‘जलप्रलय की मार: किसी का आशियाना उजड़ा, किसी की जिंदगी की पूंजी बही… करोड़ों की सरकारी संपत्ति तबाह, सैकड़ों परिवारों पर आफत का पहाड़
बिलासपुर। दो दिन की मूसलाधार बारिश ने बिलासपुर को ऐसी शहरी आपदा (Urban Flood Disaster) में धकेल दिया, जिसने विकास के दावों की तस्वीर बदल दी। शहर की करोड़ों रुपये की सड़कें धंस गईं, सीवरेज और ड्रेनेज सिस्टम की परतें उखड़कर सामने आ गईं, सैकड़ों घरों में पानी घुस गया, लोगों की वर्षों की जमा पूंजी बर्बाद हो गई, अस्पतालों तक में दवाइयां, इंजेक्शन और चिकित्सा उपकरण पानी में डूब गए। कई मकानों में दरारें पड़ गईं तो कई इलाकों में लोगों को अपने ही घर छोड़ने की नौबत आ गई। हालात इतने बिगड़े कि धूम क्षेत्र में 150 से अधिक मकानों में पानी घुसने से आक्रोशित लोगों ने मुख्य मार्ग पर चक्काजाम कर दिया। यह केवल बारिश नहीं थी, बल्कि बिलासपुर के लिए करोड़ों की तबाही बनकर आई।


















शहर के बंधवापारा, जोरापारा, सरकंडा, चांटीडीह, लिंगियाडीह, देवनंदन नगर, विजयापुरम, ड्रीम इम्पीरिया, जगदंबा कॉलोनी, डबरीपारा, चिंगराजपारा, राजकिशोर नगर, बिजौर, बहतराई सहित अनेक मोहल्ले जलभराव की चपेट में आ गए। घरों के भीतर घुटनों से लेकर कमर तक पानी भर गया। राशन, बिस्तर, फर्नीचर, इलेक्ट्रॉनिक सामान, दस्तावेज और घरेलू सामग्री पानी में खराब हो गई।
करोड़ों की सड़कें बारिश में बह गईं, विकास पर उठे सवाल
बारिश ने शहर के इंफ्रास्ट्रक्चर की सबसे बड़ी परीक्षा ले ली। कई नई और पुरानी सड़कें धंस गईं। जगह-जगह बड़े गड्ढे बन गए। तोरवा नाका के पास सड़क टूट गई तो अंबेडकर स्कूल के समीप सड़क पर बड़ा गड्ढा बनने से बैरिकेडिंग करनी पड़ी। नेहरू चौक से दर्रीघाट तक बनी सड़क सहित कई प्रमुख मार्गों को नुकसान पहुंचा। सीवरेज परियोजनाओं और जल निकासी व्यवस्था को लेकर भी सवाल तेज हो गए।
अस्पताल भी नहीं बचा, दवाइयों से लेकर मेडिकल उपकरण तक डूबे
सरकंडा क्षेत्र के अस्पतालों में पानी घुसने से दवाइयां, इंजेक्शन, चिकित्सा उपकरण और जरूरी स्वास्थ्य सामग्री प्रभावित हुई। स्वास्थ्य सेवाओं पर भी बारिश का सीधा असर देखने को मिला।
मकानों में दरारें, घरों में कैद हुए परिवार
बंधवापारा, जोरापारा और सरकंडा सहित कई इलाकों में मकानों में दरारें आने की शिकायतें सामने आईं। कई परिवार पूरी रात घरों में फंसे रहे। लोगों ने बच्चों और बुजुर्गों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने के लिए पड़ोसियों की मदद ली।
धूम क्षेत्र में फूटा गुस्सा, 150 से ज्यादा घरों में घुसा पानी, सड़क पर उतरे लोग
धूम क्षेत्र में हालात सबसे अधिक खराब रहे। यहां 150 से अधिक मकानों में पानी भर गया। घरों में रखा राशन, कपड़े, फर्नीचर और जरूरी सामान बर्बाद हो गया। नाराज लोगों ने मुख्य मार्ग पर चक्काजाम कर प्रशासन के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया।








दूसरे दिन भी चला राहत अभियान, घरों से निकाला गया पानी
नगर निगम की टीमें दूसरे दिन भी राहत, बचाव और सफाई अभियान में जुटी रहीं। निगम आयुक्त प्रकाश कुमार सर्वे ने अधिकारियों के साथ प्रभावित क्षेत्रों का निरीक्षण किया। जिन मकानों में पानी भरा था वहां जेटिंग पंप से पानी निकालने के निर्देश दिए गए। निगम की टीमों ने जलभराव वाले क्षेत्रों से लोगों को सुरक्षित निकाला और जरूरतमंद परिवारों तक भोजन के पैकेट भी पहुंचाए।
क्षतिग्रस्त सड़कें और नालियां तत्काल सुधारने के निर्देश
निरीक्षण के दौरान बारिश से क्षतिग्रस्त सड़कों, नालियों और अन्य नगर निगम अधोसंरचनाओं का जायजा लिया गया। अभियंताओं को क्षतिग्रस्त मार्गों की तत्काल मरम्मत शुरू करने के निर्देश दिए गए। साथ ही पूरे शहर की जल निकासी व्यवस्था का सर्वे कर सुधार कार्ययोजना तैयार करने को कहा गया।
कीचड़, गंदगी और संक्रमण का खतरा बढ़ा
बारिश थमने के बाद शहर के कई हिस्सों में कीचड़ और गंदगी फैल गई। नगर निगम ने विशेष सफाई अभियान शुरू किया। सड़कों, गलियों और सार्वजनिक स्थानों की सफाई के साथ नालियों की सफाई और जल निकासी व्यवस्था को प्राथमिकता दी गई।
उपमुख्यमंत्री अरुण साव की लगातार मॉनिटरिंग
उपमुख्यमंत्री एवं नगरीय प्रशासन मंत्री अरुण साव लगातार राहत कार्यों की मॉनिटरिंग कर रहे हैं। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि प्रभावित परिवारों तक तत्काल सहायता पहुंचे और शहर की व्यवस्था जल्द सामान्य करने के लिए सभी आवश्यक कदम प्राथमिकता से उठाए जाएं। निगम आयुक्त ने अधिकारियों और जोन प्रभारियों को मुख्यालय नहीं छोड़ने तथा लगातार फील्ड में रहकर राहत, बचाव, सड़क मरम्मत, जल निकासी और सफाई कार्यों की निगरानी करने के निर्देश दिए।
विधानसभा से लौटते ही मैदान में उतरे विधायक सुशांत शुक्ला
बेलतरा विधायक सुशांत शुक्ला विधानसभा सत्र से लौटते ही सीधे बारिश प्रभावित क्षेत्रों में पहुंचे। उन्होंने जोरापारा, ड्रीम इम्पीरिया, जगदंबा कॉलोनी, चांटीडीह, देवनंदन नगर, विजयापुरम, डबरीपारा, चिंगराजपारा, लिंगियाडीह, राजकिशोर नगर, बिजौर और बहतराई सहित कई इलाकों का दौरा किया। उन्होंने प्रभावित परिवारों से मुलाकात कर हालात का जायजा लिया और अधिकारियों को जल निकासी, राहत, पेयजल और सफाई व्यवस्था तत्काल दुरुस्त करने के निर्देश दिए।

शहर के सामने सबसे बड़ा सवाल—बारिश या शहरी जलभराव का संकट?
इस बारिश ने केवल मकानों और सड़कों को नुकसान नहीं पहुंचाया, बल्कि बिलासपुर के शहरी ढांचे की कमजोरियां भी उजागर कर दीं। जहां एक ओर करोड़ों की सार्वजनिक संपत्ति क्षतिग्रस्त हुई, वहीं दूसरी ओर हजारों लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी प्रभावित हुई। सड़कें, सीवरेज, नालियां, अस्पताल, रिहायशी कॉलोनियां और बाजार—लगभग हर क्षेत्र इस आपदा की चपेट में आया। बिलासपुर ने पिछले कुछ वर्षों में कई बार जलभराव देखा है, लेकिन इस बार की बारिश ने इसे शहरी आपदा का रूप दे दिया, जिसकी मार सरकारी ढांचे से लेकर आम नागरिकों के जीवन तक साफ दिखाई दी।



