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सिम्स में ‘सेहत का डबल मिशन’… विश्व हृदय दिवस पर 250 मरीजों की BP-शुगर जांच, 32 की फाइब्रोस्कैन; अस्पताल संक्रमण नियंत्रण पर भी चला विशेष प्रशिक्षण

Mohammed Israil
Mohammed Israil  - Editor
7 Min Read

बिलासपुर | 29 सितंबर 2026
हृदय की सेहत से लेकर अस्पताल में संक्रमण की रोकथाम तक—सिम्स बिलासपुर में एक ही दिन स्वास्थ्य सुरक्षा के दो अहम मोर्चों पर बड़ा जागरूकता अभियान। विश्व हृदय दिवस के अवसर पर सेवा संकल्प अभियान–2026 के तहत छत्तीसगढ़ आयुर्विज्ञान संस्थान (सिम्स) में मरीजों की स्वास्थ्य जांच, चिकित्सकीय परामर्श और अस्पताल संक्रमण नियंत्रण को लेकर विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए गए। एक तरफ मेडिसिन ओपीडी में मरीजों को स्वस्थ हृदय के लिए खानपान और जीवनशैली का मंत्र दिया गया, तो दूसरी तरफ मेडिकल कॉलेज के पैथोलॉजी लेक्चर हॉल में अस्पताल में होने वाले संक्रमण को रोकने के लिए मेडिकल और नर्सिंग स्टाफ को व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया गया।
मरीजों की जांच से जागरूकता तक—ओपीडी में चला हेल्थ चेकअप अभियान
विश्व हृदय दिवस पर मेडिसिन विभाग की ओपीडी में आने वाले मरीजों के लिए हृदय स्वास्थ्य जागरूकता एवं परामर्श कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस दौरान करीब 250 मरीजों का बीपी और शुगर परीक्षण किया गया, जबकि 32 मरीजों की फाइब्रोस्कैन जांच की गई।
फाइब्रोस्कैन के माध्यम से मरीजों के लीवर की स्थिति का परीक्षण किया गया। साथ ही उन्हें समझाया गया कि संतुलित जीवनशैली केवल हृदय के लिए ही नहीं, बल्कि लीवर समेत पूरे शरीर के स्वास्थ्य के लिए महत्वपूर्ण है।
कार्यक्रम के दौरान सिम्स के अधिष्ठाता डॉ. रमणेश मूर्ति और चिकित्सा अधीक्षक डॉ. लखन सिंह ने मरीजों से सीधे संवाद किया और उन्हें सरल भाषा में स्वस्थ खानपान, नियमित स्वास्थ्य जांच तथा बेहतर दिनचर्या के महत्व की जानकारी दी।
प्लेट में क्या हो और क्या नहीं—डॉक्टरों ने बताया हृदय का हेल्थ फॉर्मूला
चिकित्सकों ने मरीजों को सलाह दी कि भोजन में पर्याप्त प्रोटीन, हरी सब्जियां, सलाद और फाइबर युक्त खाद्य पदार्थ शामिल किए जाएं। वहीं अत्यधिक तेल, नमक, तला-भुना भोजन और असंतुलित खानपान से बचने पर जोर दिया गया।
नियमित शारीरिक गतिविधि, पर्याप्त नींद और समय-समय पर बीपी तथा शुगर की जांच को स्वस्थ हृदय के लिए जरूरी बताया गया।
अधिष्ठाता डॉ. रमणेश मूर्ति ने कहा कि हृदय रोगों से बचाव में जागरूकता की अहम भूमिका है। बीमारी सामने आने के बाद उपचार कराने के बजाय व्यक्ति को पहले से ही अपने खानपान और जीवनशैली पर ध्यान देना चाहिए। उन्होंने बीपी, शुगर और वजन को नियंत्रित रखने की जरूरत बताई।
उन्होंने यह भी कहा कि सीने में दर्द, घबराहट, सांस लेने में परेशानी या अचानक असहजता जैसे लक्षणों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए और तत्काल चिकित्सकीय सहायता लेनी चाहिए।
‘समय की एक-एक सेकंड अहम’—सीपीआर की भी दी गई ट्रेनिंग
कार्यक्रम में निश्चेतना विभागाध्यक्ष डॉ. मधुमिता मूर्ति ने हृदयाघात की स्थिति में तत्काल सहायता के रूप में सीपीआर देने की विधि के बारे में मरीजों और उपस्थित लोगों को जानकारी दी।
उन्होंने बताया कि हृदयाघात की स्थिति में शुरुआती समय बेहद महत्वपूर्ण होता है। ऐसी परिस्थिति में घबराने के बजाय तुरंत आपातकालीन सहायता बुलानी चाहिए और सीपीआर की जानकारी होने पर प्राथमिक सहायता प्रदान करनी चाहिए।
सिम्स में संक्रमण के खिलाफ भी मोर्चा—स्टाफ को सिखाए गए रोकथाम के तरीके
विश्व हृदय दिवस के कार्यक्रम के साथ मेडिकल कॉलेज के पैथोलॉजी लेक्चर हॉल में “डिसइन्फेक्शन एंड हॉस्पिटल एक्वायर्ड इंफेक्शन कंट्रोल” विषय पर विशेष जागरूकता एवं प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया।
कार्यक्रम का आयोजन सी मैक्सो डिसइन्फेक्टेंट कंपनी की ओर से किया गया। प्रमुख वक्ता श्री योगेंद्र पाटील ने अस्पताल में होने वाले संक्रमण की रोकथाम और नियंत्रण के विभिन्न उपायों की विस्तार से जानकारी दी।
उन्होंने बताया कि अस्पताल में भर्ती मरीज पहले से किसी बीमारी से जूझ रहे होते हैं। ऐसे में उपचार के साथ यह सुनिश्चित करना भी जरूरी है कि अस्पताल में रहने के दौरान उन्हें किसी अन्य संक्रमण का सामना न करना पड़े।
इसके लिए हाथों की स्वच्छता, मरीजों की देखभाल के दौरान साफ-सफाई, उपकरणों का उचित डिसइन्फेक्शन और अस्पताल के विभिन्न क्षेत्रों की नियमित सफाई को महत्वपूर्ण बताया गया।
फर्श से उपकरण तक—हर सतह की सफाई पर जोर
प्रशिक्षण के दौरान श्री योगेंद्र पाटील ने अस्पताल में रोजाना इस्तेमाल होने वाले उपकरणों और अन्य सामग्री की सफाई तथा संक्रमणमुक्त करने की प्रक्रिया के बारे में जानकारी दी।
उन्होंने फर्श, दीवारों और मरीजों व स्टाफ के संपर्क में आने वाले स्थानों की नियमित एवं उचित सफाई के तरीके भी समझाए। संक्रमण फैलने की संभावनाओं को कम करने के लिए निर्धारित प्रक्रियाओं का पालन करने तथा डिसइन्फेक्टेंट का सही मात्रा और उचित तरीके से इस्तेमाल करने पर विशेष जोर दिया गया।
कार्यक्रम का उद्देश्य अस्पताल में मरीजों को संक्रमण से सुरक्षित रखने, स्वच्छता व्यवस्था को मजबूत करने और संक्रमण नियंत्रण की निर्धारित प्रक्रियाओं को प्रभावी ढंग से लागू करने के संबंध में मेडिकल एवं नर्सिंग टीम को व्यावहारिक जानकारी देना रहा।
डॉक्टर, नर्सिंग स्टाफ, टेक्नीशियन और विद्यार्थी रहे मौजूद
दोनों कार्यक्रमों में चिकित्सकों, मेडिकल एवं नर्सिंग स्टाफ, टेक्नीशियन, विद्यार्थियों तथा आम लोगों ने भाग लिया।
कार्यक्रम में सिम्स के अधिष्ठाता डॉ. रमणेश मूर्ति, चिकित्सा अधीक्षक डॉ. लखन सिंह, डॉ. भावना रायजादा, डॉ. सागरिका प्रधान, डॉ. हेमलता ठाकुर, डॉ. मनीष साहू, डॉ. तजमुल, डॉ. रश्मि गुप्ता, डॉ. साधना बागड़े, डॉ. अमित ठाकुर और डॉ. आशुतोष कोरी उपस्थित रहे।
नर्सिंग प्रशासन से नर्सिंग सुपरीटेंडेंट स्वाती कुमार, सरिता बहादुर, उज्जवला दास, नमिता वानी, राजकुमारी चौहान और पिकीदाश सहित नर्सिंग स्टाफ से पुष्पलता शर्मा, योगीता वर्मा, नेहा उड़ान, पलवी कौमार्य, पापीहा शाहा, उर्मिला भगत, प्रांजुल श्रीवास्तव और गरीमा पाण्डेय उपस्थित रहीं।
सिम्स का संदेश साफ—इलाज के साथ बचाव और जागरूकता भी जरूरी
विश्व हृदय दिवस पर आयोजित इन दोनों कार्यक्रमों ने स्वास्थ्य सुरक्षा के दो महत्वपूर्ण पहलुओं को सामने रखा—हृदय रोगों से बचाव के लिए समय पर जांच और जीवनशैली में सुधार, तथा अस्पताल में संक्रमण से बचाव के लिए स्वच्छता और निर्धारित संक्रमण नियंत्रण प्रक्रियाओं का पालन।
सिम्स में आयोजित कार्यक्रमों के जरिए मरीजों और स्वास्थ्यकर्मियों दोनों को यह संदेश दिया गया कि बेहतर स्वास्थ्य व्यवस्था केवल बीमारी का इलाज करने तक सीमित नहीं है। बीमारी से बचाव, समय पर जांच, सही जीवनशैली, स्वच्छता और संक्रमण नियंत्रण—ये सभी सुरक्षित और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवा के अहम हिस्से हैं।

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