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बिलासपुर कांग्रेस के मंच से महिला चेहरा गायब, भाजपा ने स्मृति ईरानी को छत्तीसगढ़ की कमान देकर बढ़ाया महिला नेतृत्व

Mohammed Israil
Mohammed Israil  - Editor
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बिलासपुर। छत्तीसगढ़ की राजनीति में संगठन को लेकर दोनों प्रमुख दलों की गतिविधियां तेज हैं। एक तरफ भारतीय जनता पार्टी ने संगठनात्मक स्तर पर बड़ा फेरबदल करते हुए पूर्व केंद्रीय मंत्री एवं राष्ट्रीय महामंत्री स्मृति ईरानी को छत्तीसगढ़ का प्रभारी बनाया है, वहीं दूसरी ओर कांग्रेस अपने संगठन सृजन अभियान के जरिए जिला, ब्लॉक और मंडल स्तर पर संगठन को नए सिरे से सक्रिय करने की कवायद में जुटी है। इन दोनों घटनाक्रमों के बीच बिलासपुर की कांग्रेस राजनीति में एक अलग सवाल भी दिखाई देता है—संगठनात्मक मंचों पर महिला नेताओं की दृश्य मौजूदगी कितनी है?
23 सितंबर को भाजपा ने देशभर के राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के लिए संगठनात्मक प्रभारियों एवं सह-प्रभारियों की नियुक्ति की। इसी क्रम में स्मृति ईरानी को छत्तीसगढ़ और हरियाणा का प्रभारी बनाया गया, जबकि सिद्धार्थ शंभू को छत्तीसगढ़ का सह-प्रभारी नियुक्त किया गया।
छत्तीसगढ़ के राजनीतिक परिदृश्य में यह नियुक्ति इसलिए भी उल्लेखनीय है क्योंकि राज्य भाजपा की संगठनात्मक जिम्मेदारी अब राष्ट्रीय स्तर की एक प्रमुख महिला नेता के हाथों में आई है। स्मृति ईरानी इससे पहले केंद्र सरकार में मंत्री रह चुकी हैं और अगस्त 2026 में भाजपा की राष्ट्रीय टीम में राष्ट्रीय महामंत्री के रूप में उनकी वापसी हुई थी।
इधर बिलासपुर में कांग्रेस की संगठनात्मक बैठक, मंच पर दिखे पुराने और नए चेहरे
कांग्रेस के संगठन सृजन अभियान के तहत बिलासपुर शहर जिला कांग्रेस कमेटी की महत्वपूर्ण संगठनात्मक बैठक आयोजित की गई। अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के सचिव एवं छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस के सह-प्रभारी विजय जांगिड़ ने नव नियुक्त पदाधिकारियों, ब्लॉक एवं मंडल अध्यक्षों, पार्षदों तथा पार्षद प्रत्याशियों के साथ बैठक की।
बैठक को बिलासपुर शहर कांग्रेस संगठन के पुनर्गठन के बाद की पहली महत्वपूर्ण संगठनात्मक बैठक के रूप में प्रस्तुत किया गया। कांग्रेस की ओर से जारी जानकारी के मुताबिक इसमें वरिष्ठ कांग्रेसजन, शहर कमेटी के पदाधिकारी, सभी ब्लॉक एवं मंडल अध्यक्ष तथा पार्षद मौजूद रहे।
विजय जांगिड़ ने कहा कि संगठन सृजन अभियान केवल पदों को भरने की प्रक्रिया नहीं, बल्कि कांग्रेस की बुनियाद को मजबूत करने की सोच है। उनके मुताबिक अभियान के माध्यम से जमीनी स्तर पर संगठन के प्रति समर्पित कार्यकर्ताओं को नेतृत्व की जिम्मेदारी दी गई है।
बिलासपुर में कांग्रेस संगठन के प्रशिक्षण और पुनर्गठन की प्रक्रिया हाल के दिनों में लगातार चर्चा में रही है। इससे पहले 10 से 12 सितंबर तक बिलासपुर संभाग के ब्लॉक कांग्रेस अध्यक्षों और मास्टर ट्रेनर्स का तीन दिवसीय प्रशिक्षण शिविर भी आयोजित किया गया था, जिसमें प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज, नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत और प्रदेश कांग्रेस की सह-प्रभारी जरिता लैतफ्लांग सहित वरिष्ठ नेता शामिल हुए थे।
लेकिन बैठक की सूची में महिला चेहरों की संख्या कितनी?
यहीं से बिलासपुर कांग्रेस के संगठनात्मक ढांचे को लेकर एक अलग राजनीतिक सवाल सामने आता है। बैठक में मौजूद नेताओं की कांग्रेस द्वारा जारी सूची में बड़ी संख्या में पुरुष पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं के नाम हैं। सूची में रश्मि सिंह, सीमा घृतेश, स्वर्णा शुक्ला, मीनू सूर्यवंशी और एंजल चोकसे सहित कुछ महिला नाम भी दर्ज हैं।
लेकिन पूरी सूची पर नजर डालने पर पुरुष पदाधिकारियों की संख्या की तुलना में महिला नाम अपेक्षाकृत कम दिखाई देते हैं। यही दृश्य अंतर कांग्रेस के शहर संगठन, महिला कांग्रेस और यूथ कांग्रेस में महिलाओं की सार्वजनिक राजनीतिक मौजूदगी को लेकर चर्चा की गुंजाइश पैदा करता है।
यहां एक महत्वपूर्ण अंतर भी है—किसी बैठक में किसी नेता की अनुपस्थिति को संगठन में उसकी निष्क्रियता का प्रमाण नहीं माना जा सकता। इसी तरह केवल मंच या उपस्थिति सूची देखकर किसी संगठन में महिलाओं की वास्तविक सदस्य संख्या, जिम्मेदारियां अथवा जमीनी सक्रियता का आकलन भी नहीं किया जा सकता। फिर भी राजनीतिक मंचों पर कौन दिखाई दे रहा है और किस अनुपात में दिखाई दे रहा है, यह अपने आप में पार्टी की सार्वजनिक राजनीतिक तस्वीर का हिस्सा बन जाता है।

बिलासपुर भाजपा महिला मोर्चा की सक्रियता भी राजनीतिक तस्वीर का हिस्सा
बिलासपुर में भाजपा का महिला मोर्चा लंबे समय से पार्टी की गतिविधियों में अलग संगठनात्मक इकाई के रूप में दिखाई देता रहा है। विभिन्न राजनीतिक एवं संगठनात्मक कार्यक्रमों में महिला मोर्चा की भागीदारी भाजपा के स्थानीय संगठनात्मक ढांचे का हिस्सा है। दूसरी तरफ कांग्रेस के मौजूदा संगठनात्मक कार्यक्रम में महिला कांग्रेस और यूथ कांग्रेस की सक्रियता का प्रश्न राजनीतिक चर्चा में इसलिए आता है क्योंकि संगठन सृजन अभियान का घोषित उद्देश्य जमीनी स्तर तक संगठन को मजबूत करना है।
कांग्रेस की मौजूदा बैठक में महिला प्रतिनिधित्व के नामों का मौजूद होना यह बताता है कि महिला कार्यकर्ता संगठनात्मक ढांचे से बाहर नहीं हैं। लेकिन बैठक की जारी सूची और मंचीय तस्वीरों में उनकी दृश्य मौजूदगी पुरुष पदाधिकारियों की तुलना में कितनी है—यही वह बिंदु है जिस पर स्थानीय कांग्रेस की संगठनात्मक राजनीति को लेकर चर्चा केंद्रित हो सकती है।
कांग्रेस की बैठक में भाजपा सरकार पर निशाना
बैठक में विजय जांगिड़ ने भाजपा सरकार की नीतियों पर भी हमला बोला। उन्होंने कहा कि प्रदेश की जनता सरकार की नीतियों से परेशान है। उनके आरोपों में किसान, छात्र, मजदूर और व्यापारी वर्ग से जुड़े मुद्दों के साथ खाद, बीज, नौकरी, रोजगार, स्कूलों और महंगाई का उल्लेख किया गया।
जांगिड़ ने दावा किया कि जनता ने भाजपा सरकार को सत्ता से हटाने का मन बना लिया है और कांग्रेस आगामी चुनाव पूरी एकजुटता एवं जोश के साथ लड़ेगी। ये कांग्रेस सह-प्रभारी के राजनीतिक दावे हैं; बैठक में भाजपा सरकार की नीतियों और आगामी चुनाव को लेकर कांग्रेस का यही राजनीतिक नैरेटिव सामने आया।
लंबी सूची, लेकिन महिला उपस्थिति सीमित दायरे में
बैठक में सिद्धांशु मिश्रा, महेंद्र गंगोत्री, दिलीप लहरिया, रश्मि सिंह, राजेंद्र शुक्ला, विजय पांडे, नरेंद्र बोलर, रविंद्र सिंह, देवेंद्र सिंह, पंकज सिंह, स्वप्निल शुक्ला, अशोक राजावल, राजेंद्र साहू, अभयनारायण राय, समीर अहमद, लक्की यादव, सीमा घृतेश, तज्जमूल हक, साकेश मिश्रा, संतोष गर्ग, हितेश देवांगन, शेख दुलारे, अमित भारते, स्वर्णा शुक्ला, बद्री यादव, अखिलेश गुप्ता, गौरव ऐरी, राजीव रतन सिंह, फरीद खान, अनस खोखर, विनोद साहू, हरमेंद्र शुक्ला, प्रवेश पटवा, राकेश यादव, गजेंद्र श्रीवास्तव, अनिल पांडे, सुबोध केसरी, मनोज शर्मा, राजा व्यास, राहुल वाधवानी, दीपक कौशिक, बॉबी थॉमस, तस्लीम अहमद, नरेंद्र टंडन, मीनू सूर्यवंशी, आदित्य सिंह, लखन नागदेव, राजू सूर्यवंशी, जुगल गोयल, सुनील सोनखर, रामा बघेल, पुष्पेंद्र साहू, ब्रह्मदेव सिंह, हिमांशु कश्यप, शैलेंद्र जायसवाल, परदेसी राज, राजकुमार यादव, सुरेंद्र तिवारी, शादाब खान, आशीष कौशिक, अभिलाष रजक, पवन साहू, अन्नू पांडे, एंजल चोकसे, बिंदु जायेसी, हैरी डेनियल, बापी डे, सुनील सोनार, विनय रात्रे, देव वर्मा, मो. शाहनवाज, बबलू मगर, मनोज सिंह, शिरीष कश्यप, बलविंदर सिंह, निखिल शर्मा, संतोष प्रजापति, कौशिक धर, ऋषभ साहू सहित बड़ी संख्या में कांग्रेसजन उपस्थित रहे।
इस सूची में महिला नाम मौजूद हैं, लेकिन पुरुष नामों की तुलना में उनका प्रतिनिधित्व सीमित दिखाई देता है। यही अंतर बिलासपुर कांग्रेस के शहर संगठन बनाम महिला कांग्रेस बनाम यूथ कांग्रेस के संगठनात्मक चेहरे को लेकर राजनीतिक बहस का एक बिंदु बनता है।
एक तरफ कांग्रेस संगठन सृजन अभियान के जरिए बूथ और मंडल स्तर तक संगठन को मजबूत करने की प्रक्रिया में है, दूसरी तरफ भाजपा ने छत्तीसगढ़ जैसे महत्वपूर्ण राज्य की संगठनात्मक जिम्मेदारी राष्ट्रीय स्तर की महिला नेता स्मृति ईरानी को दी है।
बिलासपुर की इस बैठक ने इसलिए केवल संगठनात्मक पुनर्गठन की तस्वीर सामने नहीं रखी, बल्कि राजनीतिक मंचों पर महिला प्रतिनिधित्व की दृश्यता से जुड़े सवाल को भी चर्चा के केंद्र में ला दिया है—जिसका वास्तविक जवाब पार्टी के संगठनात्मक ढांचे, नियुक्तियों और आने वाले कार्यक्रमों की तस्वीर में ही दिखाई देगा।

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