
बिलासपुर। घरों में बिखरे सिक्के, बटन बैटरी, चुंबक और छोटे खिलौनों के पार्ट अब बच्चों के लिए खामोश खतरा बनते जा रहे हैं। बिलासपुर में एक बार फिर ऐसा ही मामला सामने आया, जहां खेलते-खेलते 6 वर्षीय मासूम ने सिक्का निगल लिया। सिक्का सीधे अन्ननली के ऊपरी हिस्से में जाकर फंस गया और बच्चे को निगलने में गंभीर परेशानी होने लगी। करीब 11 घंटे तक चले संकट के बाद सिम्स बिलासपुर के डॉक्टरों ने जटिल एंडोस्कोपिक प्रक्रिया के जरिए सिक्का निकालकर बच्चे की जान बचा ली।
सरगोंड (कोटा) निवासी बैगा जनजाति के 6 वर्षीय नरेंद्र ने सोमवार सुबह करीब 7 बजे खेलते समय गलती से सिक्का निगल लिया। घटना के बाद वह न कुछ खा पा रहा था और न ही ठीक से निगल पा रहा था। परिजन उसे पहले पेंड्रा के एक निजी अस्पताल ले गए, जहां प्राथमिक उपचार के बाद गंभीर स्थिति देखते हुए सिम्स बिलासपुर रेफर कर दिया गया।
शाम करीब 6:30 बजे सिम्स पहुंचने पर ईएनटी विभाग ने तत्काल जांच कराई। रेडियोलॉजी विभागाध्यक्ष डॉ. अर्चना सिंह की एक्स-रे रिपोर्ट में पता चला कि सिक्का श्वासनली के मुहाने के ठीक पीछे अन्ननली के ऊपरी हिस्से में फंसा हुआ है। यह ऐसी स्थिति थी, जिसमें थोड़ी सी भी देरी जानलेवा साबित हो सकती थी।
एनेस्थीसिया विभागाध्यक्ष डॉ. मधुमिता मूर्ति की टीम ने सामान्य एनेस्थीसिया दिया। इसके बाद ईएनटी विभागाध्यक्ष डॉ. आरती पाण्डेय और सहायक प्राध्यापक डॉ. श्वेता मित्तल के नेतृत्व में रिजिड इसोफैगोस्कोपी की गई। विशेषज्ञों ने बेहद सावधानी से सिक्का बाहर निकाल लिया। ऑपरेशन पूरी तरह सफल रहा और बच्चे की हालत सामान्य हो गई।
सिम्स के अधिष्ठाता डॉ. रमणेश मूर्ति ने कहा कि ईएनटी, रेडियोलॉजी और एनेस्थीसिया विभाग के समन्वित प्रयासों से जटिल और आपातकालीन मामलों का भी समय पर सफल इलाज संभव हो रहा है। वहीं चिकित्सा अधीक्षक डॉ. लखन सिंह ने कहा कि सिक्का, बटन बैटरी, चुंबक या अन्य छोटी वस्तुएं निगलना बच्चों में गंभीर मेडिकल इमरजेंसी है और ऐसे मामलों में घरेलू उपाय करने के बजाय तत्काल अस्पताल पहुंचना चाहिए।
ईएनटी विभागाध्यक्ष डॉ. आरती पाण्डेय ने अभिभावकों को सलाह दी कि घर में सिक्के, बटन बैटरी, छोटे खिलौनों के हिस्से और अन्य सूक्ष्म वस्तुएं बच्चों की पहुंच से दूर रखें। यदि बच्चा कोई वस्तु निगल ले और उसे निगलने में परेशानी, लगातार लार टपकना, गले में दर्द या सांस लेने में दिक्कत हो तो बिना देर किए विशेषज्ञ चिकित्सक से संपर्क करें।
स्पेशल रिपोर्ट : क्यों बढ़ रहे हैं ऐसे मामले?
बच्चों में सिक्का, बटन बैटरी, चुंबक, पिन, मोती और खिलौनों के छोटे हिस्से निगलने की घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं। डॉक्टरों के मुताबिक 1 से 6 वर्ष तक के बच्चे हर चीज को मुंह में डालकर पहचानने की कोशिश करते हैं, इसलिए इस उम्र में ऐसे हादसों का खतरा सबसे अधिक रहता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि बटन बैटरी सबसे खतरनाक होती है। यह कुछ घंटों में ही अन्ननली को जला सकती है और स्थायी नुकसान या मौत तक का कारण बन सकती है। वहीं कई चुंबक निगलने पर आंतों में छेद होने का खतरा बढ़ जाता है।
इन लक्षणों को बिल्कुल नजरअंदाज न करें
निगलने में अचानक कठिनाई होना।
लगातार लार टपकना।
गले या सीने में दर्द।
खाना या पानी पीते ही उल्टी होना।
सांस लेने में तकलीफ या तेज खांसी।
बच्चा अचानक बेचैन होकर रोने लगे।
क्या न करें
जबरदस्ती खाना या केला खिलाने की कोशिश न करें।
उंगली डालकर वस्तु निकालने का प्रयास न करें।
घरेलू नुस्खों पर भरोसा न करें।
लक्षण कम दिखने पर भी अस्पताल जाने में देरी न करें।
क्या करें
बच्चे को तुरंत नजदीकी अस्पताल या ईएनटी विशेषज्ञ के पास ले जाएं।
एक्स-रे या जरूरी जांच तुरंत कराएं।
डॉक्टर की सलाह के बिना कोई दवा या घरेलू उपचार न करें।
यह मामला एक बार फिर याद दिलाता है कि घर में मौजूद एक छोटा-सा सिक्का भी मासूम बच्चों के लिए जानलेवा खतरा बन सकता है। समय पर पहचान, तुरंत अस्पताल पहुंचना और विशेषज्ञ उपचार ही ऐसे मामलों में सबसे बड़ा जीवनरक्षक उपाय है।



