बिलासपुर के सिम्स में पहली बार वीडियो असिस्टेड थोरास्कोपिक सर्जरी (VATS) से मरीज का सफल उपचार, अब हर महीने रेफर होने वाले 10-12 मरीजों को स्थानीय स्तर पर मिलेगी अत्याधुनिक सुविधा

बिलासपुर।
छत्तीसगढ़ आयुर्विज्ञान संस्थान (सिम्स) ने स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में ऐसा मुकाम हासिल किया है, जिसे अब तक केवल बड़े महानगरों के सुपर स्पेशियलिटी अस्पतालों से जोड़कर देखा जाता था। पहली बार सिम्स में वीडियो असिस्टेड थोरास्कोपिक सर्जरी (VATS) जैसी अत्याधुनिक और न्यूनतम इनवेसिव तकनीक से टीबी जनित प्लूरल इफ्यूजन (फेफड़ों के आसपास पानी भरने) से पीड़ित 57 वर्षीय मरीज का सफल ऑपरेशन किया गया। इस उपलब्धि के साथ सिम्स ने यह साबित कर दिया कि अब प्रदेश के मरीजों को जटिल वक्ष एवं फेफड़ों की बीमारियों के इलाज के लिए महानगरों की ओर रुख करने की मजबूरी नहीं रहेगी।
यह उपलब्धि केवल एक सफल ऑपरेशन नहीं, बल्कि प्रदेश की सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था के लिए नई शुरुआत मानी जा रही है। अब तक ऐसे जटिल मामलों में मरीजों को रायपुर, नागपुर, दिल्ली या अन्य बड़े शहरों के अस्पतालों में रेफर किया जाता था, लेकिन अब वही सुविधा बिलासपुर में उपलब्ध हो गई है।
तीन महीने तक नहीं मिली बीमारी की सही पहचान
57 वर्षीय मरीज पिछले करीब तीन महीने से लगातार बुखार से पीड़ित था। उसने पहले निजी अस्पतालों में इलाज कराया और टाइफाइड की दवाइयां भी लीं। कुछ समय राहत मिली, लेकिन बुखार दोबारा शुरू हो गया। बाद में सोनोग्राफी और अन्य जांचों में दाहिने फेफड़े के आसपास बड़ी मात्रा में पानी जमा होने का पता चला।
मरीज को सिम्स के टीबी विभाग में भर्ती किया गया, जहां विस्तृत जांच के बाद ट्यूबरकुलस प्लूरल इफ्यूजन की पुष्टि हुई। एंटी-ट्यूबरकुलोसिस ट्रीटमेंट (ATT) शुरू किया गया, लेकिन बार-बार प्लूरल टैपिंग के बावजूद फेफड़ों में पानी फिर भरने लगा। इसके बाद मरीज को जनरल सर्जरी विभाग भेजा गया।
विशेषज्ञों की टीम ने लिया बड़ा फैसला
मरीज की गंभीर स्थिति को देखते हुए जनरल सर्जरी, टीबी एवं एनेस्थीसिया विभाग के विशेषज्ञ चिकित्सकों ने संयुक्त रूप से आधुनिक वीडियो असिस्टेड थोरास्कोपिक सर्जरी (VATS) करने का निर्णय लिया।
ऑपरेशन के दौरान फेफड़े के आसपास जमा द्रव को सफलतापूर्वक निकाला गया। साथ ही आवश्यक डिकॉर्टिकेशन और बायोप्सी भी की गई। पूरी सर्जरी सफल रही और ऑपरेशन के बाद मरीज की स्थिति में तेजी से सुधार हुआ। वर्तमान में मरीज स्वस्थ है और नियमित फॉलो-अप पर है।
इन विशेषज्ञों ने किया सफल ऑपरेशन
इस जटिल सर्जरी को जनरल सर्जरी विभाग के डॉ. कोमल प्रसाद देवांगन, डॉ. विनोद तमकनंद और डॉ. सुशील पात्रे ने सफलतापूर्वक अंजाम दिया।
ऑपरेशन में जूनियर रेजिडेंट डॉ. ऋतेश, डॉ. गरिमा शर्मा, टीबी एवं चेस्ट विभाग के डॉ. अनिल डरसेना एवं उनकी टीम ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
एनेस्थीसिया की जिम्मेदारी विभागाध्यक्ष डॉ. मधुमिता मूर्ति एवं उनकी टीम ने संभाली, जबकि ऑपरेशन थिएटर स्टाफ अश्विनी का भी उल्लेखनीय योगदान रहा।
अब हर महीने 10 से 12 मरीजों को मिलेगा यहीं इलाज
सिम्स के अधिष्ठाता डॉ. रमणेश मूर्ति ने बताया कि आधुनिक VATS मशीन की उपलब्धता संस्थान के लिए बड़ी उपलब्धि है। उन्होंने कहा कि पहले इस तरह के 10 से 12 मरीज हर महीने सिम्स पहुंचते थे, लेकिन मशीन नहीं होने के कारण उन्हें बड़े अस्पतालों में रेफर करना पड़ता था। अब यह सुविधा सिम्स में उपलब्ध होने से प्रदेशवासियों को अपने ही शहर में सुपर स्पेशियलिटी स्तर का इलाज मिलेगा।
एक से दो लाख तक का खर्च बचेगा
चिकित्सा अधीक्षक डॉ. लखन सिंह ने बताया कि निजी अस्पतालों में इस तरह की वीडियो असिस्टेड थोरास्कोपिक सर्जरी पर सामान्यतः एक से दो लाख रुपये तक का खर्च आता है। जबकि सिम्स में यह सुविधा शासकीय शुल्क पर और पात्र मरीजों को आयुष्मान भारत योजना के तहत उपलब्ध कराई जा सकती है। इससे मरीजों का आर्थिक बोझ भी काफी कम होगा और दूसरे शहरों में इलाज कराने की परेशानी भी नहीं होगी।
विशेषज्ञों की सलाह
विशेषज्ञ चिकित्सकों ने कहा कि यदि किसी व्यक्ति को लगातार बुखार, सीने में दर्द, सांस फूलना या फेफड़ों में पानी भरने जैसे लक्षण दिखाई दें तो उन्हें नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। समय पर जांच और आधुनिक तकनीक के जरिए ऐसे जटिल मामलों का भी सुरक्षित और सफल उपचार संभव है।
बिलासपुर के लिए बड़ी उपलब्धि
सिम्स में VATS तकनीक की शुरुआत केवल एक नई मशीन का इस्तेमाल नहीं, बल्कि सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं के स्तर में बड़ा बदलाव है। अब बिलासपुर का सिम्स उन चुनिंदा सरकारी संस्थानों की श्रेणी में शामिल हो गया है, जहां महानगरों जैसी अत्याधुनिक थोरासिक सर्जरी की सुविधा उपलब्ध है। इससे छत्तीसगढ़ के हजारों मरीजों को अपने ही प्रदेश में गुणवत्तापूर्ण, किफायती और आधुनिक उपचार का लाभ मिल सकेगा।



