डीएमएफ से लेकर सीएसआर तक स्वीकृत विकास कार्यों में देरी पर केंद्रीय राज्यमंत्री ने जताई नाराजगी, कलेक्टरों और जिला पंचायत सीईओ को समय-सीमा में काम पूरा कराने के निर्देश; सवाल—आखिर स्वीकृति के बाद भी क्यों धीमी है विकास की चाल?
बिलासपुर/मुंगेली। विकास कार्यों की स्वीकृति, योजनाओं के लिए राशि और प्रशासनिक अमले की मौजूदगी के बावजूद यदि काम निर्धारित समय पर पूरे नहीं हो रहे हैं, तो सवाल उठना लाजिमी है कि आखिर देरी की वजह क्या है? बिलासपुर और मुंगेली जिले में स्वीकृत विकास कार्यों की धीमी प्रगति को लेकर केंद्रीय आवासन एवं शहरी कार्य राज्यमंत्री तथा बिलासपुर लोकसभा सांसद तोखन साहू की नाराजगी ने अब इसी सवाल को केंद्र में ला दिया है। दिल्ली से अधिकारियों को दिए गए उनके सख्त निर्देशों के बाद निगाहें इस बात पर टिक गई हैं कि उनकी नाराजगी दूर करने और विकास कार्यों को गति देने की जिम्मेदारी कौन निभाएगा?
तोखन साहू ने दोनों जिलों के कलेक्टरों और जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारियों (सीईओ) को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि शासन की विभिन्न योजनाओं, जिला खनिज संस्थान न्यास (डीएमएफ), कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (सीएसआर), विभिन्न आयोगों एवं प्राधिकरणों तथा अन्य मदों से स्वीकृत कार्यों में तेजी लाई जाए। उन्होंने इन कार्यों को निर्धारित समय-सीमा में पूरा करने, नियमित समीक्षा करने और निर्माण की गुणवत्ता सुनिश्चित करने पर जोर दिया है।
दिल्ली से सख्त संदेश, अब जिलों में जवाबदेही की बारी
केंद्रीय राज्यमंत्री की नाराजगी केवल धीमी रफ्तार तक सीमित नहीं, बल्कि स्वीकृत विकास कार्यों को समय पर धरातल पर उतारने की प्रशासनिक जिम्मेदारी पर भी सवाल खड़े करती है। जब योजनाओं के तहत कार्य स्वीकृत हो चुके हैं, तो उनका क्रियान्वयन निर्धारित समय पर क्यों नहीं हो रहा? किन स्तरों पर देरी है और उसे दूर करने के लिए अब तक क्या कदम उठाए गए हैं? इन सवालों का जवाब संबंधित प्रशासनिक अमले को अपनी कार्यप्रणाली और प्रगति से देना होगा।
तोखन साहू ने अधिकारियों को निर्देशित किया है कि जिन परियोजनाओं की प्रगति अपेक्षा के अनुरूप नहीं है, उनकी नियमित समीक्षा की जाए और देरी दूर करने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएं। हालांकि, किन विशेष परियोजनाओं में कितना विलंब हुआ है और इसके लिए कौन जिम्मेदार है, इसका विस्तृत ब्योरा सामने नहीं आया है। ऐसे में अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि निर्देशों के बाद जिलों में समीक्षा और क्रियान्वयन की प्रक्रिया कितनी प्रभावी होती है।
डीएमएफ-सीएसआर की राशि से स्वीकृत काम भी प्राथमिकता में
बिलासपुर और मुंगेली में विकास कार्यों की रफ्तार बढ़ाने के लिए शासन की योजनाओं के साथ डीएमएफ, सीएसआर, विभिन्न आयोगों, प्राधिकरणों और अन्य मदों से स्वीकृत परियोजनाओं पर भी विशेष ध्यान देने को कहा गया है। इन मदों से स्वीकृत कार्यों का समय पर पूरा होना इसलिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि इनका उद्देश्य संबंधित क्षेत्रों की आवश्यकताओं के अनुरूप विकास और नागरिकों को सुविधाएं उपलब्ध कराना है।
राज्यमंत्री ने स्पष्ट किया है कि विकास कार्यों के लिए स्वीकृत राशि जनहित के लिए है। उसका समय पर उपयोग सुनिश्चित करना और निर्माण कार्यों को अनावश्यक रूप से लंबित नहीं रखना अधिकारियों की जिम्मेदारी है। ऐसे में अब प्रशासन के सामने चुनौती केवल काम शुरू कराने की नहीं, बल्कि स्वीकृत परियोजनाओं को तय समय में पूरा कर उनकी उपयोगिता जनता तक पहुंचाने की भी है।
समय-सीमा के साथ गुणवत्ता की भी परीक्षा
विकास कार्यों में तेजी लाने के निर्देश के साथ तोखन साहू ने गुणवत्ता से समझौता नहीं करने की हिदायत भी दी है। उन्होंने कहा है कि प्रत्येक परियोजना की नियमित समीक्षा होनी चाहिए और जहां काम में देरी हो रही है, वहां सुधारात्मक कदम उठाकर प्रगति तेज की जाए।
यहां प्रशासन के सामने दोहरी जिम्मेदारी है—एक ओर कार्यों को समय-सीमा में पूरा करना और दूसरी ओर निर्माण की गुणवत्ता बनाए रखना। जल्दबाजी में काम पूरा करने के नाम पर गुणवत्ता प्रभावित न हो, यह सुनिश्चित करना भी उतना ही जरूरी है। इसलिए अब जिलों में होने वाली समीक्षा के दौरान कार्यों की वास्तविक प्रगति और गुणवत्ता दोनों पर ध्यान देना होगा।
जनप्रतिनिधियों के प्रस्तावों पर कार्रवाई भी कसौटी
केंद्रीय राज्यमंत्री ने जनप्रतिनिधियों द्वारा जनहित में प्रस्तुत विकास कार्यों के प्रस्तावों को प्राथमिकता देने के निर्देश भी दिए हैं। उन्होंने कहा है कि ऐसे प्रस्तावों पर नियमानुसार आवश्यक कार्रवाई की जाए, ताकि क्षेत्र की जरूरतों के अनुरूप विकास कार्यों को आगे बढ़ाया जा सके।
इस निर्देश के बाद यह भी महत्वपूर्ण होगा कि जनप्रतिनिधियों के प्रस्तावों पर संबंधित विभाग कितनी तत्परता से कार्रवाई करते हैं। हालांकि, प्राथमिकता का अर्थ नियमों और निर्धारित प्रक्रियाओं से हटकर काम करना नहीं, बल्कि नियमानुसार प्रस्तावों पर समयबद्ध कार्रवाई सुनिश्चित करना है।
अब सवाल—नाराजगी दूर करने के लिए क्या करेंगे अधिकारी?
तोखन साहू के निर्देशों के बाद अब असली परीक्षा बिलासपुर और मुंगेली के प्रशासनिक तंत्र की है। कलेक्टरों और जिला पंचायत सीईओ को स्वीकृत कार्यों की प्रगति पर नजर रखने, देरी के कारणों की समीक्षा करने, आवश्यक कदम उठाने और समय-सीमा में काम पूरा कराने की जिम्मेदारी निभानी होगी।
राज्यमंत्री ने स्पष्ट संदेश दिया है कि विकास कार्य केवल स्वीकृतियों और फाइलों तक सीमित नहीं रहने चाहिए। उनका लाभ आम नागरिकों तक समय पर पहुंचना चाहिए और परियोजनाएं धरातल पर दिखाई देनी चाहिए।
