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टिकट नहीं मिली तो भी संघर्ष नहीं छोड़ा— विधायक अटल श्रीवास्तव ने खोले 35 साल की सियासत के राज, सरकार पर भी साधा निशाना

Mohammed Israil
Mohammed Israil  - Editor
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00 छत्तीसगढ़ में शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में बहुत काम करने की जरूरत

‘राजनीति जनता के काम आने का माध्यम है’… हमर पहुना में कोटा विधायक ने खोले संघर्ष, सियासत और भविष्य के विजन के पन्ने
मोहम्मद इसराइल,बिलासपुर।

इंजीनियरिंग के बाद करीब 35 साल के राजनीतिक सफर, छात्र राजनीति से लेकर विधायक बनने तक का संघर्ष, टिकट से वंचित होने के बाद भी जारी राजनीतिक सक्रियता, 2019 का लोकसभा चुनाव, पर्यटन बोर्ड की जिम्मेदारी और अब कोटा विधायक के रूप में क्षेत्र की राजनीति—इन तमाम पहलुओं पर अटल श्रीवास्तव ने बिलासपुर प्रेस क्लब के लोकप्रिय कार्यक्रम ‘हमर पहुना’ में खुलकर बातचीत की।
कार्यक्रम में अटल श्रीवास्तव ने अपने राजनीतिक गुरु, राजनीति में आने की वजह, परिवार, पढ़ाई, खेल, व्यवसाय, पर्यटन से जुड़े अनुभव और छत्तीसगढ़ के विकास को लेकर अपनी सोच साझा की। बातचीत के दौरान उन्होंने प्रदेश की मौजूदा सरकार के ढाई साल के कार्यकाल पर भी सवाल उठाए। स्वास्थ्य, शिक्षा, सड़क, पर्यटन, सरकारी घोषणाओं के क्रियान्वयन और बिलासपुर के मास्टर प्लान जैसे मुद्दे बातचीत के प्रमुख केंद्र रहे।


‘मेरे राजनीतिक गुरु बीआर यादव’
अपने राजनीतिक सफर की शुरुआत और प्रेरणा के सवाल पर अटल श्रीवास्तव ने वरिष्ठ नेता बीआर यादव को अपना राजनीतिक गुरु बताया।
उन्होंने कहा कि छात्र राजनीति के समय बीआर यादव के साथ काम करने का अवसर मिला। इसी दौरान उन्होंने राजनीति को करीब से समझा। लोगों की समस्याओं को लेकर काम करने की प्रेरणा भी वहीं से मिली।
अटल श्रीवास्तव के मुताबिक उस समय राजनीति को समाजसेवा के नजरिए से देखा जाता था। किसी व्यक्ति की समस्या लेकर आने पर यह नहीं देखा जाता था कि वह किस राजनीतिक दल से जुड़ा है। अगर कोई व्यक्ति उम्मीद लेकर आपके पास आया है तो उसकी समस्या को गंभीरता से लेना और उसके काम के लिए प्रयास करना ही राजनीति का उद्देश्य होना चाहिए।
उन्होंने कहा—
“राजनीति जनता की सेवा और लोगों के काम आने का माध्यम है। इसे केवल पार्टी या चुनाव तक सीमित नहीं किया जाना चाहिए।”
1998 में मिली पहली बड़ी जिम्मेदारी
अपने राजनीतिक सफर की टाइमलाइन बताते हुए अटल श्रीवास्तव ने कहा कि 1998 में उन्हें शहर कांग्रेस कमेटी का महामंत्री बनाया गया।
करीब 14 वर्षों तक उन्होंने इस जिम्मेदारी का निर्वहन किया।
इसके बाद 2014 में भूपेश बघेल के प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष बनने के बाद उन्हें प्रदेश कांग्रेस कमेटी में महामंत्री की जिम्मेदारी मिली। इस दौरान उन्हें संगठन के अलग-अलग क्षेत्रों का प्रभार भी सौंपा गया।
इस तरह शहर की राजनीति से प्रदेश संगठन तक उनका राजनीतिक सफर आगे बढ़ता गया।
2018 में टिकट नहीं मिली, लेकिन राजनीति नहीं छोड़ी
विधानसभा चुनाव 2018 के दौरान टिकट नहीं मिलने का अनुभव भी अटल श्रीवास्तव ने साझा किया।
उन्होंने बताया कि तत्कालीन प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष भूपेश बघेल ने उन्हें फोन कर टिकट नहीं दिला पाने की बात कही थी। उस समय उन्होंने टिकट नहीं मिलने के बावजूद निराश होने के बजाय संघर्ष जारी रखने का फैसला किया।
उनका कहना था कि राजनीति लंबा संघर्ष है। एक चुनाव में टिकट नहीं मिलने से राजनीतिक यात्रा खत्म नहीं होती।
उन्होंने उस समय भी यही कहा था कि टिकट नहीं मिली तो कोई बात नहीं, वे सभी के लिए काम करते रहेंगे।
2019 में बिलासपुर लोकसभा से चुनाव
2018 के विधानसभा चुनाव में टिकट नहीं मिलने के बाद अगले ही वर्ष उन्हें कांग्रेस ने 2019 के लोकसभा चुनाव में बिलासपुर लोकसभा क्षेत्र से प्रत्याशी बनाया।
उन्होंने कार्यकर्ताओं के साथ चुनाव लड़ा, लेकिन चुनाव परिणाम उनके पक्ष में नहीं रहा।
लोकसभा चुनाव के बाद उन्हें छत्तीसगढ़ पर्यटन बोर्ड का अध्यक्ष बनाया गया।
पर्यटन बोर्ड अध्यक्ष के तौर पर राम वन गमन पर्यटन परिपथ पर काम
पर्यटन बोर्ड के अध्यक्ष के रूप में अपने कार्यकाल का उल्लेख करते हुए अटल श्रीवास्तव ने कहा कि छत्तीसगढ़ में पर्यटन की संभावनाएं बेहद व्यापक हैं।
उनके मुताबिक छत्तीसगढ़ के पास प्राकृतिक संपदा के साथ-साथ समृद्ध आदिवासी संस्कृति, परंपराएं, जल, जंगल, जमीन और ऐतिहासिक एवं पौराणिक धरोहरें हैं।
उन्होंने राम वन गमन पर्यटन परिपथ का उल्लेख करते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ में भगवान श्रीराम के वनवास से जुड़े अनेक स्थल हैं। इन स्थलों का विकास और संरक्षण पर्यटन की दृष्टि से महत्वपूर्ण है।
उन्होंने माता कौशल्या मंदिर, शबरी माता मंदिर सहित विभिन्न धार्मिक और प्राकृतिक स्थलों के विकास का भी उल्लेख किया।
उनके मुताबिक छत्तीसगढ़ की पर्यटन क्षमता को देश और दुनिया के सामने लाने की जरूरत है।
‘जल, जंगल, जमीन और आदिवासी संस्कृति हो छत्तीसगढ़ की पहचान’
अटल श्रीवास्तव ने कहा कि छत्तीसगढ़ को पर्यटन के क्षेत्र में अपनी अलग यूएसपी तैयार करनी होगी।
उनके अनुसार प्रदेश की पहचान उसके—
जल
जंगल
जमीन
आदिवासी संस्कृति
से बनाई जा सकती है।
उन्होंने प्रदेश की नदियों, जलाशयों, वन्यजीव अभयारण्यों, राष्ट्रीय उद्यानों, गुफाओं, जलप्रपातों और धार्मिक स्थलों का उल्लेख किया।
उनके मुताबिक बस्तर, सरगुजा, अचानकमार, कुटुमसर की गुफाएं, कांगेर वैली और इंद्रावती जैसे क्षेत्रों को व्यवस्थित पर्यटन सर्किट से जोड़ने की जरूरत है।
‘पर्यटक को सुरक्षा का भरोसा जरूरी’
पर्यटन के विकास को लेकर उन्होंने कहा कि किसी भी पर्यटक के लिए सबसे पहली जरूरत सुरक्षा की भावना है।
छत्तीसगढ़ आने वाले पर्यटक को यह भरोसा होना चाहिए कि वह प्रदेश में सुरक्षित तरीके से घूम सकता है।
उन्होंने बारिश के मौसम का भी उल्लेख किया। उनके मुताबिक बरसात छत्तीसगढ़ घूमने का सबसे खूबसूरत मौसम है। इस दौरान पूरा प्रदेश हरियाली की चादर ओढ़ लेता है और पहाड़ों से झरने बहने लगते हैं।
साय सरकार के ढाई साल पर स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर सवाल
कार्यक्रम में जब उनसे प्रदेश की मौजूदा सरकार के करीब ढाई साल के कार्यकाल को लेकर सवाल किया गया तो उन्होंने स्वास्थ्य, शिक्षा और सड़क जैसे मुद्दों पर अपनी बात रखी।
कोटा विधानसभा क्षेत्र के वनांचल इलाकों में मलेरिया और डेंगू की समस्या का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि बीमारी फैलने के बाद व्यवस्था करने के बजाय पहले से रोकथाम की तैयारी होनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि पहले मच्छरदानियों और क्लोरीन की गोलियों जैसी व्यवस्थाएं की जाती थीं, लेकिन अब इनमें कमी दिखाई देती है।
स्कूलों में शिक्षकों की कमी का मुद्दा
शिक्षा व्यवस्था को लेकर अटल श्रीवास्तव ने दावा किया कि कोटा विधानसभा क्षेत्र के कई स्कूल शिक्षकों की कमी से जूझ रहे हैं।
उन्होंने कहा कि कुछ स्कूलों में एक शिक्षक के भरोसे पढ़ाई चल रही है। वहीं कई स्कूलों में विद्यार्थियों की संख्या के अनुपात में पर्याप्त शिक्षक नहीं हैं।
उन्होंने आत्मानंद स्कूलों की व्यवस्था को लेकर भी चिंता जताई।
उनके मुताबिक इन स्कूलों की शुरुआत के समय शिक्षा के क्षेत्र में एक नई उम्मीद दिखाई दी थी, लेकिन अब उनकी स्थिति कमजोर होती नजर आ रही है।
घोषणाएं हुईं, लेकिन जमीन पर क्रियान्वयन को लेकर सवाल
अटल श्रीवास्तव ने बेलगहना में महाविद्यालय खोलने और कोटा ब्लॉक में आदिवासी समाज के लिए भवन निर्माण की घोषणाओं का भी जिक्र किया।
उन्होंने कहा कि घोषणा के बाद भी जमीन पर अपेक्षित प्रगति दिखाई नहीं दे रही है।
उनका कहना था कि सरकार की घोषणाओं के साथ उनके क्रियान्वयन की समय-सीमा भी तय होनी चाहिए।
‘मुख्यमंत्री पूरे प्रदेश के हैं’
बस्तर में विकास कार्यों को लेकर उन्होंने कहा कि नक्सल समस्या के कारण लंबे समय तक बस्तर का विकास प्रभावित रहा है। इसलिए वहां विकास होना जरूरी है।
लेकिन उन्होंने साथ ही कहा कि मुख्यमंत्री पूरे छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री हैं और प्रदेश के सभी क्षेत्रों में समान रूप से विकास होना चाहिए।
सड़कों और टेंडर प्रक्रिया पर भी सवाल
कोटा क्षेत्र सहित प्रदेश के विकास कार्यों का उल्लेख करते हुए उन्होंने सड़कों की खराब स्थिति पर सवाल उठाए।
उन्होंने विकास कार्यों की टेंडर प्रक्रिया में देरी और कार्यों की धीमी गति का मुद्दा भी उठाया।
उनके मुताबिक विकास के लिए योजनाओं की घोषणा के साथ उनका समय पर धरातल पर उतरना भी जरूरी है।
‘सरकार का स्पष्ट विजन दिखाई नहीं देता’
मौजूदा सरकार के कामकाज को लेकर अटल श्रीवास्तव ने कहा कि सरकार की प्राथमिकताएं अभी तक स्पष्ट नहीं हो पाई हैं।
उन्होंने कहा कि सरकार के पास छत्तीसगढ़ को किस दिशा में ले जाना है, इसका स्पष्ट रोडमैप दिखाई देना चाहिए।
उन्होंने पूर्ववर्ती सरकारों का उल्लेख करते हुए कहा कि अलग-अलग सरकारों के अपने-अपने विजन रहे हैं।
किसी सरकार ने अधोसंरचना पर जोर दिया तो किसी ने ग्रामीण और किसान अर्थव्यवस्था को मजबूत करने पर काम किया।
बिलासपुर के लिए दीर्घकालीन मास्टर प्लान की जरूरत
बिलासपुर के विकास को लेकर अटल श्रीवास्तव ने शहर के लिए दीर्घकालीन मास्टर प्लान की जरूरत बताई।
उन्होंने कहा कि अधिकारियों के बदलने के साथ विकास की प्राथमिकताएं बदलने से शहर का विकास प्रभावित होता है।
उनके मुताबिक बिलासपुर को लेकर ऐसा रोडमैप होना चाहिए जो लंबे समय तक शहर के विकास की दिशा तय करे।
‘बिलासपुर प्रेस क्लब सभी वर्गों को साथ लेकर पहल करे’
अटल श्रीवास्तव ने बिलासपुर प्रेस क्लब की भूमिका का भी उल्लेख किया।
उन्होंने कहा कि प्रेस क्लब ने पहले भी शहर से जुड़े कई महत्वपूर्ण मुद्दों को नेतृत्व दिया है।
उनके मुताबिक बिलासपुर के विकास के लिए प्रेस क्लब राजनीतिक दलों से ऊपर उठकर सभी वर्गों को साथ लेकर पहल कर सकता है।
उन्होंने कहा कि प्रेस क्लब के बैनर तले होने वाली ऐसी पहल में सभी राजनीतिक दलों और सामाजिक वर्गों के लोग शामिल हो सकते हैं।
उनके अनुसार बिलासपुर के विकास को लेकर साझा रोडमैप तैयार करने में प्रेस क्लब प्रभावी भूमिका निभा सकता है।
इंजीनियरिंग की पढ़ाई, प्रतियोगी परीक्षा और फिर राजनीति
बातचीत के दौरान अटल श्रीवास्तव ने अपने निजी जीवन के बारे में भी जानकारी दी।
उन्होंने बताया कि उनका परिवार मूल रूप से सरकारी नौकरी से जुड़ा रहा है। परिवार में किसी ने व्यवसाय नहीं किया था।
उनके दादा चाहते थे कि वे सरकारी नौकरी में जाएं और इंजीनियर बनें।
बिलासपुर में प्रारंभिक शिक्षा के बाद उन्होंने नागपुर से सिविल इंजीनियरिंग की पढ़ाई की।
इंजीनियरिंग के बाद करीब दो-तीन वर्ष तक प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी की। एक परीक्षा में वे महज कुछ अंकों से पीछे रह गए।
इसके बाद मित्रों की सलाह पर उन्होंने ठेकेदारी के क्षेत्र में कदम रखा। धीरे-धीरे व्यवसाय की तुलना में उनकी रुचि राजनीति में अधिक बढ़ती चली गई।
अब उनका व्यवसाय छोटा भाई संभालता है और वे पूरी तरह राजनीति में सक्रिय हैं।
क्रिकेट से लेकर तैराकी तक में आजमाया हाथ
अटल श्रीवास्तव ने अपने खेल जीवन का भी जिक्र किया।
उन्होंने बताया कि स्कूल के समय वे क्रिकेट में राज्य स्तर पर खेल चुके हैं।
वहीं बैडमिंटन में विश्वविद्यालय स्तर के खिलाड़ी रहे।
उन्होंने तैराकी में भी राज्य स्तर पर प्रतिनिधित्व किया।
उनके मुताबिक खेल आज भी उनकी पसंदीदा गतिविधियों में शामिल है।
राजनीतिक व्यस्तता के बीच परिवार के लिए समय
पारिवारिक जीवन को लेकर उन्होंने कहा कि राजनीति की व्यस्तता के कारण परिवार को समय देना चुनौतीपूर्ण होता है, लेकिन इसके बावजूद वे परिवार के लिए समय निकालने की कोशिश करते हैं।
उन्होंने बताया कि उनके दो बच्चे हैं।
उन्हें घूमने का भी शौक है। पर्यटन में रुचि होने के कारण वे समय निकालकर छत्तीसगढ़ के अलग-अलग क्षेत्रों में जाते रहते हैं।
बस्तर की यात्राओं का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ को समझने के लिए उसके प्राकृतिक और सांस्कृतिक क्षेत्रों को करीब से देखना जरूरी है।
‘हमर पहुना’ में सम्मान

कार्यक्रम के समापन अवसर पर बिलासपुर प्रेस क्लब की परंपरा के तहत कोटा विधायक अटल श्रीवास्तव का सम्मान किया गया।
प्रेस क्लब पदाधिकारियों और उपस्थित पत्रकारों ने उन्हें स्मृति-चिह्न भेंट किया।


कार्यक्रम के दौरान अटल श्रीवास्तव के साथ प्रेस क्लब पदाधिकारियों और पत्रकारों ने सामूहिक तस्वीर भी ली।
अंत में अटल श्रीवास्तव ने प्रेस क्लब और पत्रकारों का आभार व्यक्त किया।
उन्होंने कहा कि जनता से जुड़े मुद्दों पर संवाद का ऐसा मंच लोकतांत्रिक व्यवस्था को मजबूत करता है।
उन्होंने राजनीति से ऊपर उठकर बिलासपुर और छत्तीसगढ़ के विकास के लिए सामूहिक प्रयास किए जाने की बात कही।

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