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लाखों पेंशनरों को बड़ी राहत: अब डीआर के लिए एमपी-छत्तीसगढ़ की आपसी सहमति जरूरी नहीं, महंगाई राहत मिलने का रास्ता हुआ आसान

Mohammed Israil
Mohammed Israil  - Editor
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बिलासपुर। मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ के लाखों पेंशनरों एवं परिवार पेंशनरों के लिए बड़ी राहत की खबर है। मध्यप्रदेश पुनर्गठन अधिनियम, 2000 की धारा-49 के तहत पेंशनरों को मिलने वाली महंगाई राहत (डीआर) की स्वीकृति के लिए अब दोनों राज्यों की आपसी सहमति की अनिवार्यता समाप्त कर दी गई है। इस निर्णय के बाद दोनों राज्य सरकारें अपने-अपने स्तर पर स्वतंत्र रूप से महंगाई राहत (डीआर) संबंधी आदेश जारी कर सकेंगी, जिससे पेंशनरों को समय पर डीआर मिलने का रास्ता साफ हो गया है।
छत्तीसगढ़ अधिकारी-कर्मचारी पेंशनर्स एसोसिएशन ने इस निर्णय का स्वागत करते हुए इसे दोनों राज्यों के लाखों पेंशनरों के हित में एक महत्वपूर्ण और सकारात्मक कदम बताया है।
एसोसिएशन लंबे समय से कर रहा था मांग
एसोसिएशन के प्रदेशाध्यक्ष पी.आर. यादव ने बताया कि संगठन ने इस विषय को लेकर छत्तीसगढ़ के सभी सांसदों और विधायकों को ज्ञापन सौंपा था। जनप्रतिनिधियों ने भी अपनी अनुशंसा के साथ मुख्यमंत्री को पत्र भेजकर मांग का समर्थन किया।
ज्ञापन में प्रमुख मांग यह थी कि महंगाई राहत की स्वीकृति के लिए दोनों राज्यों की आपसी सहमति की बाध्यता समाप्त की जाए और प्रत्येक राज्य सरकार को स्वतंत्र रूप से निर्णय लेने का अधिकार दिया जाए।
17 जुलाई को जारी हुआ आदेश
पी.आर. यादव ने बताया कि संगठन की मांग के अनुरूप 17 जुलाई 2026 को मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ शासन के सचिव एवं अपर मुख्य सचिव स्तर से पत्र जारी कर महंगाई राहत (डीआर) की स्वीकृति के लिए आपसी सहमति की अनिवार्यता समाप्त कर दी गई।
अब क्या होगा फायदा?
इस फैसले के बाद—
दोनों राज्य सरकारें अपने-अपने स्तर पर स्वतंत्र रूप से डीआर संबंधी आदेश जारी कर सकेंगी।
महंगाई राहत जारी होने में होने वाली प्रशासनिक देरी कम होगी।
लाखों पेंशनरों और परिवार पेंशनरों को समय पर महंगाई राहत मिलने का मार्ग प्रशस्त होगा।
डीआर स्वीकृति के लिए दूसरे राज्य के निर्णय का इंतजार नहीं करना पड़ेगा।
एसोसिएशन ने जताया आभार
छत्तीसगढ़ अधिकारी-कर्मचारी पेंशनर्स एसोसिएशन ने इस निर्णय का स्वागत करते हुए कहा कि इससे भविष्य में पेंशनरों को महंगाई राहत समय पर उपलब्ध कराने की प्रक्रिया अधिक सरल और प्रभावी होगी। प्रदेशाध्यक्ष पी.आर. यादव ने इसे पेंशनरों के लंबे समय से लंबित एक महत्वपूर्ण मुद्दे के समाधान की दिशा में बड़ा कदम बताया।

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