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सर्पदंश मुआवजा घोटाले में नया मोड़, तीन लिपिकों की गिरफ्तारी के विरोध में उतरा कर्मचारी संघ, कलेक्ट्रेट और एसपी कार्यालय में प्रदर्शन

Mohammed Israil
Mohammed Israil  - Editor
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कहा- उच्च अधिकारियों के आदेश पर हुई कार्रवाई, केवल लिपिकों को आरोपी बनाना अनुचित; गिरफ्तारी को बताया एकतरफा, पुलिस जांच पर उठाए सवाल

०० राजस्व विभाग का कार्य ठप करने की चेतावनी
बिलासपुर। सर्पदंश मृत्यु मुआवजा घोटाले में बिलासपुर तहसील के तीन राजस्व कर्मचारियों की गिरफ्तारी के बाद मामला अब कर्मचारी संगठनों तक पहुंच गया है। छत्तीसगढ़ प्रदेश लिपिक वर्गीय शासकीय कर्मचारी संघ ने सोमवार को कलेक्ट्रेट और पुलिस अधीक्षक कार्यालय पहुंचकर विरोध प्रदर्शन किया तथा कलेक्टर और एसपी के नाम ज्ञापन सौंपा। संघ ने तहसील कार्यालय में पदस्थ तीन सहायक ग्रेड-2 कर्मचारियों की गिरफ्तारी को एकतरफा कार्रवाई बताते हुए पुलिस की जांच प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं।


संघ के प्रदेश अध्यक्ष रोहित तिवारी के नेतृत्व में कर्मचारियों ने कहा कि तहसील कार्यालय में पदस्थ नरेंद्र कुमार कौशिक, हरिशंकर राठौर और गरीबराम बिंझवार को आरबीसी 6-4 से जुड़े मामलों में बयान के नाम पर सरकंडा थाना लाया गया। आरोप है कि तीनों कर्मचारियों को बिना वैधानिक नोटिस दिए दो से तीन दिन तक थाने में बैठाकर पूछताछ की गई और बाद में रविवार शाम जिला एवं सत्र न्यायालय में पेश कर जेल भेज दिया गया।


संघ का दावा- तीनों कर्मचारियों की नहीं थी कोई भूमिका
ज्ञापन में कर्मचारी संघ ने कहा है कि आरबीसी 6-4 के तहत मिलने वाले सर्पदंश मृत्यु मुआवजा प्रकरणों में संबंधित लिपिकों की कोई स्वतंत्र भूमिका या निर्णय लेने का अधिकार नहीं होता। उनका कार्य केवल कार्यालयीन प्रक्रिया का पालन करना होता है। प्रत्येक प्रकरण में अंतिम कार्रवाई उच्च अधिकारियों की स्वीकृति और आदेश के बाद ही की जाती है।


संघ का कहना है कि पुलिस ने आवेदकों, उनके सहयोगियों तथा अन्य संबंधित लोगों से पूछताछ के बाद केवल संदेह के आधार पर लिपिकों के खिलाफ कार्रवाई की है। ज्ञापन में यह भी आरोप लगाया गया है कि तहसील कार्यालय में पदस्थ अन्य कर्मचारियों के खिलाफ भी कार्रवाई की कोशिश की जा रही है, जिससे कर्मचारियों में भय और असुरक्षा का माहौल है।

आरबीसी 6-4 की पूरी प्रक्रिया बताकर खुद को किया अलग
ज्ञापन में कर्मचारी संघ ने सर्पदंश मृत्यु मुआवजा स्वीकृति की पूरी प्रशासनिक प्रक्रिया का भी उल्लेख किया है। संघ के अनुसार—
सर्पदंश या जहरीले जीव-जंतु के काटने से मौत होने पर सबसे पहले संबंधित थाने में एफआईआर दर्ज होती है।
पुलिस घटनास्थल पहुंचकर पंचनामा तैयार करती है और शव को पोस्टमार्टम के लिए अस्पताल भेजती है।
पोस्टमार्टम के बाद मृतक के परिजन एफआईआर और पोस्टमार्टम रिपोर्ट के आधार पर मुआवजे के लिए आवेदन प्रस्तुत करते हैं।
आवेदन संबंधित तहसील कार्यालय पहुंचता है, जहां उसे जांच के लिए हल्का पटवारी को भेजा जाता है।
पटवारी मौके की जांच कर प्रतिवेदन तैयार करता है।
इसके बाद राजस्व निरीक्षक तथा नायब तहसीलदार स्तर पर परीक्षण होता है।
अंत में तहसीलदार और अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) की स्वीकृति के बाद मुआवजा स्वीकृत किया जाता है।
संघ का कहना है कि इस पूरी प्रक्रिया में लिपिक केवल कार्यालयीन अभिलेखों के संधारण और फाइल प्रक्रिया का कार्य करते हैं तथा अंतिम निर्णय लेने का अधिकार उनके पास नहीं होता।
रोहित तिवारी बोले- उच्च अधिकारियों के निर्देश पर काम करते हैं कर्मचारी
प्रदेश अध्यक्ष रोहित तिवारी ने कहा कि राजस्व कर्मचारी शासन की निर्धारित प्रक्रिया और वरिष्ठ अधिकारियों के मार्गदर्शन में कार्य करते हैं। ऐसे में केवल लिपिकों के खिलाफ कार्रवाई करना उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि यदि किसी प्रकरण की जांच हो रही है तो पूरी प्रक्रिया और सभी स्तरों की जिम्मेदारी की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।
उन्होंने आरोप लगाया कि बिना वैधानिक नोटिस के कर्मचारियों को कई दिनों तक थाने में बैठाकर पूछताछ करना और बाद में गिरफ्तार करना न्यायसंगत नहीं है। इससे कर्मचारी वर्ग में असंतोष है।
दो प्रमुख मांगें रखीं
कर्मचारी संघ ने कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक को दिए ज्ञापन में मांग की है कि—
गिरफ्तार तीनों कर्मचारियों के विरुद्ध की गई कार्रवाई की निष्पक्ष समीक्षा की जाए।
बिना पर्याप्त साक्ष्य केवल संदेह के आधार पर कर्मचारियों के विरुद्ध दंडात्मक कार्रवाई न की जाए तथा जांच निष्पक्ष और विधिसम्मत तरीके से की जाए।
घोटाले की जांच पहले से जारी
गौरतलब है कि सर्पदंश मृत्यु मुआवजा घोटाले की जांच पहले से जारी है। पुलिस का आरोप है कि फर्जी दस्तावेजों और कथित रूप से तैयार किए गए पोस्टमार्टम रिकॉर्ड के आधार पर सरकारी मुआवजा स्वीकृत कराया गया। इस मामले में पहले सिम्स की पूर्व डॉक्टर की गिरफ्तारी हो चुकी है और जांच का दायरा लगातार बढ़ रहा है। इसी क्रम में बिलासपुर तहसील के तीन कर्मचारियों की गिरफ्तारी के बाद अब कर्मचारी संगठन खुलकर उनके समर्थन में सामने आ गए हैं।

*सर्प दंश मामले में राजस्व विभाग के लिपिकों की गिरफ्तारी के विरोध में संघ ने किया प्रदर्शन, कलेक्टर और एस पी को ज्ञापन
सर्प दंश मामले के प्रकरण में एस डी एम कार्यालय और तहसील कार्यालय में पदस्थ तीन लिपिकों को नरेन्द्र कौशिक,हरिशंकर राठौर, और गरीब बिंझवार को पुलिस द्वारा गिरफ़्तार करके जेल भेजा गया, इसके विरोध में आज छग प्रदेश लिपिक वर्गीय शासकीय कर्मचारी संघ के प्रदेश अध्यक्ष रोहित तिवारी के नेतृत्व में राजस्व विभाग के लिपिकों के साथ जमकर प्रदर्शन किया और कलेक्टर एस पी को ज्ञापन सौंपा, संघ के प्रदेश अध्यक्ष रोहित तिवारी ने बताया की सर्प दंश की प्रक्रिया में सबसे पहले पुलिस द्वारा पंच नामा किया जाता है संबंधित डॉक्टर द्वारा पोस्ट मार्डेम्म रिपोर्ट के आधार पर संबंधित पटवारी द्वारा प्रतिवेदन प्रस्तुत किया जाता है तहसील दार, एस डी एम मौके पर पहुंच कर मुवायना करने के बाद प्रकरण लिपिक के पास प्रस्तुत करने आता है और प्रकरण पर निराकरण करने का जांच का ओर निर्णय लेने का अधिकार तसीलदार ओर उच्च अधिकारियों का होता है परन्तु पुलिस ने जांच में लिपिकों की गिरफ्तारी की अन्य जो जिम्मेदार अधिकारी कर्मचारी है उनसे अभी तक पूछताछ भू नहीं की गई अतः जांच एक पक्षीय है संघ ने आज जिला कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक को ज्ञापन सौंपा और मांग की है कि उक्त प्रकरण की सूक्ष्म जांच की जाय और निर्दोष लिपिकों को रिहा किया जाय, आज ज्ञापन प्रदर्शन में प्रदेश अध्यक्ष रोहित तिवारी , जिला अध्यक्ष सूर्य प्रकाश कश्यप, वर्षा रानी चरण प्रांतीय सचिव महिला प्रकोष्ठ, रजनी मेहर जिलाध्यक्ष महिला प्रकोष्ठ, प्रदीप तिवारी जिला सचिव, ओपी तिवारी, रिंकेश ध्रुव, विगेश कुमार, मेघा छावड़ा , विनय विश्वकर्मा, गोल्डी देवांगन चंचल मिश्रा, जेबा खान , मंजू एक्का, मंजू खरे लव कुमार साहू,रामनारायणु श्रीवास, उमेश चक्रधारी, जूही सोम सहित बड़ी संख्या में लिपिक उपस्थिति रहे।

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