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चार साल से टेढ़े पैर के साथ जी रहा था कन्हैया, सिम्स में जटिल लिम्ब रिकंस्ट्रक्शन सर्जरी से मिली नई उम्मीद

Mohammed Israil
Mohammed Israil  - Editor
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सड़क हादसे के बाद संक्रमण और कई चरणों के उपचार से गुजरा मरीज; सिम्स की ऑर्थोपेडिक्स टीम ने जटिल सर्जरी कर पैर की संरचना और कार्यक्षमता सुधारने का प्रयास किया
बिलासपुर। छत्तीसगढ़ आयुर्विज्ञान संस्थान (सिम्स), बिलासपुर के ऑर्थोपेडिक्स विभाग ने एक जटिल लिम्ब रिकंस्ट्रक्शन सर्जरी सफलतापूर्वक की है। करीब चार वर्ष पहले सड़क दुर्घटना में गंभीर रूप से घायल हुए मरीज कन्हैया के बाएं पैर में उपचार के बाद उत्पन्न हुई विकृति को सुधारने के लिए यह चुनौतीपूर्ण सर्जरी की गई। ऑपरेशन के बाद मरीज की स्थिति संतोषजनक बताई गई है और उसे चिकित्सकीय निगरानी में रखा गया है।
यह मामला इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि दुर्घटना के बाद मरीज को लंबे समय तक उपचार के अलग-अलग चरणों से गुजरना पड़ा। प्रारंभिक उपचार के दौरान पैर में रॉड और प्लेट लगाई गई, लेकिन बाद में जटिलताओं और संक्रमण के कारण उपचार की प्रक्रिया को बदलना पड़ा। इसके बाद एक्सटर्नल फिक्सेटर की मदद से पैर का उपचार किया गया। लगभग एक वर्ष बाद एम्स रायपुर में एक्सटर्नल फिक्सेटर हटाया गया। इसके बाद मरीज के पैर में टेढ़ापन और विकृति विकसित हो गई, जिससे उसे पैर पर वजन डालने और सामान्य रूप से चलने में परेशानी होने लगी।
चार साल पहले सड़क हादसे ने बदल दी थी जिंदगी
कन्हैया करीब चार वर्ष पहले सड़क दुर्घटना में गंभीर रूप से घायल हुए थे। हादसे में उनके बाएं पैर में गंभीर फ्रैक्चर हुआ। शुरुआती उपचार निजी अस्पताल में कराया गया, जहां पैर में रॉड एवं प्लेट लगाई गई।
बाद में उपचार के दौरान जटिलताएं सामने आईं और संक्रमण की स्थिति के कारण आगे के उपचार में एक्सटर्नल फिक्सेटर का सहारा लिया गया। लगभग एक वर्ष बाद एक्सटर्नल फिक्सेटर को एम्स रायपुर में हटाया गया। इसके बाद पैर की संरचना में टेढ़ापन और विकृति विकसित हो गई।
विकृति बढ़ने के साथ मरीज के लिए पैर पर वजन डालना और सामान्य रूप से चलना मुश्किल होता गया। पैर की कार्यक्षमता में लगातार आ रही कमी के बाद मरीज को उपचार के लिए सिम्स बिलासपुर लाया गया।
सिम्स की टीम ने किया विस्तृत मूल्यांकन
सिम्स पहुंचने के बाद ऑर्थोपेडिक्स विभाग की टीम ने मरीज की स्थिति का विस्तृत चिकित्सकीय मूल्यांकन किया। पैर की संरचना में मौजूद विकृति और उसकी कार्यक्षमता को देखते हुए चिकित्सकों ने प्रभावित अंग की संरचना को सुधारने और कार्यक्षमता बेहतर करने के उद्देश्य से लिम्ब रिकंस्ट्रक्शन सर्जरी करने का निर्णय लिया।
यह सामान्य ऑर्थोपेडिक प्रक्रिया से अलग चुनौतीपूर्ण सर्जरी थी, क्योंकि मरीज पहले ही गंभीर फ्रैक्चर, संक्रमण, रॉड-प्लेट और एक्सटर्नल फिक्सेटर जैसे उपचारों से गुजर चुका था। ऐसे मामले में प्रभावित पैर की वर्तमान स्थिति का आकलन कर उसके अनुरूप सर्जिकल उपचार की योजना तैयार करना आवश्यक था।
विशेषज्ञ टीम की निगरानी में हुई सर्जरी
सर्जरी ऑर्थोपेडिक्स विभागाध्यक्ष डॉ. ए.आर. बेन के निर्देशन में की गई। ऑपरेशन टीम में डॉ. संजय घीले, डॉ. सोमेश शुक्ला, पीजी रेजिडेंट डॉ. आकर्ष गुप्ता, डॉ. राहुल एवं उनकी टीम शामिल रही।
सर्जरी के दौरान एनेस्थीसिया टीम ने भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। डॉ. मधुमिता मूर्ति, डॉ. मिल्टन एवं डॉ. श्वेता ने एनेस्थीसिया संबंधी सेवाएं दीं। चिकित्सकीय टीम के सामूहिक प्रयास से जटिल सर्जरी सफलतापूर्वक पूरी की गई।
सर्जरी का प्रमुख उद्देश्य प्रभावित पैर की संरचना एवं कार्यक्षमता में सुधार करना और मरीज को बेहतर गतिशीलता उपलब्ध कराने की दिशा में उपचार करना रहा।
आयुष्मान भारत योजना के तहत हुआ निःशुल्क उपचार
मरीज का संपूर्ण उपचार आयुष्मान भारत योजना के अंतर्गत पूर्णतः निःशुल्क किया गया। इससे जटिल और महंगी मानी जाने वाली ऑर्थोपेडिक सर्जरी का लाभ मरीज को संस्थान में ही उपलब्ध हुआ।
सिम्स की टीम के अनुसार ऐसे मामलों में सर्जरी के बाद की देखभाल भी उपचार का महत्वपूर्ण हिस्सा है। कन्हैया को चिकित्सकीय निगरानी में रखा गया है और आगे नियमित फॉलो-अप तथा फिजियोथेरेपी के माध्यम से रिकवरी की प्रक्रिया जारी रहेगी।
अधिष्ठाता बोले- जटिल मामलों के उपचार में टीम वर्क महत्वपूर्ण
सिम्स के अधिष्ठाता डॉ. रमणेश मूर्ति ने कहा कि संस्थान में गंभीर और जटिल मामलों के उपचार के लिए विभिन्न विशेषज्ञ विभागों की टीमें समन्वय के साथ काम कर रही हैं। उन्होंने कहा कि लिम्ब रिकंस्ट्रक्शन जैसी चुनौतीपूर्ण सर्जरी का सफल परिणाम मरीजों को बेहतर उपचार उपलब्ध कराने की दिशा में सिम्स की क्षमता और विशेषज्ञता को मजबूत करता है।
उन्होंने कहा कि संस्थान का प्रयास है कि मरीजों को आधुनिक चिकित्सा सुविधाओं का लाभ सिम्स में ही उपलब्ध कराया जाए, ताकि जटिल उपचार के लिए उन्हें अन्य स्थानों पर जाने की आवश्यकता कम हो।
चिकित्सा अधीक्षक बोले- सर्जरी के बाद फिजियोथेरेपी भी अहम
सिम्स के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. लखन सिंह ने कहा कि जटिल ऑर्थोपेडिक मामलों में समय पर सही चिकित्सकीय मूल्यांकन और विशेषज्ञ उपचार बेहद महत्वपूर्ण होता है। इस मामले में सिम्स की टीम ने बेहतर समन्वय के साथ मरीज का उपचार किया।
उन्होंने बताया कि ऑपरेशन के बाद मरीज की नियमित निगरानी के साथ फिजियोथेरेपी और चिकित्सकों द्वारा बताए गए उपचार का पालन आगे की रिकवरी में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
ऑपरेशन के बाद स्थिति संतोषजनक
सर्जरी के बाद कन्हैया की स्थिति फिलहाल संतोषजनक बताई गई है। मरीज चिकित्सकीय निगरानी में है। चिकित्सकों के अनुसार नियमित फॉलो-अप और फिजियोथेरेपी के माध्यम से उसकी चलने-फिरने की क्षमता में आगे और सुधार की संभावना है।
चार वर्ष पहले हुए सड़क हादसे से शुरू हुई उपचार की लंबी प्रक्रिया के बाद सिम्स में हुई इस जटिल लिम्ब रिकंस्ट्रक्शन सर्जरी के जरिए मरीज के प्रभावित पैर की संरचना और कार्यक्षमता को बेहतर करने का प्रयास किया गया है। विशेषज्ञ चिकित्सकों और एनेस्थीसिया टीम के समन्वित प्रयास से पूरी हुई यह सर्जरी सिम्स में उपलब्ध जटिल ऑर्थोपेडिक उपचार की क्षमता को सामने लाती है।

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