बिलासपुर में श्याम बिहारी जायसवाल ने गिनाईं केंद्र सरकार की उपलब्धियां, कांग्रेस के ‘15 पैसे’ मॉडल पर साधा निशाना; लेकिन जिला अस्पताल, सिम्स की व्यवस्था और कथित साढ़े 17 करोड़ के फर्जी सर्पदंश मुआवजा मामले पर सवाल आया तो प्रेसवार्ता से उठकर चले गए मंत्री
बिलासपुर। छत्तीसगढ़ के स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल की सोमवार को बिलासपुर में आयोजित प्रेसवार्ता उसे समय सियासी बहस का विषय बन गई, जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्र सरकार की योजनाओं की उपलब्धियों का लंबा लेखा-जोखा पेश करने के बाद पत्रकारों ने प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था और खासकर बिलासपुर के अस्पतालों से जुड़े सवाल पूछे। सिम्स और जिला अस्पताल में डॉक्टरों की कमी, दवाइयों की उपलब्धता तथा मल्टीस्पेशियलिटी अस्पताल जैसे सवालों पर मंत्री से जवाब मांगा गया, लेकिन स्पष्ट जवाब मिलने के बजाय मंत्री हाथ जोड़कर मंच से उठकर चले गए।
पहले योजनाओं का बखान, फिर स्थानीय सवालों की बारी
सेवा संकल्प अभियान के तहत बस स्टैंड रोड स्थित एक होटल में आयोजित प्रेसवार्ता में स्वास्थ्य मंत्री ने केंद्र सरकार की विभिन्न योजनाओं को गिनाते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 25 वर्षों के कार्यकाल की उपलब्धियां सामने रखीं।
उन्होंने प्रधानमंत्री जनधन योजना, प्रधानमंत्री आवास योजना, उज्ज्वला योजना, आयुष्मान भारत, नलजल योजना, खाद्यान्न योजना और किसान सम्मान निधि सहित कई योजनाओं का उल्लेख किया।
मंत्री ने कहा कि इन योजनाओं के माध्यम से आम लोगों को लाभ मिला है। उन्होंने घर-घर शौचालय, सड़क निर्माण, रेलवे कनेक्टिविटी और हाईवे विस्तार का भी उल्लेख किया। दुर्गम एवं जनजातीय क्षेत्रों में विकास कार्यों और नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में विकास के साथ नक्सलवाद से निपटने की दिशा में किए जा रहे प्रयासों को भी उन्होंने सरकार की उपलब्धियों से जोड़ा।
आयुष्मान भारत योजना के तहत 70 वर्ष से अधिक उम्र के वरिष्ठ नागरिकों के इलाज की व्यवस्था का भी उन्होंने उल्लेख किया।
यानी प्रेसवार्ता में केंद्र सरकार की योजनाओं की फेहरिस्त लंबी थी।
लेकिन इसके बाद पत्रकारों ने सवालों का रुख बिलासपुर की स्वास्थ्य व्यवस्था की ओर मोड़ दिया।
सिम्स और जिला अस्पताल पर सवाल… और बदल गया माहौल
पत्रकारों ने पूछा कि संभागीय मुख्यालय के प्रमुख सरकारी अस्पतालों में डॉक्टरों और दवाइयों की उपलब्धता को लेकर जो सवाल उठते रहे हैं, उनका समाधान कब होगा?
इसके साथ ही मल्टीस्पेशियलिटी अस्पताल को लेकर भी सवाल किया गया।
स्वास्थ्य मंत्री से जानना चाहा गया कि बिलासपुर में बेहतर और विशेषज्ञ स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर सरकार की क्या योजना है।
इन सवालों पर प्रेसवार्ता में विस्तृत जवाब सामने नहीं आया।
इसके बाद मंत्री हाथ जोड़कर मंच से उठे और चले गए।
यही घटनाक्रम प्रेसवार्ता का सबसे चर्चित हिस्सा बन गया।
पत्रकारों ने कहा—‘हम भोज के लिए नहीं आए हैं’
मंत्री के इस तरह चले जाने पर पत्रकारों ने नाराजगी जताई।
पत्रकारों का कहना था कि प्रेसवार्ता का उद्देश्य सिर्फ सरकार की उपलब्धियां बताना नहीं, बल्कि पत्रकारों के सवालों का जवाब देना भी है।
उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा—
“आपने प्रेसवार्ता आयोजित की है, आपने बुलाया है तो आपको सवालों के जवाब देना चाहिए। हम भोज के लिए नहीं आए हैं।”
इस टिप्पणी ने प्रेसवार्ता में सरकार की उपलब्धियों और जवाबदेही के बीच की बहस को और तीखा कर दिया।
‘एक रुपये में 15 पैसे’ का जिक्र, फिर साढ़े 17 करोड़ के सवाल पर चुप्पी
प्रेसवार्ता के दौरान स्वास्थ्य मंत्री ने कांग्रेस शासनकाल की व्यवस्था पर भी निशाना साधा। उन्होंने उस चर्चित राजनीतिक तर्क का उल्लेख किया, जिसमें केंद्र से भेजे गए एक रुपये में से महज 15 पैसे ही नीचे तक पहुंचने की बात कही गई थी।
लेकिन पत्रकारों ने जब बिलासपुर में सामने आए कथित फर्जी सर्पदंश मुआवजा मामले में करीब साढ़े 17 करोड़ रुपये से जुड़े सवाल किए, तो मंत्री की ओर से इस पर कोई स्पष्ट जवाब सामने नहीं आया।
यही विरोधाभास अब राजनीतिक चर्चा का विषय बन गया है।
कांग्रेस शासनकाल में पैसे के कथित बंदरबांट पर सवाल उठाने वाली सरकार से जब अपने ही क्षेत्र में करोड़ों रुपये से जुड़े मामले पर सवाल पूछा गया, तो जवाब क्यों नहीं मिला?
यह सवाल प्रेसवार्ता के बाद भी बना हुआ है।
मोदी सरकार की उपलब्धियां बनाम बिलासपुर की स्वास्थ्य व्यवस्था
प्रेसवार्ता में एक ओर केंद्र सरकार की योजनाओं की उपलब्धियां थीं, दूसरी ओर बिलासपुर की स्वास्थ्य व्यवस्था से जुड़े जमीनी सवाल।
उज्ज्वला और आवास की उपलब्धियां गिनाई गईं, लेकिन अस्पताल में दवा का सवाल अनुत्तरित रहा।
आयुष्मान भारत की उपलब्धि बताई गई, लेकिन डॉक्टरों की कमी पर जवाब नहीं मिला।
विकास और कनेक्टिविटी की बात हुई, लेकिन मल्टीस्पेशियलिटी अस्पताल पर स्थिति स्पष्ट नहीं हुई।
यही विरोधाभास प्रेसवार्ता की पूरी कहानी को राजनीतिक रंग देता दिखाई दिया।
स्वास्थ्य मंत्री के सामने अब ये सवाल
प्रेसवार्ता के बाद बिलासपुर की स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर कई सवाल फिर चर्चा में हैं—
सिम्स में डॉक्टरों की कमी को दूर करने के लिए सरकार की ठोस कार्ययोजना क्या है?
जिला अस्पताल में दवाइयों की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए क्या व्यवस्था है?
बिलासपुर के मल्टीस्पेशियलिटी अस्पताल को लेकर सरकार की वर्तमान स्थिति क्या है?
गंभीर मरीजों को विशेषज्ञ उपचार के लिए दूसरे शहरों की ओर जाने की जरूरत कब कम होगी?
कथित साढ़े 17 करोड़ रुपये के फर्जी सर्पदंश मुआवजा मामले पर सरकार की आधिकारिक स्थिति क्या है?
इन सवालों के जवाब प्रेसवार्ता में स्पष्ट रूप से सामने नहीं आ सके।
प्रेसवार्ता खत्म, लेकिन सवाल बाकी
स्वास्थ्य मंत्री ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्र सरकार की योजनाओं का लेखा-जोखा सामने रखा। सरकार की उपलब्धियां गिनाईं और कांग्रेस शासनकाल पर निशाना साधा।
लेकिन जब पत्रकारों ने चर्चा को राष्ट्रीय योजनाओं से स्थानीय स्वास्थ्य व्यवस्था की ओर मोड़ा, तो प्रेसवार्ता सवालों के जवाब मिलने से पहले ही खत्म हो गई।
बिलासपुर के लिए अब मुद्दा यही है कि सरकार की योजनाओं का आंकड़ा कितना बड़ा है, यह अपनी जगह; लेकिन अस्पताल में डॉक्टर, मरीज को दवा और गंभीर बीमारी में विशेषज्ञ इलाज कब मिलेगा—इसका जवाब कौन देगा?
फिलहाल मंत्री की प्रेसवार्ता से योजनाओं की सूची सामने आई है, लेकिन बिलासपुर के अस्पतालों से जुड़े कई सवाल अब भी जवाब का इंतजार कर रहे हैं।



