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2028 की चुनावी जंग…भाजपा की महिला ब्रिगेड ने संभाला मोर्चा, कांग्रेस की महिला टीम प्रदर्शनों में भी ढूंढ रही चेहरे…?

Mohammed Israil
Mohammed Israil  - Editor
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भाजपा ने बूथ से गांव तक महिला शक्ति खड़ी करने का बनाया प्लान, हर बूथ पर 10 महिलाओं की टीम और रोज पांच गांवों में चौपाल का लक्ष्य; स्मृति ईरानी के दौरे से महिला मोर्चा रिचार्ज, इधर कांग्रेस की महिला इकाई की सियासी सक्रियता पर सवाल

Md israil बिलासपुर। विधानसभा चुनाव में अभी करीब दो साल बाकी हैं, लेकिन भाजपा ने चुनावी बिसात पर अपनी चालें चलनी शुरू कर दी हैं। खास बात यह है कि इस बार पार्टी की रणनीति में महिला शक्ति को केंद्र में रखा गया है। भाजपा महिला मोर्चा ने बूथ से लेकर शक्ति केंद्र और गांवों तक संगठन का नेटवर्क खड़ा करने की कवायद तेज कर दी है। हर बूथ पर 10 महिलाओं की टीम तैयार करने से लेकर प्रतिदिन पांच गांवों में चौपाल लगाने तक का कार्यक्रम तय किया गया है। दूसरी तरफ कांग्रेस की महिला इकाई की स्थिति ऐसी नजर आ रही है कि केंद्र और राज्य सरकार के खिलाफ पार्टी के प्रदर्शनों में भी महिला कांग्रेस की भागीदारी गिने-चुने चेहरों तक सीमित दिखाई देती है। एक तरफ भाजपा की महिला ब्रिगेड चुनाव से पहले गांव-गांव पहुंचने की तैयारी में है, दूसरी तरफ कांग्रेस के सामने अपनी महिला टीम को सक्रिय करने की चुनौती है। प्रदेश प्रभारी स्मृति ईरानी के छत्तीसगढ़ दौरे के बाद भाजपा महिला मोर्चा में बढ़ा उत्साह इस संगठनात्मक मुकाबले को और दिलचस्प बना रहा है।

भाजपा का चुनावी गणित: बूथ पर 10 महिलाएं, शक्ति केंद्र पर दो जिम्मेदार

भाजपा महिला मोर्चा की ओर से जारी निर्देशों को देखें तो संगठन विस्तार की तैयारी केवल कागजों तक सीमित रखने की मंशा नहीं है। प्रदेश अध्यक्ष श्रीमती विभा अवस्थी, संभाग प्रभारी श्रीमती फुलेश्वरी पैकरा, जिला प्रभारी श्रीमती अंजू त्रिपाठी, जिला सह-प्रभारी श्रीमती प्रियंका गिरी और जिला अध्यक्ष श्रीमती गायत्री साहू के निर्देश पर बिलासपुर ग्रामीण में मंडल इकाइयों को एक सप्ताह के भीतर संगठनात्मक काम पूरा करने को कहा गया है।

इस कार्ययोजना में सबसे महत्वपूर्ण जिम्मेदारी बूथ स्तर पर दी गई है। प्रत्येक बूथ से 10 महिलाओं के नाम और मोबाइल नंबर के साथ सूची तैयार करनी है। इन महिलाओं को बूथ मित्र के रूप में संगठन से जोड़ने की तैयारी है। इसके अलावा प्रत्येक शक्ति केंद्र पर संयोजक और सह-संयोजक नियुक्त करने के लिए सूची तैयार की जा रही है।

तैयार सूचियां प्रदेश कार्यालय में श्रीमती तिलेश्वरी जी को भेजी जानी हैं। आगामी बैठक में यह सूची स्मृति ईरानी के समक्ष प्रस्तुत की जानी है। इसके लिए जिला पदाधिकारियों, मंडल प्रभारियों, सह-प्रभारियों और मंडल अध्यक्षों को आपसी समन्वय बनाकर समय-सीमा में काम पूरा करने की जिम्मेदारी सौंपी गई है।

साफ है कि भाजपा महिला मोर्चा की नजर अब केवल कार्यक्रमों में भीड़ जुटाने पर नहीं, बल्कि हर बूथ पर ऐसी महिला कार्यकर्ताओं की टीम तैयार करने पर है, जो लगातार संगठन के संपर्क में रहे और स्थानीय स्तर पर राजनीतिक गतिविधियों में भागीदारी निभाए।

एक दिन में पांच गांव, महिला कार्यकर्ताओं को चौपाल की जिम्मेदारी

भाजपा की दूसरी रणनीति सीधे गांवों तक पहुंचने की है। ‘लोकतंत्र बचाओ, अराजकता हटाओ’ अभियान के तहत महिला कार्यकर्ताओं को चौपालों की जिम्मेदारी सौंपी गई है। निर्देश है कि प्रत्येक प्रभारी महिला एक दिन में पांच गांवों में चौपाल आयोजित करेगी।

इन चौपालों में अभियान के विषय पर प्रभावी भाषण देना होगा। इसके लिए महिला पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं को अभी से विषय का अध्ययन करने, तथ्यों को समझने और अपने भाषण की तैयारी शुरू करने के निर्देश दिए गए हैं।

इस अभियान में एक और महत्वपूर्ण रणनीति अपनाई गई है। जिला पदाधिकारियों को अपने निवास वाले मंडल के बजाय दूसरे मंडल में जाकर जिम्मेदारी निभानी होगी। यानी संगठन अपनी महिला पदाधिकारियों को केवल अपने परिचित क्षेत्र तक सीमित नहीं रखना चाहता। संबंधित मंडल अध्यक्षों से संपर्क कर चौपाल का स्थान, आयोजन और आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित करने को कहा गया है।

मंडल अध्यक्षों को भी स्पष्ट जिम्मेदारी दी गई है कि बाहर से आने वाली प्रभारी बहनों को पूरा सहयोग दें। इस तरह भाजपा महिला मोर्चा संगठन विस्तार के साथ राजनीतिक संदेश को गांव-गांव तक पहुंचाने की तैयारी कर रहा है।

स्मृति ईरानी के दौरे के बाद महिला मोर्चा में नई ऊर्जा

भाजपा की इस पूरी गतिविधि के बीच प्रदेश प्रभारी स्मृति ईरानी का छत्तीसगढ़ दौरा भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। 25 और 26 अक्टूबर को रायपुर में उनके प्रवास के दौरान प्रदेश संगठन के नेताओं और पदाधिकारियों के साथ संगठनात्मक गतिविधियों और आगामी राजनीतिक रणनीति को लेकर बैठकें हुईं।

स्मृति ईरानी की संगठनात्मक भूमिका और राजनीतिक अनुभव के कारण महिला मोर्चा के कार्यकर्ताओं में भी उत्साह देखने को मिल रहा है। उनके दौरे के बाद बूथ मित्रों के गठन, शक्ति केंद्रों की जिम्मेदारी और गांवों में चौपाल के कार्यक्रम को लेकर जिस तरह निर्देश जारी हुए हैं, उससे महिला संगठन की सक्रियता को नई दिशा मिलती दिखाई दे रही है।

महिला मोर्चा की जिला अध्यक्ष श्रीमती गायत्री साहू के नेतृत्व में बिलासपुर ग्रामीण में संगठन को मजबूत करने की कवायद तेज हुई है। महामंत्री श्रीमती नंदनी साहू और श्रीमती अंकिता शुक्ला की ओर से मंडल अध्यक्षों तक भेजे गए निर्देशों में एक सप्ताह की समय-सीमा तय करना बताता है कि संगठन इस काम को प्राथमिकता के साथ आगे बढ़ाना चाहता है।

स्मृति ईरानी के दौरे से मिले राजनीतिक और संगठनात्मक संदेश को जमीनी स्तर तक पहुंचाने की कोशिश भी इस कार्ययोजना में दिखाई देती है।

कांग्रेस की महिला टीम कहां है? प्रदर्शनों में भी सीमित भागीदारी

भाजपा की इस सक्रियता के बीच बिलासपुर में कांग्रेस की महिला इकाई की स्थिति पर भी राजनीतिक चर्चा शुरू हो गई है। जिला और शहर कांग्रेस कमेटी के पदाधिकारी केंद्र और राज्य सरकार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन, ज्ञापन और आंदोलनों में अपनी मौजूदगी दर्ज करा रहे हैं, लेकिन महिला कांग्रेस की भागीदारी उतनी प्रभावी नजर नहीं आ रही।

पिछले कुछ प्रदर्शनों में महिला कांग्रेस के गिने-चुने चेहरे ही दिखाई दिए। सवाल यह है कि जब विपक्ष के पास सरकार के खिलाफ मुद्दे हैं, राजनीतिक विरोध के अवसर हैं और जनता के बीच जाने के कई मौके हैं, तब महिला कांग्रेस की भागीदारी इतनी सीमित क्यों दिखाई दे रही है?

राजनीतिक संगठनों में महिला इकाई की भूमिका केवल महिला दिवस, सम्मेलन या औपचारिक बैठकों तक सीमित नहीं होती। सड़क पर संघर्ष, वार्ड और मोहल्लों में जनसंपर्क, बूथ स्तर पर कार्यकर्ताओं की सक्रियता और स्थानीय मुद्दों पर जनता के बीच मौजूदगी भी उतनी ही जरूरी होती है।

यहीं कांग्रेस की महिला इकाई के सामने सबसे बड़ी चुनौती दिखाई देती है। भाजपा जहां प्रत्येक बूथ पर 10 महिलाओं को जोड़ने की तैयारी कर रही है, वहीं कांग्रेस की महिला टीम की सार्वजनिक गतिविधियों में अपेक्षित व्यापकता नजर नहीं आ रही। यह अंतर आने वाले समय में जिले की राजनीति में महत्वपूर्ण हो सकता है।

हालांकि कांग्रेस की पूरी संगठनात्मक स्थिति का आकलन केवल प्रदर्शनों में मौजूदगी से नहीं किया जा सकता, लेकिन सार्वजनिक राजनीतिक गतिविधियों में महिला कार्यकर्ताओं की सीमित भागीदारी पार्टी के लिए चिंता का विषय जरूर बन सकती है।

भाजपा की तैयारी केवल पदाधिकारी बनाने तक नहीं, गांवों में राजनीतिक पकड़ बनाने की

भाजपा की कार्ययोजना का एक महत्वपूर्ण पहलू यह भी है कि पार्टी महिला कार्यकर्ताओं को केवल संगठनात्मक पद देकर जिम्मेदारी खत्म नहीं करना चाहती। बूथ मित्रों की सूची, शक्ति केंद्रों पर संयोजक-सह संयोजक और गांवों में चौपाल का कार्यक्रम एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं।

इसका मकसद स्थानीय स्तर पर महिलाओं का ऐसा संपर्क तंत्र तैयार करना है, जो संगठन की गतिविधियों को लगातार आगे बढ़ा सके। हर बूथ पर 10 महिलाओं की सूची तैयार होने के बाद पार्टी के पास बूथवार महिला संपर्क का आधार होगा। चौपालों के माध्यम से इन्हीं कार्यकर्ताओं को राजनीतिक संवाद की जिम्मेदारी मिलेगी।

दूसरी तरफ कांग्रेस को अपनी महिला इकाई की सक्रियता बढ़ाने के लिए केवल प्रदर्शनों में उपस्थिति बढ़ाने से आगे जाना होगा। उसे भी बूथ, वार्ड और गांव स्तर पर महिला कार्यकर्ताओं को जिम्मेदारी देने और लगातार सक्रिय रखने की जरूरत होगी।

दो साल पहले ही शुरू हुई महिला शक्ति की राजनीतिक प्रतिस्पर्धा

बिलासपुर की राजनीति में यह मुकाबला अभी शुरुआती दौर में है, लेकिन दोनों दलों की तैयारियों में अंतर दिखाई देने लगा है। भाजपा ने अपनी महिला इकाई के लिए काम, जिम्मेदारी और समय-सीमा तय कर दी है। संगठन की कोशिश है कि चुनाव की घोषणा होने से पहले ही बूथ और गांवों में महिला कार्यकर्ताओं का नेटवर्क सक्रिय हो जाए।

कांग्रेस के सामने इसके मुकाबले अपनी महिला टीम को नए सिरे से सक्रिय करने और राजनीतिक गतिविधियों में प्रभावी भागीदारी सुनिश्चित करने की चुनौती है। जिला और शहर कांग्रेस के मुख्य संगठन की सक्रियता के बावजूद महिला इकाई की सीमित सार्वजनिक मौजूदगी पार्टी की रणनीति पर सवाल खड़े कर रही है।

अब भाजपा महिला मोर्चा के सामने भी अपनी कार्ययोजना को जमीन पर उतारने की परीक्षा है। एक सप्ताह में बूथवार सूचियां तैयार करना, शक्ति केंद्रों पर जिम्मेदारियां तय करना और प्रतिदिन पांच गांवों में चौपाल आयोजित करना आसान काम नहीं है। इसकी सफलता इस बात से तय होगी कि निर्देश कितनी तेजी से वास्तविक संगठनात्मक गतिविधियों में बदलते हैं।

फिलहाल बिलासपुर में राजनीतिक तस्वीर का सबसे दिलचस्प पहलू यही है कि विधानसभा चुनाव में अभी वक्त है, लेकिन भाजपा की महिला ब्रिगेड ने मैदान में उतरने की तैयारी शुरू कर दी है। कांग्रेस की महिला इकाई के सामने अब यह साबित करने की चुनौती है कि वह भी केवल राजनीतिक बयानों और कभी-कभार के प्रदर्शनों तक सीमित नहीं, बल्कि गांव और बूथ की राजनीति में बराबरी से मौजूद है।

एक तरफ भाजपा की महिला शक्ति के लिए बूथवार जिम्मेदारियां और गांवों में चौपाल का कैलेंडर तैयार हो रहा है, दूसरी तरफ कांग्रेस की महिला टीम की सक्रियता को लेकर सवाल उठ रहे हैं। चुनाव से दो साल पहले शुरू हुई यह संगठनात्मक दौड़ आने वाले दिनों में बिलासपुर की सियासत का अहम मुकाबला बन सकती है।

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