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बिलासपुर में 17 मांगों को लेकर सिम्स के जूनियर डॉक्टरों का प्रदर्शन, 180 डॉक्टर तीन दिन करेंगे आंदोलन, मांगें नहीं मानीं तो इमरजेंसी सेवाएं बंद करने की चेतावनी

Mohammed Israil
Mohammed Israil  - Editor
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बिलासपुर। छत्तीसगढ़ आयुर्विज्ञान संस्थान (CIMS) बिलासपुर में 17 सूत्रीय मांगों को लेकर जूनियर डॉक्टरों ने एक बार फिर आंदोलन शुरू कर दिया है। करीब 180 जूनियर डॉक्टर 24 से 26 सितंबर तक तीन दिवसीय सांकेतिक प्रदर्शन कर रहे हैं। डॉक्टरों का कहना है कि पिछले करीब छह महीने से मांगों को लेकर शासन स्तर पर बातचीत और आश्वासन का दौर चल रहा है, लेकिन अब तक मांगों पर ठोस निर्णय नहीं लिया गया है।
जूनियर डॉक्टरों के मुताबिक, इससे पहले भी मांगों को लेकर आंदोलन किया गया था। उस दौरान शासन की ओर से मांगों पर कार्रवाई का आश्वासन मिलने के बाद आंदोलन समाप्त कर दिया गया था। लेकिन मांगों का निराकरण नहीं होने के बाद डॉक्टरों ने दोबारा प्रदर्शन शुरू किया है।


स्टाइपेंड बढ़ाने समेत 17 मांगें
जूनियर डॉक्टरों की प्रमुख मांगों में स्टाइपेंड में बढ़ोतरी, पड़ोसी राज्यों के समान स्टाइपेंड तय करना और सुपर स्पेशलिटी कैडर का गठन शामिल है। डॉक्टरों का कहना है कि वर्तमान में उन्हें करीब 15,900 रुपए प्रतिमाह स्टाइपेंड मिल रहा है। उनका दावा है कि यह राशि महंगाई और दूसरे राज्यों में मिलने वाले स्टाइपेंड की तुलना में कम है।


डॉक्टरों का कहना है कि लंबे समय तक मेडिकल शिक्षा और प्रशिक्षण पूरा करने के बाद भी उन्हें अपेक्षाकृत कम स्टाइपेंड मिल रहा है। इसी को लेकर प्रदेशभर के जूनियर डॉक्टर लगातार शासन का ध्यान आकर्षित कर रहे हैं।


प्रदेश में करीब 1200 डॉक्टर आंदोलन में


जूनियर डॉक्टरों के अनुसार प्रदेश स्तर पर करीब 1200 जूनियर डॉक्टर इस आंदोलन से जुड़े हैं। CIMS बिलासपुर में करीब 180 डॉक्टर प्रदर्शन में शामिल हैं। फिलहाल डॉक्टरों ने नियमित सेवाएं जारी रखी हैं, ताकि अस्पताल आने वाले मरीजों को तत्काल परेशानी का सामना न करना पड़े।


मांगें नहीं मानीं तो बढ़ेगा आंदोलन
जूनियर डॉक्टरों ने स्पष्ट किया है कि मौजूदा प्रदर्शन के बावजूद यदि सरकार ने उनकी मांगों पर जल्द निर्णय नहीं लिया तो आंदोलन को आगे बढ़ाया जा सकता है। डॉक्टरों ने पूर्णकालिक हड़ताल के साथ इमरजेंसी सेवाएं बंद करने तक की चेतावनी दी है।


अब निगाहें शासन के अगले कदम पर हैं। यदि सरकार और जूनियर डॉक्टरों के बीच जल्द सहमति नहीं बनी तो CIMS समेत प्रदेश की स्वास्थ्य सेवाओं पर आंदोलन का असर बढ़ सकता है।

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