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बिलासपुर में पुलिस की ‘पाठशाला’! नए कानून से साइबर क्राइम तक, 150 पुलिसकर्मियों की स्पेशल ट्रेनिंग

Mohammed Israil
Mohammed Israil  - Editor
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बिलासपुर। पुलिसिंग लगातार बदल रही है। नए आपराधिक कानून, साइबर अपराध, फॉरेंसिक तकनीक और तकनीकी संसाधनों के बढ़ते इस्तेमाल के बीच पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों को अपडेट रखने के लिए बिलासपुर में तीन दिवसीय रेंज स्तरीय रिफ्रेशर कोर्स आयोजित किया गया। रक्षित आरक्षी केंद्र स्थित चेतना हॉल में आयोजित इस प्रशिक्षण में बिलासपुर रेंज के विभिन्न जिलों से आरक्षक से लेकर निरीक्षक स्तर तक के 150 अधिकारी-कर्मचारी शामिल हुए।
यह प्रशिक्षण पुलिस महानिरीक्षक बिलासपुर रेंज श्री रामगोपाल गर्ग के निर्देश तथा उप पुलिस महानिरीक्षक/वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक बिलासपुर श्री रजनेश सिंह के मार्गदर्शन में आयोजित किया गया।
एसएसपी रजनेश सिंह ने किया शुभारंभ


तीन दिवसीय रिफ्रेशर कोर्स के प्रथम दिवस एसएसपी श्री रजनेश सिंह ने प्रशिक्षण कार्यक्रम का शुभारंभ किया। उन्होंने प्रशिक्षणार्थियों को कोर्स की उपयोगिता के साथ-साथ प्रशिक्षण के दौरान अनुशासन, गंभीरता और नवीन कानूनों में हुए महत्वपूर्ण बदलावों को समझने के निर्देश दिए।
उन्होंने कहा कि पुलिसिंग में लगातार नए कानून, तकनीक और कार्यप्रणालियां जुड़ रही हैं। ऐसे में समय-समय पर प्रशिक्षण जरूरी है। रिफ्रेशर कोर्स पुलिसकर्मियों को मैदानी कार्य के दौरान आने वाली व्यावहारिक कठिनाइयों को समझने और उनका समाधान करने में मदद करता है। इसका उद्देश्य पुलिस कार्रवाई को अधिक प्रभावी, आधुनिक और विधिसम्मत बनाना है।
आउटडोर में पीटी-परेड से लेकर बलवा ड्रिल तक
प्रशिक्षण केवल कक्षा तक सीमित नहीं रहा। आउटडोर सत्र में पुलिसकर्मियों को पीटी-परेड, शस्त्रों को खोलने-जोड़ने और बलवा नियंत्रण ड्रिल का अभ्यास कराया गया।
इन अभ्यासों के जरिए शारीरिक दक्षता, अनुशासन, टीमवर्क और कानून-व्यवस्था की चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में त्वरित कार्रवाई की क्षमता को मजबूत करने पर जोर दिया गया।
BNS, BNSS और BSA पर फोकस
रिफ्रेशर कोर्स का एक महत्वपूर्ण हिस्सा देश में लागू नवीन आपराधिक कानून रहे। प्रशिक्षणार्थियों को भारतीय न्याय संहिता (BNS), भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) और भारतीय साक्ष्य अधिनियम (BSA) के महत्वपूर्ण प्रावधानों और बदलावों की जानकारी दी गई।
कानूनों को केवल सैद्धांतिक रूप से नहीं, बल्कि व्यावहारिक उदाहरणों के माध्यम से समझाया गया, ताकि विवेचना के दौरान पुलिसकर्मियों को नए प्रावधानों को लागू करने में कठिनाई न हो और प्रकरणों की जांच में अनावश्यक विलंब से बचा जा सके।
साइबर क्राइम के दौर में साइबर सुरक्षा की ट्रेनिंग
तकनीकी अपराधों के बढ़ते स्वरूप को देखते हुए प्रशिक्षण में साइबर सुरक्षा और साइबर अपराध को भी प्रमुखता दी गई। पुलिसकर्मियों को साइबर अपराधों से संबंधित महत्वपूर्ण पहलुओं की जानकारी दी गई।
इसके साथ ही CCTNS के प्रभावी उपयोग तथा अपराध अनुसंधान में फॉरेंसिक साइंस लैबोरेटरी (FSL) की भूमिका और उपयोगिता पर भी प्रशिक्षण दिया गया।
यानी अपराध की जांच में अब केवल पारंपरिक पुलिसिंग ही नहीं, बल्कि तकनीक और वैज्ञानिक साक्ष्यों के इस्तेमाल पर भी जोर दिया गया।
तनाव से निपटने के लिए योग और फिजियोथैरेपी
पुलिसिंग में लगातार दबाव और चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों के बीच पुलिसकर्मियों के मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य को भी प्रशिक्षण का हिस्सा बनाया गया।
ब्रह्माकुमारी संस्था की स्वाति दीदी ने तनाव प्रबंधन पर विशेष सत्र लिया। इसके अलावा योग और फिजियोथैरेपी के माध्यम से तनाव कम करने, शारीरिक स्वास्थ्य बेहतर रखने और कार्य के दौरान मानसिक संतुलन बनाए रखने के संबंध में जानकारी और अभ्यास कराया गया।
समापन में पहुंचे IG रामगोपाल गर्ग, प्रशिक्षणार्थियों से सीधा संवाद
रिफ्रेशर कोर्स के समापन सत्र में पुलिस महानिरीक्षक बिलासपुर रेंज श्री रामगोपाल गर्ग ने प्रशिक्षणार्थियों से सीधे संवाद किया। उन्होंने पुलिस कार्यप्रणाली और विवेचना से जुड़े सवाल पूछे तथा प्रशिक्षण के दौरान हासिल जानकारी और अनुभवों को जाना।
आईजी गर्ग ने विशेष रूप से बीट सिस्टम की उपयोगिता पर चर्चा की।
उन्होंने बताया कि प्रभावी बीट पुलिसिंग से पुलिस को अपने क्षेत्र की गतिविधियों, संदिग्ध व्यक्तियों और स्थानीय परिस्थितियों की लगातार जानकारी मिलती है। यह जानकारी अपराध की रोकथाम के साथ-साथ अपराधियों की पहचान में भी महत्वपूर्ण साबित हो सकती है।
ज्वेलरी शॉप लूट का उदाहरण देकर समझाई बीट पुलिसिंग की ताकत
आईजी श्री रामगोपाल गर्ग ने ज्वेलरी शॉप में हुई लूट की घटना का उदाहरण देते हुए बताया कि बीट सिस्टम के माध्यम से प्राप्त स्थानीय स्तर की जानकारी और पुलिस के समन्वित प्रयासों से घटना के आरोपियों की पहचान दो दिनों के भीतर करने में सहायता मिली।
उन्होंने इस उदाहरण के जरिए पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों को संदेश दिया कि बीट सिस्टम को केवल नियमित पुलिसिंग की औपचारिक प्रक्रिया के रूप में न देखा जाए, बल्कि इसे अपराध नियंत्रण, स्थानीय सूचना तंत्र और त्वरित पुलिस कार्रवाई का महत्वपूर्ण माध्यम बनाया जाए।
पुलिस और जनता के बीच संवाद पर भी जोर
समापन सत्र में सामुदायिक पुलिसिंग पर भी विस्तार से चर्चा हुई। पुलिस और आम नागरिकों के बीच विश्वास, संवाद और बेहतर समन्वय स्थापित करने के साथ स्थानीय समुदाय की सहभागिता से अपराध रोकथाम और कानून-व्यवस्था को मजबूत बनाने के विभिन्न पहलुओं पर प्रशिक्षणार्थियों से चर्चा की गई।
प्रशस्ति पत्र देकर किया सम्मानित
तीन दिवसीय रेंज स्तरीय रिफ्रेशर कोर्स के अंत में इसमें शामिल सभी प्रशिक्षणार्थियों को प्रशस्ति पत्र प्रदान कर सम्मानित किया गया।
इस प्रशिक्षण के जरिए बिलासपुर रेंज के पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों को नवीन आपराधिक कानून, विवेचना, साइबर सुरक्षा, CCTNS, FSL, पीटी-परेड, शस्त्र प्रशिक्षण, बलवा नियंत्रण, तनाव प्रबंधन, योग, फिजियोथैरेपी, बीट पुलिसिंग और सामुदायिक पुलिसिंग जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर अपडेट किया गया।
क्राइम पेट्रोल मीडिया के लिए बड़ी तस्वीर यही है कि बदलते अपराध के साथ पुलिसिंग के तौर-तरीके भी बदल रहे हैं—और बिलासपुर रेंज में इस प्रशिक्षण के जरिए कानून, तकनीक, फॉरेंसिक जांच, फील्ड पुलिसिंग और सामुदायिक संवाद को एक साथ मजबूत करने की कवायद की गई है।

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