


14 अगस्त की शिकायत से 18 सितंबर तक कार्रवाई पर सवाल | पीड़ितों का आरोप—निवेश के नाम पर नगद रकम ली गई, वापसी नहीं हुई | जांच और FIR की मांग
बिलासपुर। क्रिप्टोकरेंसी और ब्लॉकचेन में निवेश के नाम पर कथित करोड़ों रुपये की ठगी का मामला अब एक बार फिर पुलिस महानिरीक्षक, बिलासपुर रेंज के दरवाजे तक पहुंच गया है। शिकायतकर्ताओं ने पुनः आवेदन देकर पूरे मामले की जांच, आवश्यक होने पर FIR और वैधानिक कार्रवाई की मांग की है। मामला इसलिए भी गंभीर आरोपों के घेरे में है, क्योंकि शिकायत में केवल क्रिप्टो निवेश ही नहीं, बल्कि नगद राशि, जमीन-मकान-फ्लैट और सोने की कथित गारंटी, भारी मुनाफे का भरोसा और MLM नेटवर्क के जरिए लोगों को जोड़ने का भी उल्लेख किया गया है।
शिकायतकर्ताओं के मुताबिक, लोगों को निवेश के साथ-साथ टीम तैयार करने और नए सदस्यों को जोड़ने पर आकर्षक कमीशन का भरोसा दिया गया। इतना ही नहीं, 10 साल तक करियर और उज्ज्वल भविष्य का सपना दिखाकर भी निवेश के लिए प्रेरित किए जाने का आरोप लगाया गया है।
लेकिन इस पूरी कहानी में एक अहम सवाल शिकायतकर्ताओं ने खुद उठाया है—जब 14 अगस्त 2026 को पुलिस महानिरीक्षक और पुलिस अधीक्षक के समक्ष शिकायत दी जा चुकी थी, तो 18 सितंबर 2026 तक मामले में कानूनी कार्रवाई क्यों नहीं हुई?
कैश से क्रिप्टो तक—शिकायत में क्या है पूरा आरोप?
पीड़ित सदस्यगणों की ओर से प्रस्तुत शिकायत के अनुसार, बड़ी संख्या में लोगों को क्रिप्टो और ब्लॉकचेन आधारित निवेश के नाम पर केवल नगद राशि निवेश करने के लिए प्रेरित किया गया।
शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि निवेशकों को उनकी रकम के बदले जमीन, मकान, फ्लैट और सोना जैसी संपत्तियों की गारंटी का भरोसा दिलाया गया। साथ ही अधिक मुनाफे का लालच देकर यह विश्वास दिलाए जाने का आरोप है कि निवेश सुरक्षित रहेगा और बेहतर रिटर्न प्राप्त होगा।
शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया है कि निवेश मॉडल केवल पैसा लगाने तक सीमित नहीं था। लोगों को दूसरे व्यक्तियों को जोड़कर टीम बनाने और MLM यानी नेटवर्क मार्केटिंग मॉडल के जरिए आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया गया तथा आकर्षक कमीशन का भरोसा दिया गया।
10 साल के करियर और उज्ज्वल भविष्य का दावा
शिकायत में एक और महत्वपूर्ण आरोप सामने आया है।
पीड़ितों के अनुसार, निवेशकों को केवल तत्काल आर्थिक लाभ का सपना नहीं दिखाया गया, बल्कि 10 साल तक करियर और उज्ज्वल भविष्य का भरोसा दिलाकर इस निवेश व्यवस्था से जुड़ने के लिए प्रेरित किया गया।
शिकायतकर्ताओं का कहना है कि इस तरह निवेश, मुनाफे और नेटवर्क विस्तार को एक साथ जोड़कर लोगों को बड़ी रकम लगाने के लिए तैयार किया गया।
शिकायत में किन नामों और संस्थाओं का उल्लेख?
शिकायत में बिलासपुर निवासी सोमेंद्र कश्यप उर्फ सोम चंद्र कश्यप, पिता दयाराम कश्यप, निवासी पटवारी प्रशिक्षण केंद्र के पास, राजकिशोर नगर, चिंगराजपारा, बिलासपुर, तहसील एवं जिला बिलासपुर, छत्तीसगढ़ का नाम दर्ज होने की बात कही गई है।
शिकायत के मुताबिक उन्हें डायरेक्टर/पार्टनर्स, इम्पीरियल सिटी डेवलपर्स तथा स्वर्ण शिखर अपार्टमेंट DCT रियल एस्टेट डेवलपर्स, बिलासपुर छत्तीसगढ़ से संबंधित बताया गया है।
इसके अलावा शिकायत में मंगल तिवारी, नागपुर महाराष्ट्र का भी उल्लेख किया गया है।
शिकायतकर्ताओं ने निवेश कारोबार के संदर्भ में POLK DAO FOUNDATION, COLORADO, USA, POLK CHAIN ब्लॉकचेन तथा P2AI COIN/TOKEN का भी उल्लेख किया है।
इन सभी नामों और संस्थाओं की भूमिका क्या रही, निवेश की वास्तविक संरचना क्या थी और शिकायत में लगाए गए आरोपों में कितनी सच्चाई है—यह अब पुलिस जांच का विषय है।
कहां गया निवेश का पैसा?
शिकायतकर्ताओं का सबसे गंभीर आरोप निवेश की रकम की वापसी को लेकर है।
उनका कहना है कि क्रिप्टो और ब्लॉकचेन के नाम पर बड़ी रकम नगद में निवेश कराई गई, लेकिन बाद में कथित तौर पर निवेशित राशि वापस नहीं मिली।
इसी आधार पर पीड़ितों ने पूरे मामले में कई बिंदुओं की जांच की मांग की है—
निवेशकों से रकम किस प्रक्रिया के तहत ली गई?
नगद लेन-देन किस तरह हुआ?
रकम किन व्यक्तियों या संस्थाओं तक पहुंची?
जमीन, मकान, फ्लैट और सोने की कथित गारंटी का वास्तविक आधार क्या था?
निवेश पर भारी मुनाफे का भरोसा किस आधार पर दिया गया?
MLM मॉडल के जरिए कितने लोगों को जोड़ा गया?
कमीशन की व्यवस्था किस प्रकार संचालित हुई?
क्रिप्टो और ब्लॉकचेन प्रोजेक्ट्स से निवेश का वास्तविक संबंध क्या था?
निवेशकों की रकम वापस क्यों नहीं मिली?
शिकायतकर्ताओं ने इन्हीं पहलुओं की जांच की मांग पुलिस के समक्ष रखी है।
14 अगस्त की शिकायत, 18 सितंबर को फिर गुहार
मामले का एक महत्वपूर्ण पहलू शिकायत की समय-सीमा को लेकर है।
पीड़ित सदस्यगणों के अनुसार, उन्होंने 14 अगस्त 2026 को पुलिस महानिरीक्षक, बिलासपुर रेंज, बिलासपुर और पुलिस अधीक्षक, बिलासपुर के समक्ष शिकायत प्रस्तुत की थी।
शिकायतकर्ताओं का कहना है कि 18 सितंबर 2026 तक कोई कानूनी कार्रवाई नहीं हुई।
इसके बाद पीड़ितों ने अब पुलिस महानिरीक्षक के समक्ष पुनः आवेदन प्रस्तुत कर मामले में कार्रवाई की मांग की है।
यानी करीब एक महीने से अधिक समय के अंतराल के बाद मामला दोबारा पुलिस के वरिष्ठ स्तर पर पहुंचा है।
पीड़ितों की मांग—जांच से लेकर FIR तक
पुनः दिए गए आवेदन में पीड़ित सदस्यगणों ने पुलिस महानिरीक्षक से पूरे मामले पर ध्यान देते हुए कार्रवाई की मांग की है।
उनकी प्रमुख मांगों में शामिल हैं—
शिकायत की जांच कराई जाए।
कथित निवेश और नगद लेन-देन की जांच की जाए।
संबंधित व्यक्तियों और संस्थाओं की भूमिका की जांच की जाए।
आवश्यक होने पर FIR दर्ज की जाए।
पूरे मामले में वैधानिक कार्रवाई की जाए।
पीड़ित सदस्यों को न्याय दिलाया जाए।
इस शिकायत के पीछे छिपे बड़े सवाल
इस पूरे मामले में फिलहाल आरोप शिकायतकर्ताओं की ओर से लगाए गए हैं। इसलिए असली तस्वीर पुलिस जांच और दस्तावेजी साक्ष्यों के सामने आने के बाद ही स्पष्ट होगी।
फिर भी शिकायत में उठाए गए बिंदु जांच के लिहाज से कई महत्वपूर्ण सवाल खड़े करते हैं—निवेश का पैसा किसके पास गया, किस माध्यम से गया, कथित गारंटी का वास्तविक स्वरूप क्या था, क्रिप्टो/ब्लॉकचेन परियोजनाओं से इसका वास्तविक संबंध क्या था और निवेशकों को रकम वापस क्यों नहीं मिली?
इन सवालों के जवाब शिकायत में लगाए गए आरोपों की जांच के दौरान सामने आने हैं।
बिलासपुर में क्रिप्टो और ब्लॉकचेन निवेश के नाम पर करोड़ों रुपये की कथित ठगी का आरोप अब एक बार फिर पुलिस महानिरीक्षक तक पहुंचा है।
शिकायत में नगद निवेश से लेकर जमीन, मकान, फ्लैट और सोने की कथित गारंटी, भारी मुनाफे का भरोसा, MLM नेटवर्क के जरिए टीम बनाने पर कमीशन और 10 साल तक करियर के सपने का जिक्र है।
शिकायत में सोमेंद्र कश्यप उर्फ सोम चंद्र कश्यप, मंगल तिवारी, इम्पीरियल सिटी डेवलपर्स, स्वर्ण शिखर अपार्टमेंट DCT रियल एस्टेट डेवलपर्स, POLK DAO FOUNDATION, POLK CHAIN ब्लॉकचेन और P2AI COIN/TOKEN सहित कई नामों और संस्थाओं का उल्लेख किया गया है।
पीड़ितों का आरोप है कि बड़ी रकम निवेश कराने के बाद उन्हें उनकी रकम वापस नहीं मिली।
सबसे अहम सवाल शिकायतकर्ताओं ने पुलिस कार्रवाई को लेकर उठाया है—14 अगस्त को शिकायत के बाद 18 सितंबर तक क्या कार्रवाई हुई?
अब पीड़ितों ने दोबारा IG से गुहार लगाई है—निवेश की जांच हो, नगद लेन-देन की जांच हो, संबंधित लोगों और संस्थाओं की भूमिका सामने लाई जाए और आवश्यक होने पर FIR दर्ज कर कानूनी कार्रवाई की जाए।
फिलहाल शिकायत में लगाए गए आरोपों की पुष्टि पुलिस जांच से होना बाकी है और संबंधित पक्षों का पक्ष भी सामने आना बाकी है।



