजाएं साथ-साथ भुगताई जाएंगी। पुलिस ने तीनों दोषियों पर कुल 10 लाख रुपये अर्थदंड अधिरोपित होने की जानकारी दी है।
377 दिन में दोषसिद्धि, चालान के बाद 210 दिन में फैसला
इस मामले में समयबद्ध न्यायिक प्रक्रिया भी उल्लेखनीय रही। पुलिस के अनुसार, 16 अक्टूबर 2025 को अपराध दर्ज होने से 28 अक्टूबर 2026 को जारी सजायाबी वारंटों तक 377 दिन बीते। वहीं, एक अप्रैल 2026 को चालान पेश किए जाने से 28 अक्टूबर 2026 तक 210 दिन का समय लगा।
इस अवधि में मामले की विवेचना, साक्ष्य संकलन, अभियोग पत्र प्रस्तुत करने और न्यायालय में विचारण की प्रक्रिया पूरी हुई। पुलिस कमिश्नरेट का कहना है कि गवाहों की समय पर न्यायालय में उपस्थिति सुनिश्चित करने, समन और वारंट की तामीली तथा अभियोजन के साथ समन्वय पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है, ताकि NDPS मामलों का विचारण अनावश्यक रूप से लंबित न रहे।
विवेचना से अभियोजन तक समन्वय पर जोर
रायपुर पुलिस कमिश्नर डॉ. संजीव सुबला के निर्देशन में नशे के अवैध कारोबार के विरुद्ध कार्रवाई के साथ NDPS प्रकरणों की विवेचना, अभियोजन और ट्रायल मॉनिटरिंग पर विशेष ध्यान दिए जाने की जानकारी पुलिस ने दी है।
इस मामले में घेराबंदी, बरामदगी और विवेचना में उप निरीक्षक मिनेश्वर बघेल, सहायक उप निरीक्षक प्राणेश्वर वर्मा तथा आरक्षक दीपक पाण्डेय, गुलशन चौबे और आशीष शुक्ला की महत्वपूर्ण भूमिका रही। चालानी कार्रवाई निरीक्षक सुधांशु बघेल, थाना प्रभारी आमानाका द्वारा की गई।
नशीली दवाओं के अवैध कारोबार पर कार्रवाई का व्यापक संदेश
कोडीनयुक्त कफ सिरप का यह मामला नशीले पदार्थों से जुड़े अपराधों में बरामदगी के साथ आपूर्ति की कड़ियों की जांच, वैज्ञानिक परीक्षण और तकनीकी साक्ष्यों के महत्व को सामने लाता है। पुलिस की कार्रवाई में दो व्यक्तियों से सिरप की बरामदगी के बाद कथित आपूर्तिकर्ता तक पहुंचना और फिर न्यायालय में दोषसिद्धि होना इस प्रकरण के प्रमुख घटनाक्रम रहे। यह कार्रवाई ऐसे मामलों में पुलिस विवेचना और अभियोजन के समन्वय की भूमिका को रेखांकित करती है। हालांकि, इस एक प्रकरण के आधार पर किसी व्यापक नशीली सिरप नेटवर्क के पूरी तरह समाप्त होने का दावा नहीं किया जा सकता। उपलब्ध आधिकारिक विवरण के अनुसार, इस मामले में तीन दोषियों को कठोर कारावास और कुल 10 लाख रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई गई है।
